स्वरों की मल्लिका अनुराधा पौडवाल के जन्म दिवस पर स्वर साधकों ने बहाई स्वर लहरिया
सुरों से सजी रंगीन शाम का आयोजन
ज़ाकिर हुसैन
निंबाहेड़ा.
पदमश्री सम्मान से नवाजी गई प्रसिद्ध पार्श्व व भजन गायिका अनुराधा पौडवाल के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 को गीत- संगीत से सजी सुरमयी शाम का आयोजन किया गया।
श्री दयानंद चैरिटेबल फाउंडेशन एवं सुर सागर म्यूजिकल ग्रुप निंबाहेड़ा के बैनर तले आयोजित सुर- संगीत का कार्यक्रम निंबाहेड़ा के जेके बाउंड्री वॉल रोड स्थित श्री दयानंद सभागार पर शाम 6:30 बजे से 10:00 तक संगीत की स्वर लहरिया गूंजती रही और गायक कलाकारों को तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहना मिलती रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्र के जाने-माने सुर साधक एवं गीत संगीत कार्यक्रमों के प्रमुख आयोजक आई.पी.एस. मेमोरियल फाउंडेशन, संस्थापक विजय मलकानी चित्तौड़गढ़ थे।अध्यक्षता शिक्षाविद् पूर्व प्रिंसिपल अरविंद मूंदड़ा ने की, विशिष्ट अतिथियों के रूप में संगीत प्रेमी हरीश मालानी, बंसीलाल जीवनानी, यू एस शर्मा ,ममता जी राघवम, एवं श्रीमती माया चौहान मंचासीन थे।
स्वर तपस्वी, विजय मलकानी, प्रदीप ऋषि, ऋषि कुमार, ममता राघवम, जगदीश बैरागी चित्तौड़गढ़, रियाज भाई, गौरी शंकर सोलंकी, नरेंद्र लोठ, रेखा सोलंकी, राकेश गुप्ता, डॉ महेंद्र चौहान, सुनीता चौहान, सुरेश सुथार, वजाहत खान, नवजीत जैन, दिलीप बक्शी, नीलम पालीवाल, कैलाश तोलंबिया, विशाल धारू, सुनील घावरी, दीपक राज कीर, श्याम पुरस्वानी, भूमिका सेन निंबाहेड़ा आदि ने आवाज का जादू बिखरते हुए शानदार प्रस्तुतियां देकर इस गीत- संगीत मयी शाम को यादगार बना दिया।

धीरे से मेरी जिंदगी में आना, दिल है कि मानता नहीं
गायक कलाकारों ने, यारी है ईमान मेरा, पर्दा है पर्दा है, ख्वाबों में जो आए, दिल में तू सांसों में तू, चल री सजनी अब क्या सोचे, धीरे से मेरी जिंदगी में आना, दिल है कि मानता नहीं, छूकर मेरे मन को, सांसों की जरूरत, भोले ओ भोले, बहुत प्यार करते हैं तुमको, तुमसे यह दिन होता है, जो तुमको हो पसंद, आंखें हैं भरी भरी, सोचा हैं तुम्हें प्यार करें, यह दुआ है मेरी रब से, आयो रे मारो ढोलना, मैं दुनिया भुला दूंगा, तू ही मेरी जिंदगी, ओ साथी रे, नजर के सामने, बड़े अरमानों से रखा है, उतरना दिल में कोई, जिंदगी प्यार का गीत है, पल- पल दिल के पास आदि गीत गाकर यह साबित कर दिया कि शहर भले ही छोटे हो लेकिन यहां टैलेंट बेमिसाल है।
ऋषि राघवम ने प्रभावी ढंग से महाभारत की प्रमुख घटनाओं पर कविता प्रस्तुत की, कार्यक्रम संयोजक भजन जिज्ञासु ने श्री राम स्तुति गाने के साथ आभार प्रदर्शित किया। कार्यक्रम का सुंदर संचालन सेवानिवृत्ति इंजीनियर हजारीलाल मेघवाल ने किया।

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