विनोद भूतडा की कलम से
ठेकेदार ने बस्तियों में डायरी देकर विक्रेता बना डाले
कन्नौद.
देवास जिले के कन्नौद खातेगांव विकास खंड में आबकारी विभाग की उदासीनता से शासन की आबकारी निति की खुल्ले आम धज्जियां उड रही है तथा शराब दुकान पर जहां नियमों की अवहेलना की जा रही हैं, वही गांव-गांव और गली-गली में खुल्ले आम शराब की अवैध से बिक्री की जा रही हैं.
ठेकेदार ने डायरी देकर जो शराब विक्रेता नियुक्त कर डाले वहीं वह अपने घरो से आवासीय क्षेत्र में शराब बिक्री कर रहे है. गांव में लडाई-झगडे आम होते रहते हैं, घर की शांति भंग हो रही है, आए दिन शराबी खुल्ले आम शराब पीकर वाद-विवाद और अश्लीन गालियों से गांव का वार्तारण बिगड़ रहे है, शाम के समय माहिलओं को घर से बाहर जाने पर खतरा उत्पन्न हो गया हैं, वहीं गांव में छोटे-छोटे बच्चों का भविष्य खतरे में नजर आ रहा हैं. कई बार शासन/प्रशासन को शिकायत करने के बाद भी पुलिस प्रशासन शराब ठेकेदार पर कोई कार्यवाही नहीं करते हुए कभी-कभार एक दो शराबियों को पकड़ कर अपने काम की इतिश्री कर लेती है,
कन्नौद से करीब 5 किमी दूर डोकाकुई में अवैध रूप से शराब की बिक्री किये जाने से परेशान सैंकडो रहवासी महिला-पुरुष कन्नौद एसडीएम कार्यालय पहुंचे तथा वहां तहसीलदार श्री अवधेश कुमार सिंह को एक ज्ञापन सौंपा तथा मांग की गई कि ठेकेदार ने जो बस्ती में शराब बिक्री की व्यवस्था की हैं, उसे तत्काल प्रभाव से बंद किया जाएं. इसी प्रकार कन्नौद से करीब 20 किमी दूर बावडी खेडा तथा कई गांवो में भी यही स्थिति उत्पन्न हो रही हैं.
यहां बावडीखेडा के साथ स्थित दावत मशनपुरा, मानपुरा, बडीकराड, नाहरपानी, रामटेक, बंजर आदि गांवो के सैकडो महिला पुरुष ग्राम पंचायत बावडी खेडा पहंुचे तथा सरपंच, सचिव को भी एक ज्ञापन पत्र सौंपकर ग्राम पंचायत को नशा मुक्त बनाने की मांग की.
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि आबकारी विभाग की उदासीनता से गावों मे जगह-जगह खुल्ले आम शराब बेची जा रही है तथा बस्ती में लडाई झगडे हो रहे, बच्चे जो स्कूल पढने जाते हैं, ऐसे माहौल से उनकी पढाई प्रभावित हो रही हैं, उन्हें डर लगा रहता है, कि शराब के नशे में बच्चों के साथ कोई अनहोनी ना कर दे वहीं मजदूर वर्ग की महिलाए मजदूरी पर जाती है और घर के पुरुष शराब के लिए बर्तन बेच रहे हैं, घर लौटने पर मजूदर माहिला खा कैसे बनाएं, उसके समाने दो-दो मजबूरी की स्थिति निर्मित हो रही हैं. इसकी वजह भी अवैध रूप से ठेकेदार द्वारा डायरी के नाम पर शराब बेच रहे हैं.
इस प्रकार आए दिन परिवार में कलह हो रहा हैं. शराबी आदमी रोज राशन का पैसा शराब में खर्च कर रहा हैं. जिस कारण कई बार पति और पत्नी में गंभीर झगडे हो रहे है, जिसका बुरा असर बच्चों पर पड़ रहा हैं. शासन की नीति अनुसार हर गांव को नशा मुक्त बनाना है, तो शुरूवात देवास जिलों के गांव से की जाए और अवैध रूप से शराब ठेकेदार पर कानुनी कार्यवाही की जाएं. अगर ग्रामीणजनों की भावना को शासन और प्रशासन के साथ-साथ आबकारी विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाएं तो आने वाले दिनों में आंदोलन होगा, उसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी.