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संघर्षों के साये में इतिहास हमारा पलता है...जिस ओर युवा चलते है, उस ओर जमाना चलता है : आंदोलन से निकले महत्वपूर्ण पॉइंट

📅 26 July 2026, 09:43 PM ✍️ indoremeripehchan.in ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
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संघर्षों के साये में इतिहास हमारा पलता है...जिस ओर युवा चलते है, उस ओर जमाना चलता है : आंदोलन से निकले महत्वपूर्ण पॉइंट
संघर्षों के साये में इतिहास हमारा पलता है...जिस ओर युवा चलते है, उस ओर जमाना चलता है : आंदोलन से निकले महत्वपूर्ण पॉइंट

"NDA में इस्तीफ़े नहीं होते" अहंकार चरम पर था. बस हम ही हम है और बाकि पानी कम है, नेताओं को महामानव बनाना बंद करो, उनको केवल येन केन प्रकारेण सत्ता चाहिए, डर सबको लगता है. यह भी संभव है की सोनम वांगचुक और दीपके को हम बीजेपी से सांसद बनते देखे तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।   

आंदोलन से निकले महत्वपूर्ण पॉइंट 

१. समर्थक सोशल एक्टिविस्ट:  समर्थक एक्टिविस्ट हर सही / गलत बात पर मोदी सरकार के समर्थन में ऊलजुल, अफलातूनी और मनगढ़ंत कहानी बनाकर पोस्ट करना परम धर्म समझते है, उन्होंने देश के युवाओं के आक्रोश को देशद्रोही, सनातन विरोधी, अमेरिका-पाकिस्तान-चीन का एजेंट, भीम आर्मी और विदेशी फंडिंग क्या-क्या पोस्ट नही कर रहे थे. तरस आता है इनकी विकलांग मानसिकता पर. आंदोलनकारी हमारे अपने बच्चे ही थे.  

२. आंदोलन में कुछ स्लोगन निम्नस्तरीय थे: 10-15℅ विक्षिप्त और गलत मानसिकता के लोगों के कारण पुरे आंदोलन को बदनाम करने की नाकाम कोशिशें हुई. युवा देश के भविष्य है, उनसे इस प्रकार के आचरण की उम्मीद नहीं है. पर समर्थकों को भी समझना होगा की नेता रेपिस्ट-गुंडा-मवाली-दलबदलु सब चलेगा, पर आंदोलनकारी संस्कारी चाहिए, आखिर युवा भी समाज का हिस्सा है. 

३. पहली बार हिंदू - मुस्लिम कार्ड नही चला: आज का युवा जिसे न हिन्दू मुस्लिम से डराया जा सकता है, न फर्जी राष्ट्रवादी बनकर उकसाया जा सकता है और न ही ढोंगी सनातनी बनकर बहकाया जा सकता है. उसने मात्र कुछ दिनों में एकजुट होकर जिस तरह बेलगाम अहंकारी सत्ता को घुटनों पर ला दिया, इसका अर्थ यहीं निकाला जा सकता है कि अब देश की जनता भी देश के असली मुद्दों पर फोकस करते हुए सरकार द्वारा प्रायोजित डर और अनिश्चितता को दरकिनार करेगी |  ????

४. मीडिया चैनल बेनक़ाब हुए है; मीडिया का काम जनता की आवाज बनना है, ना की सरकारी भोंपू। मीडिया का कवरेज़ केवल सरकार प्रयोजित था. मोदीजी भी अच्छे से जानते है की युवा न्यूज़ चैनल से दूर है इसलिए उन्होंने अपने सन्देश के लिए इंस्टाग्राम को चुना. मानो या ना मानो न्‍यूज चैनलों की viewership और विश्वसनीयता रसातल में है. 

लोगों को समझ आ गया है की 2026 में मोदीजी से सवाल करेंगे ना की नेहरूजी, अटलजी या राजीवजी से. जवाबदेही सत्ता पक्ष की होती है ना की विपक्ष की. 2047 का विकसित भारत का विज़न बताने वालों को भी 1947 का फ़ोबिया छोड़ना होगा। भूतकाल में अब नही उलझना है, वर्तमान और भविष्य की चिंता करना है.????✨

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