M. Ajnabee, Kishan paliwal
आमेट.
आमेट उपखण्ड मुख्यालय पर ‘गो सम्मान आह्वान अभियान’ के अंतर्गत गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ का संवैधानिक दर्जा दिलाने हेतु एक विराट जन-आंदोलन का स्वर मुखर हुआ है. संत समाज एवं हजारों गौभक्तों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस गौरवपूर्ण पहल के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन हेतु केंद्र व राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया.
महामंडलेश्वर सीताराम दास महाराज, रामद्वारा आमेट के रामजी महाराज, मुमुक्षु राम महाराज, नन्दादास महाराज एवं रमेशदास महाराज के पावन सानिध्य में नगर वासियों ने एकजुट होकर महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक विस्तृत प्रार्थना पत्र उपखण्ड अधिकारी को सुपुर्द किया.
इस अभियान का आगाज नगर के आराध्य प्रभु श्री जय सिंह श्याम भगवान मंदिर, रामचौक से एक विशाल रैली के रूप में हुआ. हाथों में भगवा ध्वज और गौ-सेवा के संकल्प के साथ गौभक्तों का यह हुजूम नगर के मुख्य मार्गों से होता हुआ, उपखंड कार्यालय पहुँचा. जहाँ पूरी शक्ति और श्रद्धा के साथ प्रार्थना पत्र पेश किया गया.
वैधानिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए, इस पत्र में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 एवं 51A(ग) की मूल भावना के अनुरूप गौमाता को “राष्ट्रमाता/राष्ट्र आराध्या” का संवैधानिक दर्जा प्रदान करने की पुरजोर मांग की गई है. इसके साथ ही केंद्र सरकार से गौसेवा हेतु एक पृथक केंद्रीय मंत्रालय की स्थापना करने तथा संपूर्ण देश में गोवंश संरक्षण के लिए एक एकीकृत केंद्रीय कानून बनाने का विशेष अनुरोध किया गया है.
यह आधिकारिक प्रार्थना पत्र तहसीलदार, एसडीओ, एसडीएम एवं जिला कलेक्टर के माध्यम से उच्च स्तर पर अग्रेषित किया गया है. अभियान के पदाधिकारियों ने गौवंश को भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि प्रणाली और सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न आधार बताते हुए हाल के वर्षों में गौवंश की घटती संख्या, बढ़ती दुर्घटनाओं, तस्करी और उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है.
पत्र में स्पष्ट किया गया है, कि संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के तहत गौवंश संरक्षण की जिम्मेदारी राज्य पर निर्धारित है, किंतु देशभर में एक समान नीति के अभाव में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं. संतों और कार्यकर्ताओं ने अटूट विश्वास जताया कि यदि राष्ट्रपति और केंद्र सरकार स्तर पर इस विषय पर सकारात्मक पहल होती है, तो इससे न केवल गौवंश सुरक्षित होगा, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नवीन बल मिलेगा. आगामी दिनों में इस मुहिम को राष्ट्रव्यापी बनाने हेतु व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे गौमाता के सम्मान की यह लौ जन-जन तक पहुँच सके.