इंदौर। पी. नरहरि ने सोमवार, 26 सितंबर को फेसबुक पर पिता से जुड़ी यादें साझा की जिसमें उन्होंने लिखा कि मेरे पिता पी. सत्नारायण 18 सितंबर 2016 को हैदराबाद में कैंसर से लड़ते हुए स्वर्ग सिधार गए। उनका जाना मेरे और मेरे परिवार के लिए अविस्मरणीय है। तेलंगाना के करीम नगर जिले के बसंत नगर गांव में उन्होंने एक टेलर की तरह हमारी जिंदगियों को सिला। उनके पैर सिलाई मशीन की रिदम के संगीत पर बिना रुके चलते रहे। वे आधी रात तक काम करते, जिससे परिवार को खुश रखने के लिए थोड़ा अधिक कमा सकें।
कठिन समय में भी हम सबको लेकर आगे बढ़े। उनके चेहरे पर कभी थकान नहीं दिखी। उन्होंने हमारी आत्माओं को छुआ और हम चुनौतियों का सामना करने के लिए मजबूत बने और विजेता की तरह उभरे। उन्होंने हमें बाहों में भरा और हम सुरक्षित महसूस करते। सर पर हाथ पकड़ा और हम आगे बढ़ गए। पिता कभी नहीं मरते। मैं कुछ नहीं हूं केवल उनका विस्तारित अंश हूं।जन्म लेने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है इसलिए जो अटल है अपरिहार्य है उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिए। वे पिता की तरह मुझमें प्रवेश कर गए हैं। मेरे शब्दों में कार्य और मूल्य जो मैं मेरे बच्चों को देता हूं, वे मौजूद रहते हैं। मैं मेरे परिवार के सदस्यों और दोस्तों का ख्याल रखता हूं, वे मौजूद रहते हैं।
जो दयालुता और करुणा मैं मेरे साथी मनुष्यों के प्रति दिखाता हूं, वे मौजूद रहते हैं। मेरे पिता बे पढ़ाया है ‘समस्या पर कठोर रहो और व्यक्ति पर नर्म रहो’ यह रास्ता है जिसके द्वारा मैं प्रशासन चलाता हूं। उन्होंने जाने से पहले स्मृतियों को सुंदरता से बुना है जिससे कि हम खुशहाली की जिंदगी जी सकें। *साभार- नईदुनिया *
इंदौर कलेक्टर पी नरहरि की पिता को लेकर मार्मिक पोस्ट - पिता कभी मरते नहीं में उनका विस्तारित अंश- पी. नरहरि
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