पिपलांत्री का चुनावी फैसला : हार-जीत से परे, विकास और लोकतंत्र की एक नई बहस : पूर्व सरपंच श्याम सुंदर पालीवाल का चुनाव हारना...कल्पना से परे

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अरविन्द मुखिया...✍

पिपलांत्री.

राजसमंद के पिपलांत्री ग्राम पंचायत के चुनावों ने इस बार सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जिस गांव ने बेटियों के जन्म पर 111 पौधे लगाकर पूरी दुनिया को पर्यावरण संवर्धन, जल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा मॉडल दिया, उसी गांव से पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित पूर्व सरपंच श्याम सुन्दर पालीवाल का चुनाव हार जाना हर किसी को आश्चर्यचकित कर गया है।

जिन्होंने पिपलांत्री को मार्बल वेस्ट तथा स्लेरी से हुई बंजर जमीन से निकालकर एक वैश्विक 'इको-विलेज' के रूप में स्थापित किया, उनकी यह हार इस बात पर सवाल खड़े करती है कि क्या आज भी हमारे यहां विकास और निस्वार्थ समर्पण को चुनावी जीत का एकमात्र पैमाना नहीं माना जाता?

हालांकि, इस लोकतांत्रिक फैसले का दूसरा पहलू यह भी है कि जनता ने बदलाव चुनते हुए युवा प्रत्याशी नवीन पालीवाल को नया सरपंच चुना है। नवीन पालीवाल का यह कहना कि "यह जीत पद की नहीं, जिम्मेदारियों की है", और श्याम जी द्वारा छोड़ी गई विरासत को आगे बढ़ाने का उनका संकल्प यह उम्मीद जगाता है कि गांव की मूल भावना और संस्कार सुरक्षित रहेंगे।

निसंदेह:राजनीति में जीत-हार अपनी जगह है, लेकिन श्याम सुन्दर पालीवाल द्वारा प पहाड़ी भूमि पर खींची गई हरियाली की लकीर और बेटियों के सम्मान की वह संस्कृति हमेशा अमर रहेगी। चुनाव परिणामों से नेता या पद बदल सकते हैं, लेकिन पिपलांत्री की वह महान सोच और जन-कल्याणकारी कार्य किसी हार से मिटाए नहीं जा सकते।

लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है, लेकिन यह परिणाम विकास, बदलाव और जन-भावनाओं के बीच एक गहरा संदेश छोड़ गया है। आपकी इस पर क्या राय है? क्या जनता ने सही फैसला लिया या पद्म श्री श्याम सुंदर पालीवाल के योगदान को देखते हुए यह परिणाम आपके दिल को भी छू गया? अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें!

इसका सीधा मतलब निकाले या फिर टेड़ा...दोनों बाते आठवां अजुबा हो जाएगी

पालीवाल वाणी से सुनील पालीवाल

पद्म श्री, पूर्व सरपंच श्री श्याम सुंदर पालीवाल का चुनाव हारना...कल्पना से परे, हर कोई एक ही बात कर रहा था, भाई साहब, बिना मेहनत करें, जीत जायेगें...बहुत काम किया...देश-विदेशों में पिपलांत्री मॉडल की खुब चर्चा हुई...सदी के महानायक अभिताभ बच्चन के शो कौन बनेगा करोड़पति ने एक नई ऊंचाई दी...

पालीवाल समाज में सर्वप्रथम नाम से परिचय दिए जाने लगा...गांव...गांव में उनके मान-सम्मान में कसीदें गढ़े जाने लगे...एक छोटे से चुनाव में आश्चर्यचकित हार ने सालों की मेहनत बेकार कर दी...इसका सीधा मतलब निकाले या फिर टेड़ा...दोनों बाते आठवां अजुबा हो जाएगी. 

सीधा मतलब: पिपलांत्री मॉडल गांववासियों को समझ में नहीं आया...या फिर अहंकार की हार हुई...पिपलांत्री मॉडल ने पालीवाल साहब को बहुत ऊंचाई दी, लेकिन नीचे की गहराई नाप नहीं पाएं...हार का प्रमुख कारण बना.

टेड़ा मतलब: जन-जन तक अपनी बात रखना या फिर दिखावा करके सोशल मीडिया में हीरो बने रहेना, जेब से खर्चा बहुत किया...लेकिन खर्चांओं का सही माप गांववासियों को नहीं बता पाएं..., विश्वास था या अविश्वास किसी को नहीं पता..., जितनी चर्चा पिपलांत्री मॉडल की हुई, उतनी चर्चा ग्रामवासियों की समस्या हल करने में नहीं हो पाई...हार का प्रमुख कारण हो सकता हैं...श्

हार जीत का पैमाना नहीं है, लेकिन हकीकत जानना भी जरूरी है...पालीवाल साहब ने जीततनो पर विश्वास किया...वो खरे नहीं उतरे या जानबूझकर हारने पर काम किया वो तो वहीं जाने...विकास पुरूष की हार ने बता दिया है कि जो भी काम करों...अपने बलबुते करों...हकीकत गांव की जानो...ना कि आपके आस-पास, आपको घेरे में लेकर सो कोश दुर होने पर भी कहते है, भाई साहब चांद ष्आसमानष् में नहीं,,,अभी तो जमीन पर ही उतरा है...! तो फिर पिपलांत्री में हारना भी आठवें अजुबे से कम नहीं..., संभवता जीतने पर आज चर्चा नहीं होती, लेकिन हराने पर आज हर-गांव की चौपाल हो या फिर पालीवाल समाज हो...एक ही चर्चा प्रमुख है, जब विकास पुरूष, पिपलांत्री मॉडल हार सकता है, तो लोकतंत्र भी तो जिंदा रह सकता हैं...!

नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया

राजस्थान के राजसमंद जिले के पिपलांत्री ग्राम पंचायत चुनाव में 28 वर्षीय नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया है.

राजस्थान के राजसमंद जिले के पिपलांत्री ग्राम पंचायत चुनाव में 28 वर्षीय नवीन पालीवाल ने पद्मश्री से सम्मानित पूर्व सरपंच श्यामसुंदर पालीवाल को 492 वोटों से हरा दिया है. 

राजसमंद: राजसमंद जिले में पंचायतीराज चुनाव 2026 के द्वितीय चरण के परिणामों के बीच एक ऐसा नतीजा सामने आया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है. दुनियाभर में पिपलांत्री मॉडल को पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल सरपंच का चुनाव हार गए हैं. पिपलांत्री गांव को पर्यावरण संरक्षण और हरियाली की मिसाल बनाने के लिए श्यामसुंदर पालीवाल ने वर्षों तक मेहनत की, उसी गांव के ग्रामीणों ने इस बार उन्हें सरपंच पद पर नहीं चुना है. ग्रामीणों ने श्यामसुंदर पालीवाल की जगह नवीन पालीवाल को अपना नया सरपंच चुना है.

युवाओं के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा राजसमंद जिले के पिपलांत्री गांव के चुनाव परिणाम से लगाया जा सकता है.  यहां पद्मश्री से सम्मानित सरपंच प्रत्याशी श्यामसुंदर पालीवाल को 28 वर्षीय नवीन पालीवाल ने 492 वोटों से पराजित कर दिया.

नवीन को 1348 वोट मिले हैं, पालीवाल और उनकी पत्नी अनिता पिपलांत्री के सरपंच रहे हैं. अनिता पालीवाल राजसमंद नगर परिषद की सभापति हैं. नवीन ने राजनीति में बढ़ते परिवारवाद को मुद्दा बनाया और पालीवाल को मात दे दी. पालीवाल को वर्ष 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया.

 बेटियों के सम्मान को लेकर एक अनूठी पहल : काम नहीं आई...!

श्यामसुंदर पालीवाल ने पिपलांत्री गांव में पर्यावरण संरक्षण और बेटियों के सम्मान को लेकर एक अनूठी पहल शुरू की थी. इस पहल के तहत गांव में बेटी के जन्म पर 111 पौधे लगाए जाते हैं. साथ ही नवजात बच्ची के नाम से पोस्ट ऑफिस में खाता भी खुलवाया जाता है. उनकी इस पहल ने पिपलांत्री गांव को देशभर में एक अलग पहचान दिलाई. दूर-दूर से लोग इस मॉडल को देखने और समझने के लिए पिपलांत्री पहुंचते हैं.

नवीन पालीवाल को पिपलांत्री का नया सरपंच चुना

लेकिन इस बार चुनावी मैदान में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. अपने गांव को देशभर में पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल को ग्रामीणों ने सरपंच की कुर्सी तक नहीं पहुंचाया और नवीन पालीवाल को पिपलांत्री का नया सरपंच चुना.

चुनाव के दौरान मैं इस नाराजगी को समझ नहीं सका

चुनाव हारने के बाद श्यामसुंदर पालीवाल ने बताया कि मैंने पारंपरिक तरीके से प्रचार किया, वहीं नवीन ने सोशल मीडिया का सहारा लिया. युवाओं ने भी उसकी मदद की. मैं और मेरी पत्नी लगातार दो बार सरपंच रहे हैं. पत्नी के नगर परिषद सभापति बनने से भी कुछ लोगों में नाराजगी थी. चुनाव के दौरान मैं इस नाराजगी को समझ नहीं सका.

• नवीन पालीवाल ने चुनाव में सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया और परिवारवाद को मुख्य मुद्दा बनाया.

• श्यामसुंदर पालीवाल और उनकी पत्नी अनीता पालीवाल पहले भी लंबे समय तक सरपंच रहे हैं. अनीता पालीवाल वर्तमान में राजसमंद नगर परिषद की सभापति हैं, जिससे कुछ ग्रामीणों में नाराजगी थी.

• श्यामसुंदर पालीवाल ने पारंपरिक तरीके से प्रचार किया, जबकि युवाओं का समर्थन नवीन पालीवाल के साथ रहा.

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