मध्यप्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर संगठनात्मक मजबूती और रणनीतिक स्पष्टता के साथ नए युग में प्रवेश कर चुकी है। इस परिवर्तन का केंद्र बिंदु हैं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, जिनके कुशल, संतुलित और निर्णायक नेतृत्व में भाजपा ने “मिशन 2028” की ठोस और व्यावहारिक जमावट शुरू कर दी है।
लगभग छह माह के अपने निर्विवादित कार्यकाल में खंडेलवाल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल संगठन के शीर्ष पद पर आसीन नेता नहीं, बल्कि पार्टी की जड़ों को मजबूत करने वाले संवेदनशील नेतृत्वकर्ता हैं। किसी भी राजनीतिक संगठन की वास्तविक शक्ति उसका कार्यकर्ता और स्थानीय नेतृत्व होता है। पिछले कुछ वर्षों से मध्यप्रदेश भाजपा में यह महसूस किया जा रहा था कि संगठन के निचले और मध्य स्तर पर असंतोष पनप रहा है।
कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की नाराजगी, संवाद की कमी और अपेक्षित सम्मान न मिल पाने की भावना धीरे-धीरे संगठनात्मक चुनौती बनती जा रही थी। हेमंत खंडेलवाल ने इस स्थिति को अनदेखा करने के बजाय समय रहते भांप लिया और बिना किसी शोर-शराबे के संगठनात्मक सुधार की प्रक्रिया शुरू की। यही वह बिंदु है जहाँ से मिशन 2028 की वास्तविक नींव रखी गई। इसके साथ ही बीजेपी का संगठन विजन 2028 के लिए अभी से तैयार हो गया है।
प्रदेश अध्यक्ष बनते ही खंडेलवाल ने यह सिद्ध कर दिया कि संगठन में स्थिति बनाए रखने की नहीं, बल्कि स्थिति सुधारने की आवश्यकता है। संगठन के द्वारा संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को पद से हटाने का साहसिक निर्णय लिया गया। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि इसके साथ कई राजनीतिक और रणनीतिक समीकरण जुड़े हुए थे। हितानंद शर्मा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच बताए जा रहे रणनीतिक मतभेद संगठन के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकते थे।
खंडेलवाल ने इस संभावित टकराव को टालते हुए संगठन हित को सर्वोपरि रखा और स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी में व्यक्तिगत समीकरणों से ऊपर संगठनात्मक समन्वय और अनुशासन है। यह निर्णय भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच एक सकारात्मक संकेत के रूप में गया। वैसे भी हितानंद शर्मा की कार्यशैली संगठन को रास नहीं आ रही थी। उनमें संगठन शक्ति का अभाव हमेशा देखा गया है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि अब संगठन में जवाबदेही तय होगी और निर्णय योग्यता तथा समन्वय के आधार पर लिए जाएंगे।
प्रदेश में भाजपा जिला प्रभारियों का हालिया चयन खंडेलवाल की संगठनात्मक सूझबूझ का उत्कृष्ट उदाहरण है। इन नियुक्तियों में क्षेत्रीय संतुलन, कार्यकर्ता स्वीकार्यता, संगठनात्मक अनुभव और चुनावी क्षमता सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया। कहीं भी यह नहीं लगा कि निर्णय जल्दबाज़ी में या किसी एक गुट के दबाव में लिए गए हों। इससे संगठन के भीतर यह भरोसा मजबूत हुआ कि नेतृत्व निष्पक्ष है और सभी को समान अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
मिशन 2028 के तहत यह जमावट केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठन के भीतर ऊर्जा के पुनर्संचार की प्रक्रिया है। आने वाले समय में निगम-मंडलों, विभिन्न आयोगों और अध्यक्ष पदों पर होने वाली नियुक्तियाँ इसी रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं और अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठन को और अधिक सक्रिय तथा प्रतिबद्ध बनाने की तैयारी है। यह कदम न केवल संगठनात्मक संतुलन बनाएगा, बल्कि पार्टी के प्रति कार्यकर्ताओं के विश्वास को भी और मजबूत करेगा।
पार्टी कार्यालय और मीडिया विभाग की सक्रियता भी इस पूरे सफलता का अहम हिस्सा है। आशीष अग्रवाल के नेतृत्व में भाजपा का मीडिया विभाग पूरी निपुणता और पेशेवर तरीके से कार्य कर रहा है। संगठन की गतिविधियों, नेतृत्व के संदेश और सरकार की उपलब्धियों को जिस स्पष्टता और अनुशासन के साथ जनता तक पहुँचाया जा रहा है, वह प्रदेश अध्यक्ष की रणनीति और सोच को ही दर्शाता है। मीडिया और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पार्टी के लिए एक मजबूत संचार तंत्र का निर्माण कर रहा है। आशीष अग्रवाल को मीडिया की जिम्मेदारी देना भी खंडेलवाल की दूरदर्शिता का परिणाम है।
नए संगठन महामंत्री के नाम की घोषणा होने तक प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी अजय जामवाल को सौंपना भी संगठन की व्यावहारिक सोच को दर्शाता है। अजय जामवाल का मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में राजनीतिक अनुभव और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल संगठन के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है।
इस अस्थायी व्यवस्था के बावजूद संगठन में कहीं भी शून्यता या भ्रम की स्थिति नहीं बनने दी गई, जो मजबूत नेतृत्व का स्पष्ट संकेत है। वहीं शैलेन्द्र बरूआ को भी बीजेपी उपाध्यक्ष बनाया गया है। बरूआ संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं। खंडेलवाल का नेतृत्व भाजपा मध्यप्रदेश में स्थिरता, संवाद और दूरदृष्टि का संतुलित उदाहरण बन चुका है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि संगठन को मजबूती देने के लिए केवल भाषण नहीं, बल्कि समय पर लिए गए सटीक निर्णय आवश्यक होते हैं।
मिशन 2028 उनके लिए केवल एक चुनावी लक्ष्य नहीं, बल्कि एक संगठित, अनुशासित और कार्यकर्ता-केंद्रित भाजपा के निर्माण का संकल्प है। कहा जा सकता है कि मध्यप्रदेश भाजपा आज जिस आत्मविश्वास और संगठनात्मक स्पष्टता के साथ आगे बढ़ रही है, उसके मूल में हेमंत खंडेलवाल का शांत, परंतु निर्णायक नेतृत्व है। यदि यही दिशा और गति बनी रही, तो मिशन 2028 केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि भाजपा की एक और ऐतिहासिक सफलता की कहानी बन सकता है।