कठै परा गया वे दन

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कठै परा गया वे दन, 

हामें ऊनी रोट्या आवती,

आपां खायाई जाता न, 

माँ मेल्याई जावती।

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कठै परा गया वे लाड, 

जो माँ रे-रेन लड़ावती,

आपां आँसूं ढळकावता, 

अर माँ पूंछ्याई जावती। 

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कठै परी गी वा हँसी, 

जो पेट दुख न आवती, 

आपां करतब करता न, 

माँ हँस्याई जावती। 

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कठै परी गी वे काण्यां,

जो रोज हुणवां मा आवती, 

आपां हूँकारा देयाई करता, 

अर माँ हुणायाई जावती। 

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कठै परी गी वा नींद, 

जो माँ री गोद मा आवती, 

आपां नींद काड्याई जाता न, 

माँ थपक्यां देयाई जावती। 

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कठै परी गी वा परवां, 

जो माँ चौइसी घंटा करती, 

आपां नजर नी आता तो, 

वा रोट्याई नी खावती। 

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अबे कुण राखें आपाणें, 

राजन जस्यों माँ राखती,

आपां बचकूट्यावेट करता न, 

वा अचक- अचक राखती। 

वा अचक- अचक राखती।। 

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राजेन्द्र सनाढ्य राजन

वाइस प्रिंसिपल-रा उ मा वि नमाना

नि- कोठारिया जि-राजसमंद, राजस्थान

रचणां नं- 4426

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