15वर्ष बाद बन रहा जन्माष्टमी पर अष्टमी रोहिणी का दुर्लभ योग : बाबूलाल शास्त्री टोक

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जन्मोत्सव मध्य रात्रि निशीथ काल 11-56,से12-41 श्रेष्ठ मूहूर्त  योग

टोक. भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग मे भाद्रपद कृष्ण अष्टमी मध्य रात्रि को रोहिणी नक्षत्र मे हुआ था,गत वर्षो मे कई बार जन्माष्टमी को अष्टमी  तिथि तो रहती है किन्तु रोहिणी नक्षत्र का,सयोग नही बन पाता, रामानंदी सम्प्रदाय मे भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के लिए रोहिणी नक्षत्र को विशेष महत्व दिया जाता है। तभी तो रामानंदा समप्रदाय एवं वैष्णव  समप्रदाय दवारा अलग अलग दिन जन्माष्टमी मनाई जाती रही है,इस वर्ष दोनो, सम्प्रदाय  दवारा  एक दिन 4 सितम्बर 2026 को  मनाई जायेगी, 

मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध, सस्थान  टोक के निदेशक  बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि, इस वर्ष, 4 सितम्बर 2026 शुक्रवार  भाद्रपद  कृष्ण पक्ष अष्टमी को , अष्टमी तिथि, अर्ध  रात्रि 24-13बजे तक एवं रोहिणी नक्षत्र  अर्द्ध रात्रि, ,23-04,बजेत क है, इस वर्ष, 15 वर्ष बाद, जन्माष्ठमी को अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र का विशेष दुर्लभ  सयोग बन रहा है,

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मध्य रात्रि निशीथ काल मे,11-56,,से, ,12-41बजे  तक ,महाअभिषेक का श्रेष्ठ योग विशेष फलदायक  मुहूर्त है ‌जन्माष्टमी की अर्धरात्रि  को अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र का एक साथ सयुक्त रुप से विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे संयोग मे भगवान श्री कृष्ण की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। 

बाबूलाल शास्त्री ने बताया  कि  भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरुप लडडू गोपाल की पुजा एवं उपवास करना ,पंचामृत से स्नान कराना  चाहिए, माखन मिश्री पंजीरी फल मिष्ठान नैवेद्य का भोग लगाना चाहिए, 

बाबूलाल शास्त्री टोक : मो. 9413129502

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