नाथद्वारा में पुरानी राजनीति के होर्डिंग पोस्टर ध्वस्त, नए चेहरों पर जनता का अटूट विश्वास, काम किया है तो प्रचार कैसा, जनता खुद देगी जवाब

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K.k. sanadya Nathdwara

नाथद्वारा.

नाथद्वारा नगरपालिका चुनाव अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शहर में एक तरफ बड़े बड़े होर्डिंग और दीवारों को पाटते हुए पोस्टर लगे हैं तो दूसरी तरफ जनता के मन में एक बहुत बड़ा बदलाव आ चुका है। जनता ने इन होर्डिंग पोस्टर वालों को सीधा और करारा जवाब देना शुरू कर दिया है। शहर के हर चौराहे, हर गली, हर चाय की थड़ी पर अब एक ही चर्चा है कि बहुत हो गया प्रचार का खेल, बहुत देख लिए पुराने चेहरे, अबकी बार नए चेहरों पर जनता विश्वास करेगी और नए चेहरों को ही मौका देगी।

काम किया है तो होर्डिंग की क्या जरूरत

जनता का सबसे तीखा और सबसे बड़ा सवाल यही है कि तुमने अगर सच में जनहित में अच्छे काम किए हैं तो फिर इतने बड़े बड़े होर्डिंग और पोस्टर लगाने की जरूरत क्या है। अगर आपने जनता के लिए दिल से काम किया है, जनता के सुख दुख में खड़े रहे हो, वार्ड की टूटी सड़क बनवाई है, नाली साफ करवाई है, पानी और लाइट की समस्या को दूर किया है तो जनता खुद आपके साथ है। जनता के दिल में अगर आपकी जगह है तो फिर दीवारों पर जगह घेरने की क्या जरूरत है।

नाथद्वारा की जागरूक जनता कह रही है कि असली जनप्रतिनिधि का प्रचार उसके काम से होता है, होर्डिंग से नहीं। जिसने पांच साल जनता के बीच रहकर पसीना बहाया है उसे अपना नाम चिल्लाने के लिए पोस्टर की जरूरत नहीं पड़ती। उसका नाम तो जनता की जुबान पर खुद ही रहता है। लेकिन जिसने कोई काम ही नहीं किया, जो केवल चुनाव आते ही नींद से जागता है और सीधा होर्डिंग पर दिखाई देता है, उसे ही अपने चेहरे को पहचानवाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाने पड़ते हैं।

स्वहित की राजनीति का अंत और नए चेहरों का उदय

वर्तमान समय में होने वाला यह चुनाव पहले की तरह पैसा देकर, डरा धमका कर और प्रलोभन देकर जीतने वाला चुनाव नहीं रहा। क्योंकि जनता ने पूर्व में कई चेहरों को जनप्रतिनिधि के रूप में परख लिया है। जनता ने देखा है कि कैसे जनसेवा के नाम पर केवल स्वहित साधा गया। शहर का विकास नारों में अटका रहा और अपना विकास होता रहा। इसीलिए अब जनता ने मन बना लिया है कि ऐसे मौका परस्त लोगों को इस बार हर हाल में आईना दिखाना है।

और इसी वजह से शहर का युवा, बुद्धिजीवी, प्रबुद्ध वर्ग, व्यापारी, गणमान्य नागरिक और पढ़ा लिखा जागरूक मतदाता अब नए चेहरों की तरफ देख रहा है। नया चेहरा यानी नई सोच, नई ऊर्जा, नया जोश और शहर के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा। जनता का मानना है कि नया व्यक्ति सेवा के भाव से आएगा, वह किसी ठेकेदारी प्रथा से बंधा नहीं होगा, किसी पुराने काले चिट्ठे से उसका दामन दागदार नहीं होगा।

जनता का अंतिम फैसला

नाथद्वारा की जनता ने इस बार एक ही नारा दिया है कि अगर आपने जनहित में काम किया है तो जनता आपके साथ है, आपको पोस्टर होर्डिंग लगाने की जरूरत कहां है। और अगर आपने काम नहीं किया है तो चाहे आप पूरे शहर को होर्डिंग से पाट दो, जनता आपको वोट देने वाली नहीं है।

अबकी बार जनता नारे पर नहीं नियत पर वोट देगी। पोस्टर पर नहीं चरित्र पर वोट देगी। होर्डिंग पर छपे वादों पर नहीं जमीन पर हुए काम पर वोट देगी। इसीलिए जो लोग यह सोच रहे हैं कि बड़े बड़े होर्डिंग लगा कर जनता को भरमा लेंगे वह बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। नाथद्वारा ने ठान लिया है कि पुरानों को आराम देना है और नए, ईमानदार, जमीन से जुड़े चेहरों को मौका देना है। चौदह सितंबर को जब परिणाम आएगा तो यह तय हो जाएगा कि होर्डिंग की नहीं बल्कि काम की राजनीति जीती है।

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