नई दिल्ली.
हवाई किराये में करीब 700 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के आरोप से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सोमवार को मामले को तत्काल सूचीबद्ध कराने की मांग लेकर पहुंचे वकील से अदालत ने कहा कि 'हवाई यात्रा मत कीजिए।'
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ के सामने एक अधिवक्ता ने इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विमानन किराये में 700 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इस पर पीठ ने तत्काल सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हवाई किराये में असामान्य रूप से भारी बढ़ोतरी हुई है। याचिकाकर्ता इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहा था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अदालत ने इस स्तर पर तत्काल सुनवाई की अनुमति नहीं दी। इस याचिका में देश के नागरिक विमानन क्षेत्र के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र नियामक बनाने की मांग की गई है, ताकि हवाई यात्रियों के हितों की रक्षा हो सके और व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। इसके साथ ही निजी एयरलाइंस की ओर से हवाई किराये और अन्य सहायक शुल्कों में होने वाले 'अनिश्चित उतार-चढ़ाव' को नियंत्रित करने के लिए नियामकीय दिशा-निर्देश बनाने की मांग भी की गई है।
16 अक्टूबर 2026 को इस याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि देश के विमानन क्षेत्र को विनियमित करने के उद्देश्य से 2024 के कानून के तहत बनाए गए नियमों को प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है। सरकार के मुताबिक, इन नियमों को दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किए जाने की संभावना है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा था कि अगली सुनवाई की तारीख 16 नवंबर को भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत प्रकाशित नियमों को अदालत के सामने पेश किया जाए।
इससे पहले 17 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस कानून का उद्देश्य देश के विमानन क्षेत्र को आधुनिक बनाना है। पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।
जनवरी में मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हवाई किराये में होने वाले 'अनिश्चित उतार-चढ़ाव' के मामले में वह हस्तक्षेप करेगा। अदालत ने त्योहारों के दौरान विमान टिकटों की कीमतों में होने वाली अत्यधिक बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई थी। सुप्रीम कोर्ट ने एयरलाइंस की ओर से किराये में की जाने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी को 'शोषण' करार दिया था। साथ ही केंद्र सरकार और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) से इस याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था।
1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए नियम
इस अदालती घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने हवाई किराये को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' के तहत अधिसूचित ये नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।