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श्री जगन्नाथ रथयात्रा : मंदिर में 752 चूल्हों पर खाना बनता है, दुनिया की सबसे बड़ी रसोई’ का दर्जा

अन्य ख़बरे Published by: paliwalwani.com Updated Tue, 13 Jul 2021 01:54 AM
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उड़ीसा. कल 12 जुलाई 2021 दिन सोमवार को श्री जगन्नाथ रथयात्रा सेवादारों ने निकाली. उड़ीसा के पुरी में पिछले वर्षानुसार जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली गई. कोरोना काल के चलते सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार रथ यात्रा केवल पुरी में निकली. उड़ीसा के पुरी में हर साल जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाती है. बता दे. कोरोना काल के चलते सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार रथ यात्रा केवल पुरी में सीमित दायरे में निकाली गई. कोर्ट ने कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट और तीसरी लहर की आशंका को देखते ओडिशा सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए पूरे राज्य में रथ यात्रा को निकालने पर पाबंदी लगा दी.  

श्री जगन्नाथ जी के बारे में : श्री जगन्नाथ जी, बलभद्र जी और सुभद्रा जी रथ में बैठकर अपनी मौसी के घर, तीन किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर जाते हैं लाखों लोग रथ खींच कर तीनों को वहां ले जाते हैं. फिर आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को तीनों वापस अपने स्थान पर आते हैं. रथयात्रा को देखने के लिए लाखों लोग देश-विदेश से पुरी आते हैं, लेकिन इस बार कोरोना संकट के चलते ऐसा नहीं हुआ. बता दे. हिन्दू धर्म में चार धामों का बहुत महत्त्व है, इन्हीं में से एक धाम जगन्नाथ पुरी भारत के पूर्वी हिस्से में स्थित है. भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का रूप हैं “जगन्नाथ“, यानी जगत के स्वामी, पुरी को ’पुरुषोत्तम क्षेत्र’ व ’श्री क्षेत्र’ के नाम से भी जाना जाता है. वहीं पुरी में सबसे महत्त्वपूर्ण स्थल है, भगवान जगन्नाथ का मंदिर जहां वह अपने दाऊ बलभद्र जी और बहन सुभद्रा जी के साथ विराजमान हैं. भगवान जगन्नाथ के लिए जगन्नाथ मंदिर में 752 चूल्हों पर खाना बनता है. इसे ’दुनिया की सबसे बड़ी रसोई’ का दर्जा हासिल है. रथयात्रा के नौ दिन यहां के चूल्हों पर भोजन नहीं बनता है. वहीं गुंडिचा मंदिर में भी 752 चूल्हों की ही रसोई है, इस उत्सव के दौरान भगवान के लिए ’भोग’ यहीं बनता हैं.

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