भीड़ के तमाशबीन बनने के इस दौर में सुरता परमार की यह जांबाजी रोंगटे खड़े कर

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डूंगरपुर. किनारे पर खड़ी भीड़ तमाशा देख रही थी... लेकिन मैं उस 11 महीने के मासूम को अपनी आंखों के सामने अनाथ कैसे होने देती? जब अंदर से उस बच्चे के रोने की आवाज़ आई, तो मैं खुद को रोकती भी तो कैसे?"

राजस्थान के डूंगरपुर में जब एक कार अनियंत्रित होकर 10 फीट गहरे तालाब में समाने लगी, तो किनारे पर कई लोग मौजूद थे। पानी गहरा था, कार तेजी से डूब रही थी और अंदर फंसा परिवार अपनी आखिरी सांसों के लिए तड़प रहा था—लेकिन उस खौफ को देखकर किसी का एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा।

तभी वहां से गुजर रहीं 38 वर्षीय सुरता परमार के कानों में पानी के भीतर से आ रही उस 11 महीने के बच्चे की चीख पड़ी।धर्मेश यादव, उनकी पत्नी शिल्पा और 11 महीने का बेटा दृश था। 38 साल की सुरता ने न अपनी जान की परवाह की, न यह सोचा कि पानी 10 फीट गहरा है। वे बिना एक पल गंवाए सीधे तालाब में कूद पड़ीं।

डूबती गाड़ी तक तैरकर पहुँचीं, खिड़की का शीशा तोड़ा और अंदर भरते पानी के बीच से सबसे पहले उस मासूम को सीने से लगाकर किनारे सुरक्षित पहुंचाया।उनका काम यहीं खत्म नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने माता-पिता को भी बाहर निकालने में मदद की। लेकिन बाद में सुरता की मदद के लिए दो युवक भी नीचे आए थे।

उनकी 15 वर्षीय बेटी आयुषी भी रस्सी लेकर मां की मदद करने पानी में गई थी। वे उसी पल दोबारा गहरे पानी में लौटीं और कार में बेहोश पड़े माता-पिता को भी एक-एक करके खींचते हुए बाहर निकाल लाईं। हादसे के बाद जब लोगों ने उनके इस अदम्य साहस को सलाम किया, तो उन्होंने कोई बड़बोलापन नहीं दिखाया। बेहद सादगी से बस इतना कहा—"एक मां किसी बच्चे की चीख सुनकर पीछे कैसे हट सकती है?"

जिस दौर में लोग हादसों के वक्त जेब से मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने में मशगूल हो जाते हैं, उस दौर में 38 साल की इस साधारण सी महिला ने फरिश्ता बनकर एक ही झटके में पूरे परिवार की उजड़ती दुनिया को बचा लिया। राजस्थान की इस जांबाज बेटी सुरता परमार के इस फौलादी कलेजे और निस्वार्थ ममता को पूरे हिंदुस्तान का दिल से सलाम! 

ईमानदारी से बताइए, क्या भीड़ के तमाशबीन बनने के इस दौर में सुरता परमार की यह जांबाजी रोंगटे खड़े कर देने वाली नहीं है? 

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