गोगा नवमी पर्व भारत स्काउट गाइड के पदाधिकारियों ने किया छड़ी पूजन

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इंदौर.

गोगा नवमी के पावन अवसर पर कमाठीपुरा इंदौर, मध्य प्रदेश में एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया. भारत स्काउट गाइड के आजीवन सदस्य श्री प्रदीप मोट के निज निवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और स्काउट गाइड परिवार ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

इस विशेष धार्मिक आयोजन में मुख्य रूप से पधारकर सभी ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ छड़ी पूजन किया. कार्यक्रम में मुख्य रूप से भारत स्काउट गाइड के जिला संघ अध्यक्ष श्री भूपेंद्र अडसूरे एवं जिला सचिव श्री दिलीप मेहता उपस्थित रहे.

छड़ी पूजन के इस पावन अवसर पर सर्वश्री सुभाष मापरे, पालीवाल वाणी के प्रबंध संपादक अनिल बागोरा, राकेश पंडित, वासुदेव पुरोहित और उत्कर्ष चौधरी सहित समाज के अन्य गणमान्य जनों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और बाबा गोगा जी महाराज (जाहरवीर) की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया. कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया.

गोग जी कौन हैं?

गोगा जी का जन्म चौहान राजपूत परिवार में हुआ था और वे एक ऐसे योद्धा के रूप में बड़े हुए जिनकी वीरता पीढ़ियों तक घुमंतू गायकों ने अमर बनाई रखी. गोग जी का सांपों से गहरा नाता था. परंपरा के मुताबिक, उनमें सांपों से बात करने और उन्हें आदेश देने की शक्ति हासिल थी.

यह संबंध उनकी पहचान का इतना अहम हिस्सा बन गया कि, समय के साथ उनकी पूजा मुख्य रूप से सांप के काटने से रक्षक के रूप में की जाने लगी. उन्हें जाहिर पीर भी कहा जाता है, जिसका मतलब 'प्रकट संत' जो यह दर्शाता है कि उनके अनुयायी काफी पहले ही धार्मिक सीमाओं को पार कर चुके हैं.

गोगा जी का पवित्र स्थान : भारत में एक ऐसी भी जगह है, जो गोगा नवमी की भावना को बखूबी से दर्शाती है, तो वह राजस्थान का गोगामेडी है. किंवदंती के मुताबिक, यहीं पर गोगा जी ने समाधि ली थी और तब से यह स्थान उनसे जुड़ा सबसे खास तीर्थ स्थल बन गया है.

 इस लेख में बताए गए कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं.

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