📅 Wednesday, 23 September 2026 | 01:37 AM IST
लाइव सेंसेक्स: 74,529.08 ▲ +234.08 (+0.32%) निफ्टी 50: 23,329.00 ▼ -17.40 (-0.07%) 🪙 सोना 24K (10g): ₹155,910 🥈 चांदी (1kg): ₹253,800 🌤️ उज्जैन: 24°C (हल्के बादल)
उपयोगी जानकारी

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर : पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान का सही विधि-विधान

📅 23 September 2026, 12:25 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 9 मिनट में पढ़ें
शेयर करें:
WhatsApp Facebook Twitter Telegram Instagram
पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर  : पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान का सही विधि-विधान
पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर : पितृपक्ष में तर्पण और पिंडदान का सही विधि-विधान

पितृपक्ष का समय हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर होता है। मान्यता है कि इस दौरान पितर पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिवार से तर्पण, पिंडदान और दान की अपेक्षा रखते हैं। इन कर्मों से पितरों की आत्मा को तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, वे अपने वंशजों को सुख, समृद्धि और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह समय परिवार के लिए एकजुटता और पितरों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

तर्पण और पिंडदान श्राद्ध के दो प्रमुख कर्म हैं। तर्पण में जल, तिल, कुश और फूलों के माध्यम से पितरों को अर्पण किया जाता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिलती है। यह एक सरल और पवित्र प्रक्रिया है। दूसरी ओर, पिंडदान में चावल, जौ, आटे या खीर से बने पिंड (गोले) बनाकर पितरों को समर्पित किए जाते हैं। यह कर्म पितरों की तृप्ति और उनके प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। दोनों ही कार्य पितृपक्ष में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

तर्पण और पिंडदान के लिए कुछ आवश्यक सामग्री की जरूरत होती है, जो आसानी से उपलब्ध हो सकती है। आपको काले तिल, जौ या सत्तू, चावल, कुश (दर्भ घास), जल (गंगाजल हो तो बेहतर), फूल, दूध, दही, घी और शहद चाहिए। इसके अलावा, पितरों के नाम और गोत्र की जानकारी, स्वच्छ वस्त्र, तांबे या पीतल का पात्र और एक स्वच्छ चौकी या स्थान की व्यवस्था करें। ये सभी सामग्रियां कर्म को पवित्र और प्रभावी बनाने में मदद करती हैं।

तर्पण एक पवित्र कर्म है, जिसे किसी नदी, तालाब या घर पर भी किया जा सकता है। इसे करने के लिए सबसे पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इस दौरान पुरुषों को धोती और जनेऊ धारण करना चाहिए। इस दौरान दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें, क्योंकि पितरों का स्थान दक्षिण दिशा में माना जाता है। एक चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं और तांबे या पीतल के पात्र में जल, तिल, जौ और कुश रखें। इसके बाद हाथ में जल, तिल और कुश लेकर संकल्प करें।

संकल्प में अपने पितरों का नाम, गोत्र और तिथि का उल्लेख करें, जैसे ‘मैं (अपना नाम) अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए यह तर्पण कर्म कर रहा/रही हूं।’ अब दाहिने हाथ में कुश और तिल लेकर, बाएं हाथ में पकड़े गए पात्र से जल को दक्षिण दिशा में छोड़ें। प्रत्येक पितर (पिता, दादा, परदादा आदि) के लिए अलग-अलग जल अर्पित करें। मंत्र बोलें ‘ॐ (पितर का नाम) गोत्राय शर्मा (या अपना गोत्र) नमः तर्पयामि।’ अगर मंत्र याद न हो, तो केवल पितरों का नाम लेकर जल अर्पित करें। तर्पण के बाद बचे हुए जल को किसी पेड़ की जड़ में डाल दें और हाथ-पैर धोकर पितरों से आशीर्वाद मांगें।

पिंडदान श्राद्ध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य पंडित की देखरेख में करना उत्तम माना जाता है। सबसे पहले तर्पण की तरह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और दक्षिण दिशा की ओर मुख करें। चावल, जौ, तिल, दूध, घी और शहद को मिलाकर छोटे-छोटे पिंड बनाएं। इसके बाद हाथ में जल और तिल लेकर संकल्प करें, जैसे ‘मैं (अपना नाम) अपने पितरों की तृप्ति के लिए पिंडदान कर रहा/रही हूं।’ प्रत्येक पितर के लिए एक-एक पिंड बनाएं, सामान्यतः तीन पिंड (पिता, दादा, परदादा के लिए) तैयार किए जाते हैं।

इन पिंडों को कुश के ऊपर रखें और जल, तिल, फूल और चंदन अर्पित करें। मंत्र बोलें ‘ॐ (पितर का नाम) गोत्राय शर्मा (या अपना गोत्र) नमः पिंडं ददामि।’ अगर मंत्र न पता हो, तो केवल पितरों का नाम लेकर पिंड समर्पित करें। अंत में, पिंडों को किसी पवित्र नदी में विसर्जित करें या गाय, कौवे को खिला दें। पितरों से प्रार्थना करें कि वे आपके कार्य को स्वीकार करें।

पितृपक्ष में दान का विशेष महत्व है। तर्पण और पिंडदान के बाद भोजन (जैसे अन्न, फल, मिठाई), वस्त्र (धोती, साड़ी), दक्षिणा (ब्राह्मण को धन) और यदि संभव हो तो गाय, छाता या जूते आदि का दान करें। यह दान पितरों की तृप्ति के साथ-साथ पुण्य प्राप्ति का भी साधन है। दान हमेशा श्रद्धा और शुद्ध मन से करना चाहिए।

तर्पण और पिंडदान को हमेशा शुद्ध मन और शरीर से करें। इन्हें किसी पवित्र नदी जैसे गंगा, यमुना या तीर्थ स्थल पर करना उत्तम है, लेकिन घर पर भी यह कार्य किया जा सकता है। प्रत्येक पितर की पुण्यतिथि के अनुसार श्राद्ध करें, और यदि तिथि मालूम न हो, तो अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) पर श्राद्ध करें। पितृपक्ष में नए कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि शुरू करने से बचें। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन न करें, ताकि कर्म की शुद्धता बनी रहे।

घर पर पितरों का तर्पण

घर पर पितरों का तर्पण करने के लिए सुबह स्नान करके दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें और तांबे या कांसे के बर्तन में जल, काले तिल व कुश रखें। 

आप मार्गदर्शन के अनुसार तर्पण की पूरी प्रक्रिया को नीचे दिए गए चरणों में आसानी से पूरा कर सकते हैं:

आवश्यक सामग्री

  • शुद्ध जल (लटा या कलश में)
  • काले तिल
  • कुश 
  • अक्षत (चावल) और पुष्प
  • तांबे या कांसे का पात्र 
  • तर्पण की सरल विधि
  • मुद्रा और दिशा: दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके बैठें। जनेऊ को दाहिने कंधे पर रखें (अपसव्य स्थिति)। 

    संकल्प और आह्वान: हाथ में कुश, जल, अक्षत, पुष्प और काले तिल लेकर अपने पितरों का ध्यान करें और उनका आह्वान करें। 

    जल अर्पित करने का तरीका (पितृ तीर्थ) : हाथ की अंजलि में जल और काले तिल लें। अंगूठे और तर्जनी उंगली के बीच के भाग (जिसे पितृ तीर्थ कहा जाता है) से जल को नीचे किसी पात्र या थाली में गिराएं। 

    मंत्रोच्चार : जल अर्पित करते समय अपने पितरों का नाम लें और बोलें- "हे दिव्य पितरों, आप मेरे दिए हुए इस जल से तृप्त होइए।"

    पितृ पूजा में क्या-क्या किया जाता है?

    तर्पण : काले तिल, कुशा और जल द्वारा पितरों को जलांजलि देना।

    श्राद्ध कर्म : पूर्वजों के प्रति श्रद्धा से पिंडदान व पूजन करना।

    ब्राह्मण एवं जरूरतमंदों को भोजन : अन्न दान से पितरों की आत्मा तृप्त होती है।

    गो-सेवा एवं जीव-दया : पशु-पक्षियों को भोजन कराना।

    भगवद्गीता का पाठ : विशेषकर गीता के 7वें या 11वें अध्याय का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    पितृ पूजा का महत्व एवं लाभ

  • पितरों के आशीर्वाद से घर की नकारात्मक ऊर्जा और पितृ दोष शांत होते हैं।
  • संतान सुख, पारिवारिक शांति और वंश में प्रगति आती है।
  • अकारण होने वाले कार्यों में रुकावट और आर्थिक संकट दूर होते हैं।
  • 📲

    पालीवाल वाणी WhatsApp चैनल से जुड़ें

    ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ और समाज के सभी समाचार सबसे पहले अपने फोन पर पाएं।

    चैनल से जुड़ें →

    संबंधित खबरें

    सभी देखें →
    WhatsApp हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें