आज हम एक बार फिर आपकी कलम से समाज जनों को अवगत करा रहे है, कि दिल में मान-सम्मान हो तो व्यक्ति मर कर भी अमर हो जाता हैं... अच्छे कार्य सदैव स्मृति की तरहा छाए रहते है....!
आयुष जोशी अपने बड़े पापा के लिए लिख तो बहुत सकते थे...लेकिन शब्द कम...उनकी वाणी के स्वर आज भी हमारे कानों में गुँज रहे...वो भक्ति की बात हो या फिर जिंदादिली की बात कर लो...उन्हें पालीवाल समाज में नगर सेठ की उपाधी से नवाजा गया...लेकिन कभी अहंकार मन में नही आया...जब भी मिले...दिल खोल कर मिले...मदद के नाम पर बिना बताएं...अनगिनत साथियों की खुब मदद की...कभी रिटर्न की अप्रेक्षा नहीं की...
उनकी मधुर मुस्कान...और वाणी आज भी श्री चारभुजानाथ मंदिर परिसर के आस-पास उनके अनगिनत चाहने वालों के गूँज सुनाई दें रही हैं....नगर सेठ का इतनी जल्दी में हमें क्यों छोड़ कर श्री चारभुजानाथ जी के चरणों में चले गए..., किसी के भी समझ में नहीं आ रहा है...आखिर इतनी जल्दी क्या थी...आज भी ये आँखें हर पल आपको ही देखने और निहारने का इंतज़ार करती रहती हैं...
मानो, अभी-भी कहीं ना कहीं हमारे आस-पास हो...और श्री चारभुजानाथ जी के भजन गाकर, सबको धर्म की राह पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे हैं..., काश कुछ समय रूक जाते...आपके सारे सपने...पूरे हो जाते...आपकी शेष यादें... "अमर ज्योति जगमगाती रहेगी"
आयुष जोशी अपने बड़े पापा के लिए कुछ बता रहे है...,आपके साथ अंतिम चित्र.... आपके चिर शांति मे जाने के कुछ दिन पहले का .... आपके लिए बहुत कुछ कहना चाहता हू... कहा से शुरू करू यह नही पता... शायद मेरे जीवन के सबसे पहले मित्र आप ही थे बचपन मे जिस लाड-प्यार से आपने पाला वह एक एक क्षण मेरी आंखो के सामने आकर खडा हो रहा है....
आपकी खुटी पर टंगी शर्ट पेंट हम पांचो भाई बहन का बैंक हुआ करती थी ... कभी सवाल नही किया आपने उन गायब हुए रुपए के बारे मे... सबकुछ पता होते हुए भी अंजान बना रहना और प्यार लुटाना यह आपसे सिखा है मैने... आपके लिए हम बच्चो से बढकर इस दुनिया मे कुछ भी नही था... बच्चो को किस तरह प्यार किया जाता है यह आपसे सिखा है मेने... हर समस्या आप अपने उप्पर ले लिया करते थे और बदले मे सिर्फ हमारी मुस्कुराहट...
बच्चो को डांटना क्या होता है आपके जिवन मे यह शब्द ही नही था...घर मे सबसे बडा होने के बाद भी सबसे छोटे बनके रहना... बिना जताए जाने कितनी ही जिम्मेदारीया निभा जाना... आप के द्वारा किए गए धार्मिक कार्याे का बखान आपने कभी नही किया.... आपके द्वारा किए गए अनेको कार्य अब लोगो के द्वारा हमे पता चल रहै है...
समाज जानता था आपकी शख्सियत कितनी बडी है, फिर भी एक सहज सरल साधारण इंसान जिवन पर्यंत बने रहना... आसान नही है... समाज के हर तबके हर वर्ग और उम्र के इंसान के साथ आपके आत्मीय संबंध थे... वरिष्ठो के साथ वरिष्ठ और अनुजो के साथ अनुज बने, रहने की अद्भुत कला थी... आप मे... आज समाज का हर वर्ग स्तब्ध और पीडा मे है... आपके इस असामयिक पलायन से....
प्रभु श्री चारभुजा नाथ जी के अन्नय भक्त थे आप... बिना किसी लाग-लपेट दिखावे के आपने आजीवन उनकी भक्ति की है... प्रभु भक्ति की जो ज्योति आपने परिवार मे जगाई है वह हमेशा हमारे साथ रहेगी... प्रभु के लिए मन मे क्रोध है... इस तरह आपको अपने धाम मे बुला लिया ह्रदय ओर मस्तिष्क दोनो ही इस फ़ैसले को स्वीकार नही कर पा रहे है.... पर विधी का विधान स्वीकार करना पडेगा...
जीवन मे आगे बढ़ना पड़ेगा...आप ही से हमारी पहचान है और यह बनी रहेगी... जिया बाउजी द्वारा रचित एवं आपके द्वारा संचित इस बागबान को हम सभी संभालेंगे आपके द्वारा प्रदान किए गए संस्कारो के साथ.. .... हरि ॐ बडे पापा हरि शरणम
आज वे हमारे बीच भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उनके सद्विचार, संस्कार, सेवाभाव और मधुर स्मृतियां सदैव हमारे हृदय में जीवित रहेंगी.
दुःख की इस घड़ी में पालीवाल वाणी मीडिया समूह की संवेदनाएं जोशी परिवार के साथ हैं, ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें.... ॐ शांति
Anil Bagora-Sunil Paliwal