प्रीमियम और एसआईपी तो भर रहे हैं, लेकिन क्यों? कहीं आपकी जिंदगी आपको कोल्हू का बैल तो नहीं बना रही? : भरतकुमार सोलंकी
एलआईसी पॉलिसी लेने का कारण पूछिए तो कोई कहेगा कि एजेंट पीछे पड़ा था, इसलिए ले ली। कोई कहेगा कि मुझे कुछ हो गया तो परिवार को पैसा मिल जाएगा। लेकिन क्या आपने कभी गणना की कि आपकी अनुपस्थिति में परिवार को कितनी रकम की आवश्यकता होगी, वर्तमान बीमा कितना पर्याप्त है और भविष्य की जरूरतों के लिए कितना अतिरिक्त निवेश करना होगा? क्या केवल पॉलिसी खरीद लेना परिवार की आर्थिक सुरक्षा की गारंटी है?
मेडिक्लेम के बारे में पूछिए तो जवाब मिलेगा कि मित्र के परिवार में अस्पताल का खर्च बीमा कंपनी ने उठाया, इसलिए मैंने भी पॉलिसी ले ली। लेकिन क्या आपने अपनी उम्र, परिवार के सदस्यों, शहर के अस्पतालों के खर्च और अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार कवरेज चुना है? क्या आपको पता है कि आपकी पॉलिसी में कितनी बीमा राशि है, कौन-सी बीमारियाँ कवर हैं और किन परिस्थितियों में क्लेम सीमित हो सकता है? दूसरों के अनुभव से जागरूक होना अच्छी बात है, लेकिन अपना निर्णय अपनी जरूरतों के अनुसार लेना क्या अधिक जरूरी नहीं है?
दुकान या कारखाने के फायर इंश्योरेंस के बारे में पूछने पर व्यापारी कहता है कि बैंक ने ऋण के बदले पॉलिसी माँगी थी, इसलिए ले ली। लेकिन क्या बैंक की शर्त पूरी करना ही आपकी जिम्मेदारी है? आग लगने पर मशीनरी, स्टॉक, भवन और कारोबार दोबारा खड़ा करने में कितना खर्च आएगा, क्या आपने इसका आकलन किया है? क्या बीमा राशि वास्तविक संपत्ति और जोखिम के अनुरूप है? बैंक का हित ऋण की सुरक्षा है, जबकि आपका हित पूरे कारोबार की निरंतरता और आर्थिक अस्तित्व है।
अब एसआईपी की बात करें। किसी मित्र के म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में अच्छा रिटर्न देखकर आपने भी एसआईपी शुरू कर दी। लेकिन क्या आपको पता है कि आप किस लक्ष्य के लिए निवेश कर रहे हैं? बच्चों की शिक्षा, सेवानिवृत्ति, घर खरीदने या आर्थिक स्वतंत्रता के लिए कितना फंड चाहिए? कितने वर्षों में चाहिए और उसके लिए हर महीने कितनी राशि निवेश करनी होगी? क्या आपने महँगाई, संभावित रिटर्न और बाजार के जोखिम को ध्यान में रखकर गणना की है?
क्या ये सभी भुगतान गलत हैं? बिल्कुल नहीं!गलत है बिना उद्देश्य समझे भुगतान करते रहना। बीमा सुरक्षा देता है, जबकि एसआईपी लक्ष्य के लिए निवेश का माध्यम हो सकती है। दोनों की भूमिका अलग है। सवाल यह है कि क्या आपकी योजना आपकी जरूरतों के अनुरूप है या आप केवल एजेंट, बैंक, मित्र अथवा सामाजिक दबाव के कारण निर्णय ले रहे हैं?
यदि हर महीने पैसा जा रहा है, लेकिन मंजिल तय नहीं है, तो जीवन कोल्हू के बैल जैसा हो सकता है-चलते रहिए, खर्च करते रहिए, भुगतान करते रहिए, मगर पता ही न चले कि पहुँचना कहाँ है।
इसलिए अपने प्रत्येक प्रीमियम और निवेश के पीछे एक स्पष्ट जवाब रखिए—क्यों, कितना, कितने समय के लिए और किस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए? क्योंकि वित्तीय सफलता केवल पैसा भरते रहने में नहीं, बल्कि सही उद्देश्य के साथ सही योजना बनाने में है।
सवाल मेरे हैं… जवाब आपके पास हैं।
भरतकुमार सोलंकी, वित्त विशेषज्ञ
????9820085610
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