नई दिल्ली. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, जबकि मोदी के समय में बिकते हैं। उन्होंने कहा कि 7 साल पहले IDBI बैंक घाटे में था, लेकिन कर्मचारियों के प्रयास से पिछले साल बैंक ने 9000 करोड़ रुपए से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया।
आईडीबीआई बैंक के निजीकरण मामले में राहुल ने कहा कि मैं बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं। गांधी ने 29 अक्टूबर 2026 की तारीख वाले अपने पत्र में लिखा कि पिछले साल IDBI बैंक कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे संसद भवन में मिला था। उन्होंने सवाल उठाया था कि जिस बैंक को कर्मचारियों ने अपनी मेहनत से मुनाफे में पहुंचाया, उसे सरकार क्यों बेच रही है? राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लोकसभा में भी उठाया, लेकिन सरकार की ओर से इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
राहुल गांधी ने बताया कि 7 साल पहले IDBI बैंक घाटे में था, लेकिन कर्मचारियों के प्रयास से पिछले साल बैंक ने 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया। इसके बावजूद सरकार इसे कनाडा की कंपनी 'फेयरफैक्स' (Fairfax) को बेचने का फैसला कर चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकारी हिस्सेदारी घटकर 34 फीसदी रह जाएगी।
सरकार तोड़ रही है जनता से किया वादा
पत्र में राहुल गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जनता के पैसे से बना यह संस्थान जनता का ही है। वर्तमान में सरकार और LIC के पास IDBI बैंक की 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो इस बिक्री के बाद घटकर मात्र 34 प्रतिशत रह जाएगी। उन्होंने साल 2003 का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि तत्कालीन सरकार ने संसद में वादा किया था कि IDBI में सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत बनी रहेगी। संसद में दिया गया आश्वासन देश की जनता से किया गया वादा होता है, जिसे तोड़ा जा रहा है।
- कांग्रेस के time पे बैंक बनते थे, मोदी के time में बैंक बिकते हैं. कांग्रेस IDBI बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ी है. https://t.co/0D11J117FM
— Congress (@INCIndia) October 30, 2026