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उज्जैन

जिंदा बेटी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया : अंतरजातीय प्रेम विवाह से परिवार को अंदर तक आहत कर गई

📅 30 July 2026, 12:47 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 3 मिनट में पढ़ें
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जिंदा बेटी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया : अंतरजातीय प्रेम विवाह से परिवार को अंदर तक आहत कर गई
जिंदा बेटी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया : अंतरजातीय प्रेम विवाह से परिवार को अंदर तक आहत कर गई

खाचरौद. मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। जिले के खाचरौद नगर के नरसिंह मंदिर क्षेत्र में एक परिवार ने अपनी जिंदा बेटी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया और उससे हमेशा के लिए सारे रिश्ते तोड़ने का ऐलान कर दिया। जिस घर में कभी बेटी के जन्म पर खुशियां मनाई गई थीं, उसी आंगन में उसकी तस्वीर के सामने लोग रोते हुए नजर आए।

मामले के मुताबिक, परिवार की बेटी कोमल प्रजापत ने परिजनों की मर्जी के खिलाफ जाकर अंतरजातीय प्रेम विवाह कर लिया था। परिवार ने उसे काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी और मामला थाने तक पहुंच गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस थाने के सामने ही कोमल ने अपने माता-पिता और भाइयों को पहचानने से साफ इनकार कर दिया। यही बात परिवार को अंदर तक आहत कर गई।

इसके बाद परिवार ने समाज और रिश्तेदारों के बीच एक बेहद कड़ा फैसला लिया। घर के आंगन में बेटी की तस्वीर रखकर 'गोरनी' की रस्म शुरू की गई। इसके बाद तस्वीर को आग के हवाले कर उसका प्रतीकात्मक दाह संस्कार किया गया। वे तमाम रस्में निभाई गईं जो आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद की जाती हैं। मौके पर मौजूद परिजनों का कहना था कि उन्होंने बेटी को बड़े लाड़-प्यार से पाला था, लेकिन इस कदम के बाद अब वह उनके लिए जीवित होकर भी मृत समान है।

परिजनों का कहना है कि यह फैसला उन लड़कियों के लिए एक संदेश है जो परिवार की सहमति के बिना घर छोड़ देती हैं और अपनों से रिश्ता खत्म कर लेती हैं। वहीं जानकारों के मुताबिक, 'गोरनी' कुछ समाजों में एक प्रतीकात्मक और सामाजिक परंपरा है, जिसमें परिवार अपनी इच्छा के विरुद्ध विवाह करने वाले सदस्य को मृत मानकर अंतिम संस्कार जैसी रस्में निभाता है। हालांकि, इस तरह की सामाजिक रस्मों का कोई कानूनी या संवैधानिक आधार नहीं होता है, लेकिन इस घटना ने इलाके में चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है।

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