जबलपुर.
परिवीक्षाधीन कर्मचारियों और शिक्षकों को परिवीक्षा अवधि में स्टाइपेंड 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत एवं 90 प्रतिशत, प्रदान किए जाने के स्थान पर, पद के वेतन का न्यूनतम वेतन देने के संबंध में, उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा निर्णीत याचिका में उल्लेख किए गए विधिक कारणों का अवलोकन करें.
1) पूर्व की सेवा से तकनीकी त्यागपत्र देकर, विहित प्रक्रिया का पालन कर, उच्च पद पर नियुक्ति होते हैं, उन्हें, वेतन संरक्षण एवं अन्य लाभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार प्राप्त होंगे। अर्थात, उन्हें स्टाइपेंड 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत एवं 90 प्रतिशत के स्थान पर, वेतन संरक्षण सहित वेतन का मिनिमम वेतन प्रोबेशन के दौरान मिलेगा।
2) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मत के अनुसार, वेतन संरक्षण का लाभ लेने हेतु, कर्मचारी को पूर्व के नियमित पद पर, धारणाधिकार प्राप्त होना चाहिए। दूसरे उच्च पद पर नियुक्ति, उच्च चैनल एवं विहित अनुमति प्राप्त होने के बाद , बिना सर्विस ब्रेक के होनी चाहिए।
3) तीन वर्ष प्रोबेशन अवधि में, स्टाइपेंड 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत एवं 90 का प्रावधान मध्यप्रदेश में सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश दिनांक 12/12/2019 द्वारा किया गया है। उक्त आदेश के द्वारा प्रावधान किया गया गया था कि जहां, लोक सेवा आयोग द्वारा चयन परीक्षा नहीं ली जाती है, उन सभी नियुक्तियों में स्टाइपेंड लागू करने वाला, आदेश दिनांक 12/12/2019 लागू होगा। अपितु उच्च न्यायालय जबलपुर इसे अवैध ठहराया है।
4) उच्च न्यायालय, जबलपुर मध्य प्रदेश के मत के अनुसार, एम पी एस सी एवं अन्य एजेंसी द्वारा की गई नियुक्ति के पश्चात, प्रोबेशन अवधि अवधि में दिए जाने वाले वेतन , जो कि मूलभूत नियमों के अनुसार दिया जाता है, में अलग मापदंड, भेदभाव पूर्ण एवं गैरकानूनी है। शासन की यह कार्यवाही, स्वीकार करने योग्य नहीं है कि एक तरफ, पी एस सी से नियुक्त होने वाले कर्मचारी प्रोबेशन पीरियड में वेतन का मिनिमम प्राप्त करेंगे एवं अन्य संस्था द्वारा चयनित कर्मचारी स्टाइपेंड प्राप्त करेंगे। अन्य एजेंसीज द्वारा चयनित एवं नियुक्त कर्मचारियों को,स्टाइपेंड 70 प्रतिशत, 80 प्रतिशत एवं 90 प्रतिशत तीन वर्ष के प्रोबेशन में दिया जाना, तर्कहीन है। याचिका कर्ता कर्मचारियों को वेतन का मिनिमम वेतन मिलेगा।
● अमित चतुर्वेदी, अधिवक्ता : उच्च न्यायालय, जबलपुर
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