श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक : भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की सम्पूर्ण घटना
जय श्री कृष्ण!
हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। कई बार जन्माष्टमी पर अष्टमी विद्यमान रहती है लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बनता है।
इस साल दोनों एक ही दिन मिल रहे हैं। जन्माष्टमी का त्योहार मनाने के लिए रोहिणी नक्षत्र को विशेष महत्व दिया जाता है। इस बार गृहस्थ और वैष्णव समेत सभी प्रमुख संप्रदायों में 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल करीब 15 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों ही रहेंगे।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की सम्पूर्ण घटना क्रमानुसार इस प्रकार है :-
मथुरा में कंस का अत्याचार द्वापर युग में मथुरा पर राजा कंस का राज था। वह अपनी बहन देवकी से बहुत प्रेम करता था।
चमत्कारी रात्रि : भगवान के आदेश से कारागार के सभी पहरेदार गहरी नींद में सो गए, हथकड़ियाँ और बेड़ियाँ खुल गईं और कारागार के दरवाजे अपने आप खुल गए।
गोकुल में लील : वासुदेव जी गोकुल पहुँचे। वहाँ सभी सो रहे थे। उन्होंने बालकृष्ण को यशोदा मैया के पास सुलाया और वहाँ जन्मी योगमाया रूपी कन्या को लेकर वापस मथुरा कारागार में आ गए। कारागार के द्वार फिर से बंद हो गए।
इस प्रकार अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की!
आपका अनुज
Kishan Vyas Mandsau
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