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इंदौर नगर निगम का राजस्व विभाग: फाइलें दबाने से लेकर ‘शुभ लाभ’ तक

इंदौर Published by: Ayush paliwal Updated Sun, 01 Feb 2026 07:55 PM
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जब जिम्मेदार ही “पैसा–पैसा” करने लगें...!

इंदौर.

इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग में इन दिनों हालात कुछ ऐसे बन गए हैं, जहां जिम्मेदारी पीछे छूटती दिख रही है और पैसे की प्राथमिकता सबसे आगे आ गई है। ताज़ा मामला एक कर्मचारी के सस्पेंशन से जुड़ा है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों की माने तो जोन 1 से संबंधित कर्मचारी को निलंबित करने के स्पष्ट निर्देश स्वयं कमिश्नर ने दिए थे, लेकिन राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वह फाइल  दिसंबर से अपने पास दबाकर रखी। वजह बताई जा रही है “शुभ लाभ”।

जब यह मामला कमिश्नर के संज्ञान में आया, तब जाकर सच्चाई सामने आई। कमिश्नर ने भरी बैठक में नाराज़गी भी जताई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इसके बावजूद न कोई ठोस कार्रवाई हुई, न कोई नज़ीर बनी।

हौसले इतने बुलंद कि डर खत्म हो गया

इसी का नतीजा है कि राजस्व विभाग के उक्त अधिकारी के हौसले इस कदर बुलंद हो गए हैं कि न किसी आदेश की परवाह न किसी चेतावनी का असर। खुलेआम यह संदेश जाने लगा है कि “जो करना है करो, फाइल तो यहीं से गुजरेगी।” इसी वजह से अब लगभग सारी अहम फाइलें अपने पास रखने की जिद देखी जा रही है। दिन भर इसी कोशिश में लगे रहना कि कोई मामला हाथ से न निकल जाए।

कुख्यातों की ‘री-एंट्री’ और जोन की सेटिंग

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राजस्व विभाग के इसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा पहले से कुख्यात हो चुके लोगों को दोबारा मुख्यधारा में लाने की कोशिशें तेज़ कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे भी बड़े “शुभ लाभ” का गणित बताया जा रहा है। खेल सीधा है। मोटा लाभ...बदले में अच्छे और मलाईदार ज़ोन की पोस्टिंग। यानी जिन पर पहले सवाल उठ चुके हैं, वही अब दोबारा सिस्टम की कमान संभालने की तैयारी में हैं।

सब कुछ कमिश्नर के कार्यकाल में, और बेखौफ

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह सब मौजूदा कमिश्नर के कार्यकाल में...। खुलेआम और बेखौफ चल रहा है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह अंधेरगर्दी आगे और बढ़ेगी?क्या निगम में भविष्य उन्हीं लोगों का होगा,  जो शहर के हित से ज़्यादा अपना हित देखते हैं?

राजस्व विभाग व्यवस्था नहीं, सौदेबाज़ी का अड्डा

अगर समय रहते जाग जाओ

फाइलें दबाने वालों पर कार्रवाई नहीं हुई। ‘शुभ लाभ’ की संस्कृति पर लगाम नहीं लगी...तो आने वाले समय में इंदौर नगर निगम का राजस्व विभाग व्यवस्था नहीं, सौदेबाज़ी का अड्डा बन जाएगा।और तब नुकसान सिर्फ सिस्टम का नहीं, पूरे शहर का होगा।

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