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मध्य प्रदेश में प्रमोशन नीति पर विवाद जारी,हाईकोर्ट में SC/ST मेरिट को लेकर उठे संवैधानिक सवाल

मध्य प्रदेश Published by: paliwalwani Updated Fri, 09 Jan 2026 12:53 AM
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जबलपुर.

मध्य प्रदेश में करीब 9 साल बाद लागू की गई सरकारी कर्मचारियों की नई प्रमोशन नीति पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस नीति को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में मामला विचाराधीन है, जहां इसे असंवैधानिक बताते हुए गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।

अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी अधिकारी संघ (AJJAKS) ने हाईकोर्ट में दलील दी है कि नई पदोन्नति नीति में SC/ST वर्ग के कर्मचारियों के लिए मेरिट (योग्यता) के आधार पर प्रमोशन का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

AJJAKS का कहना है कि प्रमोशन नियमों में ग्रेडेशन लिस्ट व्यवस्था को गलत तरीके से लागू किया गया है और यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों पर पदोन्नत SC/ST कर्मचारियों की गणना किस श्रेणी में होगी।

संगठन की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी फैसले के अनुसार पहले अनारक्षित श्रेणी में प्रमोशन और उसके बाद आरक्षित श्रेणी में पदोन्नति का सिद्धांत लागू होना चाहिए, लेकिन नई नीति में इसका पालन नहीं किया गया है।

AJJAKS ने अदालत को यह भी बताया कि प्रदेश की कुल जनसंख्या में SC/ST वर्ग की हिस्सेदारी लगभग 36 प्रतिशत है, जबकि उच्च पदों पर उनका प्रतिनिधित्व केवल 7 से 18 प्रतिशत के बीच सिमटा हुआ है। 

हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए संकेत दिया है कि यदि नियमों में संवैधानिक खामियां पाई जाती हैं, तो उनमें सुधार के निर्देश दिए जा सकते हैं। फिलहाल यह मामला विचाराधीन है और सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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