Saturday, 21 February 2026

दिल्ली

ग्रीन पटाखे नाम की कोई चीज दुनिया में मौजूद नहीं, जो लोग पटाखे जलाते हैं वे "देशद्रोही" : पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी

paliwalwani
ग्रीन पटाखे नाम की कोई चीज दुनिया में मौजूद नहीं, जो लोग पटाखे जलाते हैं वे "देशद्रोही" : पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी
ग्रीन पटाखे नाम की कोई चीज दुनिया में मौजूद नहीं, जो लोग पटाखे जलाते हैं वे "देशद्रोही" : पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी

दिल्ली. पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि देश में प्रदूषण के लिए अक्सर पराली जलाने, वाहनों की संख्या और औद्योगिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है.

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने पटाखों के इस्तेमाल पर एक ऐसा बयान दिया है जो चर्चा का विषय बन गया है. उन्होंने कहा कि जो लोग पटाखे इस्तेमाल करते हैं, वे देशद्रोही हैं और इसे लेकर उनके मन में कोई दूसरा शब्द नहीं है. इसके साथ ही मेनका गांधी ने कहा कि दिवाली, दशहरे, शादियों, नए साल और क्रिकेट मैचों जैसे मौकों पर जब पटाखे जलाए जाते हैं, तो उसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ता है और लोगों को सांस तक लेने में दिक्कत होने लगती है.

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि देश में प्रदूषण के लिए अक्सर पराली जलाने, वाहनों की संख्या और औद्योगिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है. मेनका गांधी के मुताबिक दिवाली से तीन दिन पहले तक दिल्ली की हवा लगभग साफ रहती है, लेकिन दिवाली के बाद से लेकर नए साल तक हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोग खुलकर सांस भी नहीं ले पाते. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर केवल दिवाली के दिन ही दिल्ली में करीब 800 करोड़ रुपये के पटाखे जलाए जाएं तो उसका पर्यावरण और स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा, यह समझना मुश्किल नहीं है.

  • इसके साथ ही मेनका गांधी ने ग्रीन पटाखों के दावे पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि ग्रीन पटाखे नाम की कोई चीज दुनिया में मौजूद नहीं है और यह केवल लोगों को भ्रमित करने का तरीका है. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह के पटाखे जलाने से प्रदूषण ही बढ़ता है, चाहे उन्हें किसी भी नाम से क्यों न बेचा जाए.

उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण की वजह से लोग मानसिक रूप से भी प्रभावित हो रहे हैं और अवसाद की स्थिति में पहुंच रहे हैं. जब तक बारिश नहीं होती, तब तक जहरीली हवा से राहत मिलना मुश्किल होता है. मेनका गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि यह अजीब विडंबना है कि जो लोग सबसे ज्यादा पटाखे जलाते हैं, वही लोग बाद में सरकार और सिस्टम पर सबसे ज्यादा आरोप लगाते हैं.

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