लौट आओं... मेघराज : बारिश की खेंच से किसान चिंतित, सोयाबीन फ़सल पर असर : रोज़ उमड़ घुमड़ रहें स्याह बादल, इंदौरी तरस रहे, पर बरस नही रहें...!
नितिनमोहन शर्मा
एक दो दिन में फ़िर बरसात का मौसम..!
...मेघराज, तुम जहां भी हो, लौट आओ। तुम बिन सकल चराचर जगत के हाल बेहाल हैं। मालवी मनुहार से रीझकर तुम सही समय पर आ गए थे। तुम्हारे आगमन से मन मयूर कुलांचे मारने लगा था। तुमने भी निराश नही किया। अपने दामन में भरकर लाये तमाम निर्मल नीर की एक एक बूंद धरा पर निचोड़ दी। सुखी, तपती, जलती धरा तुम्हारे बरसाए इस नेह से गदगद हो गई। लेकिन अभी वसुंधरा की तपन व तृप्ति शांत नही हुई हैं। अपने हिस्से के नीर की एक किश्त से भला इस मालवे का क्या होना? उसे तो ऐसी दर्जनभर से ज़्यादा किश्त चाहिए।
वह भी अगर एकमुश्त मिल जाये तो बात ही क्या? वो माटी पुत्र किसान भी अब तो चिंता से घिर गया हैं, जिसने तुम्हारी मौजूदगी को जान धरती के उदर में बीज बो दिया था। ऐसे में तुम्हारा लौट जाना और फिर लौटकर न आना हम सबको चिंता में डाल रहा हैं। तुम कही भी हो मेघराज, अब मत सताओ, लौट आओ। 12-15 दिन होने को आये, हमसे दूर गए। स्याह-घुसर बादलों के रूप में तुम अपने दूत तो रोज भेज रहें हो लेकिन वे रीते ही बिदा हो रहें हैं। तुम बिन अब भी रीते हैं ताल-तलैया, नदी-सरोवर, कूप-नलकूप। तो है मेघराज, जन जन की सुनों पुकार और झम झमाझम के साथ फ़िर ला दो बरखा बहार...!!
जुलाई का आगाज़ तो मानसून के मिज़ाज के हिसाब से मनोनुकूल हुआ। सात- आठ दिन में ही आठ-नों इंच पानी बरस गया। जन जन के चेहरे खिल गए। क्योंकि इस बरस मानसून पूर्व की बोछारों से मालवा व इंदौर अछूता रह गया था। जून यू ही सूखा सूखा बीत गया था लेकिन जुलाई की शुरुआत होते ही इतना पानी बरस गया कि जुलाई महीने का सरकारी आंकड़ा यानी 12 इंच के आसपास पूर्ण हो गया। लेकिन उसके बाद से बारिश थम ही गई।
तेज़ तो दूर रिमझिम तक नही हुई। बूंदाबादी को भी मालवा अंचल व इंदौर तरस गया। बारिश की इस खेंच से मौसम को फ़िर गर्मी में तब्दील कर दिया। दिन का तापमान 34 डिग्री तक ऊपर चढ़ गया। बिन पानी के भी वातावरण में डटी हुई नमी के कारण उमस से हाल बेहाल हो गए। पावस ऋतु के आगमन के बाद भी तनबदन पसीने से तरबतर हो रहें हैं लेकिन बारिश के कही भी अब तक अते पते नही हैं।
12 दिनों से थमी बारिश के कारण जुलाई का महीना सूखे की तरफ़ बढ़ चला हैं। अगर ये अंदेशा सही होता है तो एक दशक में ये तीसरी ऐसी जुलाई होगी, जो सूखे में तब्दील होगी। मौसम के बदले इस मिज़ाज से एक बार फ़िर घर दफ्तरों में एसी कूलर जगह बना ली हैं। मौसम के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ़ से आ रही सुखी व गर्म हवाओं ने न सिर्फ़ मालवा, बल्कि पूरे प्रदेश का मानसूनी मिज़ाज बिगाड़ दिया हैं। अरब सागर से हवाये तो जोरदार आ रही है लेकिन ये हवाये बीच बीच मे दिशा भटक रही हैं। इसके कारण बारिश का मौसम नहीं बन रहा। जो कुछ भी थोड़ा बहुत बारिश का सिस्टम मौजूद हैं, वह सिर्फ़ पूर्वी मध्यप्रदेश में ही हैं। प्रदेश का पश्चिम हिस्सा फ़िर तरस रहा हैं।
शनिवार को वातावरण में नमी का स्तर सुबह 80 प्रतिशत व शाम को 52 फीसदी दर्ज किया गया। लिहाज़ा शनिवार को अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिगी ऊपर 32 डिग्री दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान 24 डिग्री तक जा पहुँचा। शुक्रवार को भी दिन का तापमान सामान्य से चार डिग्री ज्यादा 34 डिग्री दर्ज हुआ था। इधर रविवार से मौसम के बदलाव की बात कही जा रही है जिसके कारण बारिश हो सकती हैं। मौसम महकमे के इस अंदेशे ने एक बार फ़िर झमाझम बारिश की आस जगा दी हैं। बशर्ते मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित हो।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र आगे बढ़ रहा हैं। इसके साथ ही 19 जुलाई से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा हैं। इन दोनों सिस्टम के एक साथ सक्रिय होने से मॉनसून मालवा निमाड़ में फ़िर से गतिमान होगा। अगले पूरे सप्ताह में जोरदार बारिश का दौर देखने को मिल सकता हैं। इंदौर में अमूमन जुलाई में औसत 12 इंच बारिश होती हैं और इतने ही दिन पानी बरसता हैं। इस बार शुरुआत में ही अच्छा पानी बरसने से महीने का कोटा लगभग पूरा हो चुका हैं।
किसान अपनी फ़सल का 31 जुलाई तक बीमा करा लें
किसान कल्याण विभाग ने अपील की है कि किसान बारिश की खेंच को देखते हुए प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना के तहत अपनी फ़सलो का बीमा 31 जुलाई तक अनिवार्य रूप से करा लें ताकि सूखा, अतिव्रष्टि या मौसम के जोखिम से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचा जा सके। जानकारों के मुताबिक शुरुआती बारिश में बोई गई सोयाबीन व अन्य फसलों को अब जल्द से जल्द अगली बारिश का इंतज़ार हैं। हालांकि अभी स्थिति चिंताजनक नही हैं। अगले सप्ताह बारिश आने से फ़सलो को जीवन दान मिलेगा।

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