जवागल श्रीनाथ भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे महान और निडर तेज गेंदबाजों में से एक हैं। सोशल मीडिया पर उनकी दिल्ली मेट्रो में यात्रा करती हुई तस्वीर ने लोगों का ध्यान खींचा, जहाँ वे बिना किसी वीआईपी ट्रीटमेंट या खास तवज्जो के एक साधारण यात्री की तरह कोने में चुपचाप खड़े नजर आए। यह साधारण पल दिखाता है कि वे जमीन से कितने जुड़े हुए इंसान हैं। आज के समय में भले ही लोग सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और रील्स की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं, लेकिन श्रीनाथ जैसे दिग्गजों का योगदान भारतीय खेल इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।
भारतीय तेज गेंदबाजी के असली आक्रामक अगुआ: 1990 के दशक में जब भारतीय टीम मुख्य रूप से स्पिन गेंदबाजी पर निर्भर थी, तब श्रीनाथ ने भारतीय तेज गेंदबाजी की कमान संभाली। वे लगातार 140-150 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकने वाले शुरुआती भारतीय तेज गेंदबाजों में शामिल थे।
वे भारत के एकमात्र ऐसे तेज गेंदबाज हैं जिन्होंने चार एकदिवसीय विश्व कप (1992, 1996, 1999 और 2003) में हिस्सा लिया है। विश्व कप इतिहास में भारत की ओर से सबसे ज्यादा 44 विकेट लेने का रिकॉर्ड संयुक्त रूप से (जहीर खान के साथ) उनके नाम दर्ज है।
श्रीनाथ ने भारत के लिए 67 टेस्ट मैचों में 236 विकेट और 229 एकदिवसीय (ODI) अंतरराष्ट्रीय मैचों में 315 विकेट हासिल किए हैं। वे वनडे में 300 से ज्यादा विकेट लेने वाले पहले भारतीय तेज गेंदबाज बने थे।
गेंदबाजी के साथ-साथ उन्होंने कई मौकों पर निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करके भारत को जीत दिलाई है। 1996 के कोलकाता टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उनके 21 रन पर 6 विकेट के प्रदर्शन को आज भी याद किया जाता है।
संन्यास लेने के बाद भी वे क्रिकेट से जुड़े रहे। वर्तमान में वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के एलीट पैनल में एक बेहद सम्मानित और अनुभवी मैच रेफरी के रूप में सेवा दे रहे हैं।
अपनी तेज गेंदबाजी से दुनिया भर के बल्लेबाजों को खौफ में रखने वाले श्रीनाथ असल जिंदगी में बेहद शांत, सादे और पढ़े-लिखे इंसान हैं। वे इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेशन में इंजीनियर भी हैं।