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जब तक फैसला नहीं आ जाता तब तक किसी भी तरह के धार्मिक पोशाक की मनाही

राज्य Published by: Paliwalwani Updated Thu, 10 Feb 2022 07:51 PM
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कर्नाटक. हिजाब विवाद पर आज कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले की अगली सुनवाई को हाई कोर्ट ने सोमवार तक के लिए टाल दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि जब तक फैसला नहीं आ जाता किसी भी तरह के धार्मिक पोशाक की स्कूल और कॉलेज में मनाही होगी। हाईकोर्ट ने फिलहाल सभी शिक्षण संस्थानों को खुला रखने का आदेश दिया है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि मामला खत्म नहीं हुआ है और सुनवाई अभी चलेगी। अगली सुनवाई सोमवार को होगी। जब तक इस मामले पर फैसला नहीं या जाता धार्मिक पोशाक पहनने की अनुमति नहीं होगी।

बता दें कि मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी और दो अन्य न्यायाधीशों की कर्नाटक उच्च न्यायालय की तीन-जजों की पीठ ने गुरुवार दोपहर हिजाब मुद्दे पर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। इसी दौरान ये फैसला सुनाया।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने भी बुधवार को इस मुद्दे पर कोई फैसला लेने से पहले अदालत के फैसले का इंतजार करने का फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट का मामले में दखल से इनकार

हिजाब मामले को सुप्रीम कोर्ट में भेजने की चर्चा हुई परंतु सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया।

दरअसल, उडुपी जिले के कुंडापुरा स्थित सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज के एक छात्र ने कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के माध्यम से इस विवाद से जुड़ी सभी याचिकाओं को कर्नाटक हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने की मांग की थी।

इसपर सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है किसी भी तरह की दखलंदाजी से और कहा है पहले कर्नाटक हाई कोर्ट का निर्णय इसपर आने दे।

क्या है मामला?

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी जिले के कुंडापुरा स्थित सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में हिजाब पहनकर कक्षा में प्रवेश की अनुमति नहीं मांगी जिसे कॉलेज ने अविकार कर दिया। इसी को लेकर बवाल मचा है। यही नहीं इस मामले में कई जिलों के स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों के समूह आमने सामने या गए हैं। हिजाब के विरोध में हिन्दू छात्र-छात्राएं भगवा गमछा और दुपट्टा डालकर परिसर में एंट्री की मांग कर रहे हैं। ऐसे में कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 3 दिनों के लिए स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए हैं।

वहीं, इस मामले पर ओवैसी ने अपनी बात दोहराते हुए कहा है कि 'हिजाब/बुर्का पहनना हमारा मौलिक अधिकार है। मैं क्या पहनता हूं क्या खाता हूं, उसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।'

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