इंदौर.
इंदौर में भू-माफियाओं और सरकारी जमीनों के गलत इस्तेमाल के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कलेक्टर शिवम वर्मा (Collector Shivam Verma) ने फैसला सुनाते हुए इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज (Indore Christian College) की करीब 400 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को सरकारी घोषित कर दिया है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि अगले 3 दिनों के भीतर इस जमीन पर कब्जा लेकर इसे शासन के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।
शर्तों का उल्लंघन पड़ा भारी
क्रिश्चन कॉलेज को यह जमीन शैक्षणिक कार्यों के लिए लीज पर दी गई थी। जिला प्रशासन की जांच में सामने आया कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा लीज की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया जा रहा था। कलेक्टर कोर्ट के आदेश के अनुसार, जमीन का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं हो रहा था जिसके लिए इसे आवंटित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
कॉलेज के प्रिंसिपल और प्रबंधन इस बेशकीमती जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल (Commercial Use) करने की योजना बना रहे थे। जब प्रशासन ने इस पर आपत्ति जताई, तो मामला कानूनी गलियारों में पहुंचा। कॉलेज प्रबंधन ने हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन दोनों ही जगहों से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। अदालतों ने भी प्रशासन के पक्ष को सही माना, जिसके बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने अंतिम आदेश पारित किया।
तहसीलदार जूनी इंदौर को 3 दिन का अल्टीमेटम
कलेक्टर के आदेश के बाद तहसीलदार जूनी इंदौर को जमीन का भौतिक कब्जा (Physical Possession) लेने के लिए 3 दिन का समय दिया गया है। 400 करोड़ की इस जमीन का मालिकाना हक अब आधिकारिक तौर पर शासन का होगा। प्रशासन की योजना है कि इस विशाल भूखंड का उपयोग भविष्य में जनहित और शहर के विकास कार्यों के लिए किया जाए।
भूमि शासन में समाहित
सभी तथ्यों, दस्तावेजों एवं कानूनी प्रावधानों के परीक्षण के बाद कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि उक्त भूमि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 158 एवं 182, नजूल निर्वर्तन निर्देश 2020 तथा शासन परिपत्रों के तहत शासकीय भूमि है। फलस्वरूप 138 वर्ष पुरानी साधारण अनुदान (लीज) को निरस्त करते हुए भूमि को शासन हित में समाहित कर दिया गया है।
अग्निबाण के खुलासे के बाद हरकत में आया प्रशासन
- गौरतलब है कि इस पूरे मामले में अग्निबाण की भूमिका अहम रही। अग्निबाण ने पिछले दिनों इस जमीन के हेरफेर को लेकर विस्तृत खुलासा किया था, जिसके बाद प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हुई और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की गई।