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Indore News : केन्द्र सरकार के काले कानून एडवोकेट अमेंडमेंट बिल-2025 का घोर विरोध

इंदौर Published by: sunil paliwal-Anil Bagora Updated Sat, 22 Feb 2025 01:05 AM
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केन्द्र सरकार से काला-कानून वापस लेने की मांग...

इंदौर. अभिभाषक संघ इंदौर के पूर्व-अध्यक्ष गोपाल कचोलिया अभिभाषक ने केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 को वकीलों की स्वतंत्रता और निजता पर हमला करार देते हुए इसकी घोर निन्दा की है। सम्पूर्ण भारत के अभिभाषक समुदाय में इस एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है। 

यह बिल वकीलों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर रहा है। वकीलों के विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानव गरिमा का जीवन जीने के अधिकार का सरेआम हनन कर रहा है। वकील सभी वर्गों और धर्मों के लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हैं,इस बिल के माध्यम से वकीलों के मौलिक अधिकार को समाप्त करने का कुप्रयास किया जा रहा है। 

बिल की धारा 4 के अनुसार केन्द्र सरकार बार कौंसिल आफ इण्डिया में तीन सदस्य को नामित कर बार कौंसिल आफ इण्डिया के माध्यम से वकीलों को अपने अधीन करने की कोशिश कर रही है।बिल की धारा 35 A  के माध्यम से वकीलों को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए काम से विरत रहने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। 

वकीलों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लडने से रोकने का कुप्रयास किया जा रहा है। वकीलों में फूट डालने के लिए "अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो नीति"अपना कर केन्द्र सरकार द्वारा वकीलों को पुरूष वकील और महिला वकील दो वर्गों में बांट कर वकीलों की एकता भंग करने का प्रयास किया गया है। 

बिल में वकीलों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने का कोई प्रावधान नहीं है। बिल में वकीलों के कल्याण हेतु कोई विशेष योजना का उल्लेख नही है। नवीन अधिवक्ताओं के लिए वकालत की शुरुआत के समय स्टायफंड प्रदान करने का कोई प्रावधान नहीं है। वकीलों के स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

बिल की धारा 4 के अनुसार बार कौंसिल आफ इंडिया में तीन सदस्य को केन्द्र सरकार नामित करेगी। इससे बार कौंसिल आफ इंडिया की स्वायत्तता और स्वतंत्रता प्रभावित होगी।धारा- 9 के अनुसार वकीलों के व्यवहार की जांच करने के लिए एक कमेटी बनाई जायेगी कमेटी में उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति भी रहेंगे।

धारा -49 A के अनुसार केन्द्र सरकार किसी प्रावधान,नियम या आदेश लागू करने के लिए बार कौंसिल आफ इण्डिया को दिशा निर्देश दे सकेंगी। इसके अलावा भी बिल में अनेक वकील विरोधी प्रावधान प्रस्तावित है।

सम्पूर्ण भारत वर्ष के वकील "एडवोकेट अमेंडमेंट बिल-2025" रूपी काले कानून का घोर विरोध कर रहे है। गोपाल कचोलिया अभिभाषक ने केन्द्रीय विधि मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल से मांग की है कि केन्द्र सरकार एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 को तत्काल वापस ले। केन्द्र सरकार वकीलों के संरक्षण और सुरक्षा के एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करें। 

वकीलों के लिए जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करें। नवीन अधिवक्ताओं के लिए वकालत के शुरुआती पांच वर्षों तक स्टायफंड प्रदान करने के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू करें।

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