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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार की संपत्तियों और कंपनियों की EOW जांच की मांग

📅 09 August 2026, 12:14 AM ✍️ paliwalwani ⏱️ 10 मिनट में पढ़ें
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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार की संपत्तियों और कंपनियों की EOW जांच की मांग
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार की संपत्तियों और कंपनियों की EOW जांच की मांग

भोपाल. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के परिवार से जुड़ी कथित संपत्तियों, कंपनियों, फर्मों और वित्तीय लेन-देन को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) में शिकायत किए जाने का मामला सामने आया है। सिस्टम परिवर्तन अभियान के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त IFS अधिकारी आजाद सिंह डबास ने EOW के महानिदेशक को शिकायत देकर पूरे मामले की आर्थिक जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में शिवराज सिंह चौहान, उनकी पत्नी साधना सिंह और उनके पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान व कुणाल सिंह चौहान के नाम से जुड़ी कथित संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि EOW ने शिकायत पर औपचारिक जांच या FIR दर्ज करने का निर्णय लिया है या नहीं।

शिवराज के मुख्यमंत्री कार्यकाल से जुड़े कई मामलों का हवाला

आजाद सिंह डबास ने अपनी शिकायत में शिवराज सिंह चौहान के लंबे मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान सामने आए विभिन्न विवादों और कथित भ्रष्टाचार के मामलों का उल्लेख किया है। इनमें व्यापमं, ई-टेंडर, डंपर, पोषण आहार, अवैध रेत खनन, वृक्षारोपण, छात्रवृत्ति, नर्सिंग कॉलेज, मिड-डे मील और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े मामले शामिल हैं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन मामलों की निष्पक्ष और व्यापक जांच नहीं हुई। इसी आधार पर उन्होंने पुराने मामलों के साथ-साथ परिवार की कथित संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों की आर्थिक जांच कराने की मांग की है।

विदिशा और सीहोर में जमीन खरीद पर सवाल

शिकायत में शिवराज सिंह चौहान के परिवार की जमीनों को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। डबास का दावा है कि मुख्यमंत्री बनने से पहले परिवार के पास सीमित कृषि भूमि थी, लेकिन बाद के वर्षों में विदिशा और सीहोर जिलों के अलग-अलग इलाकों में जमीनों की खरीद हुई।

शिकायत में ढोलखेड़ी और बदनपुर जैसे गांवों का उल्लेख करते हुए इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल धन के स्रोत, भुगतान के माध्यम और लेन-देन की जांच की मांग की गई है।

परिवार से जुड़ी कंपनियों और LLP की जांच की मांग

डबास ने शिकायत में कई कंपनियों और फर्मों का नाम लेते हुए उनके गठन, पूंजी निवेश और वित्तीय गतिविधियों की जांच की मांग की है। इनमें कोकिला ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड, ट्रिटियम केमटेक LLP, K2 सिनर्जी LLP, भारत फोटोवोल्टेनिक प्राइवेट लिमिटेड, ग्रीनवुड बायोएनर्जी वेंचर्स LLP और प्रेम सुंदर फाउंडेशन का उल्लेख किया गया है।

शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इन संस्थाओं का संबंध साधना सिंह, कार्तिकेय सिंह चौहान और कुणाल सिंह चौहान से है। ट्रिटियम केमटेक LLP को लेकर शिकायत में कुणाल सिंह चौहान के साथ माही खान के साझेदार होने का भी उल्लेख किया गया है। इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित कॉरपोरेट और वित्तीय रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।

कार्तिकेय और कुणाल के नाम की जमीनों का भी जिक्र

शिकायत में कुणाल सिंह चौहान के नाम पर राष्ट्रीय राजमार्ग से लगी कथित जमीन का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस जमीन का बाजार मूल्य करोड़ों रुपये हो सकता है और इसकी खरीद के लिए धन के स्रोत की जांच होनी चाहिए।

इसी तरह कार्तिकेय सिंह चौहान के नाम पर ढोलखेड़ी और जैत क्षेत्र में जमीन होने तथा कुछ जमीनों के लैंड यूज में बदलाव का भी शिकायत में जिक्र किया गया है। डबास ने इन मामलों में जमीन खरीद और भूमि उपयोग परिवर्तन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की है।

‘सुधामृत’ ब्रांड को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप

शिकायत में सुंदर डेयरी एंड फूड के ‘सुधामृत’ ब्रांड का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस ब्रांड के तहत डेयरी उत्पाद, पैकेज्ड पेयजल और अन्य उत्पादों का कारोबार किया जाता है।

डबास ने दावा किया है कि विदिशा के ढोलखेड़ी क्षेत्र में कई एकड़ में फैली डेयरी में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। उन्होंने कारोबार में लगाए गए धन, पूंजी के स्रोत और कंपनी के वित्तीय लेन-देन की जांच की मांग की है। शिकायत में इससे आगे कंपनी की वास्तविक कारोबारी गतिविधियों पर भी सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

दिलीप बिल्डकॉन और दिलीप सूर्यवंशी का भी जिक्र

शिकायत में इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (DBL) और उसके प्रमुख दिलीप सूर्यवंशी का भी उल्लेख किया गया है। डबास ने दावा किया है कि शुरुआत में सूर्यवंशी की फर्म ‘मेसर्स दिलीप बिल्डर्स’ के नाम से संचालित होती थी और उसका कारोबार करीब 5 करोड़ रुपये था। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2006 में यह कंपनी ‘दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड’ और 2007 में ‘दिलीप बिल्डकॉन पब्लिक लिमिटेड’ बनी।

शिकायतकर्ता ने कंपनी के कारोबार में हुई कथित तेज वृद्धि का हवाला देते हुए वर्ष 2025-26 में 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर का दावा किया है। इसके आधार पर उन्होंने कंपनी के वित्तीय लेन-देन और शिवराज सिंह चौहान से कथित संबंधों की जांच की मांग की है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए इस दावे को भी जांच के बाद ही तथ्य के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

EOW की जांच पर टिकी नजर

फिलहाल इस पूरे मामले का अगला कदम EOW की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर एजेंसी दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच करती है या विस्तृत आर्थिक जांच शुरू करती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

गौरतलब है कि आजाद सिंह डबास इससे पहले भी शिवराज सिंह चौहान को लेकर शिकायतें कर चुके हैं। अक्टूबर 2025 में सिवनी अभयारण्य में अतिक्रमण के एक मामले को लेकर डबास की शिकायत के बाद वन विभाग के स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू होने की रिपोर्ट सामने आई थी।

  • महत्वपूर्ण : मौजूदा शिकायत में लगाए गए संपत्ति, निवेश, कंपनियों और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता के दावे हैं। इन्हें जांच या किसी सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के बिना प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
  • फोटो: सोशल मीडिया

    1. Sanjay Saxena :

       

      BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन।  राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण, समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास। 

     

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