38 हजार वर्गमीटर में विकसित होगा मंदिर परिसर, 209 कुंडों की यज्ञशाला होगी आकर्षण
उज्जैन. सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के धार्मिक स्थलों को भव्य स्वरूप देने की तैयारी है. इसमें भूखीमाता मंदिर परिसर के विकास की योजना सबसे खास है. मंदिर और उससे जुड़ी अधोसंरचना के विकास पर 118.16 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है. योजना के तहत 38 हजार से अधिक वर्गमीटर क्षेत्र में मंदिर परिसर से लेकर प्रवेश प्रांगण, यज्ञशाला, भोजनशाला और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा. धार्मिक आयोजनों के लिए 209 कुंडों की यज्ञशाला और 207 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग इस परियोजना के प्रमुख आकर्षण होंगे.
भूखीमाता मंदिर परिसर के विकास का उद्देश्य केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्था तैयार करना भी है. सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर परिसर में प्रवेश, आवागमन, पूजा-अनुष्ठान और अन्य सुविधाओं को व्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है. परियोजना पूरी होने पर मंदिर परिसर को नया स्वरूप मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
प्रस्तावित विकास योजना में यज्ञशाला महत्वपूर्ण हिस्सा होगी. इसमें 209 कुंडों की व्यवस्था प्रस्तावित है. इससे धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों के लिए व्यापक व्यवस्था विकसित करने की योजना है. मंदिर परिसर में प्रवेश प्रांगण का विकास भी किया जाएगा.
14.58 करोड़ से होगा सिद्धवट मंदिर का विकास
सिद्धवट मंदिर परिसर एवं अधोसंरचना के विकास के लिए भी 14.58 करोड़ की योजना प्रस्तावित है. इसमें मंदिर परिसर, घाट क्षेत्र, प्रवेश एवं निकास व्यवस्था और पार्किंग का विकास किया जाएगा. श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए अलग कतार क्षेत्र और निकास प्रांगण बनाने की योजना है. नवीन प्रवेश द्वार, पूजन हॉल, प्रशासनिक भवन, पुरोहित भवन, शौचालय और चेंजिंग सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है. 42,400 वर्गफीट क्षेत्र में पार्किंग की व्यवस्था होगी, जिसमें 120 कारों और 10 बसों को खड़ा किया जा सकेगा. श्रद्धालुओं की जरूरतों के लिए लगभग 2,050 वर्गफीट क्षेत्र में दुकानों का भी प्रावधान है.