कमेटी ने कहा - दिल जीत लिया
छोटी समेल / बेलपना धाम (ब्यावर). खिलौने टूट जाते हैं, कपड़े छोटे हो जाते हैं, सोना-चांदी कहीं गुम हो जाता है, लेकिन एक पिता ने अपनी 4 माह की बेटी को ऐसा तोहफा दिया है जो सदियों तक अमर रहेगा।
छोटी समेल निवासी श्री मोहन सिंह जी देवावत ने अपनी नन्ही लाडली हिमांशी को अपनी कुलदेवी श्री आशापुरा माता मंदिर, बेलपना धाम में शिलालेख के रूप में ऐसा उपहार दिया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
क्या है पिता का अमर तोहफा?
मोहन सिंह जी ने मंदिर निर्माण में सहयोग राशि देकर अपनी 4 माह की दुधमुंही बेटी का नाम मुख्य शिलालेख पर खुदवा दिया। अब जब तक बेलपना धाम रहेगा, जब तक माता की ज्योत जलती रहेगी, तब तक हिमांशी का नाम सुनहरे अक्षरों में चमकता रहेगा।
क्यों है ये खबर खास?
क्योंकि आज तक शिलालेखों पर सिर्फ बेटों और बुजुर्गों के नाम होते थे। पहली बार किसी पिता ने अपनी नन्ही बेटी के नाम का शिलालेख लगवाकर पितृसत्ता की सोच को तोड़ा है।
कमेटी का दिल जीता
इस फैसले को देखकर श्री आशापुरा माता विकास समिति बेहद खुश है। अध्यक्ष दुर्गा सिंह चौहान, संरक्षक एडवोकेट नंदकिशोर सिंह, कोषाध्यक्ष महेंद्र सिंह पीथाखेडा, विवाह समिति अध्यक्ष किशन सिंह खोडमाल , सम्मेलन के व्यवस्थापक भारत लाल भाट, वरिष्ठ संरक्षक किशन सिंह दादा नगर, सदस्य गजेंद्र सिंह रामपुरा, महासचिव मनोहर सिंह R.I. साहब ने कहा यह शिलालेख नहीं, बेटी सम्मान का महाकाव्य है। इस पिता ने सबका दिल जीत लिया।" समिति ने नन्ही हिमांशी के उज्जवल भविष्य के लिए माता रानी से प्रार्थना की है।