चीन :
नागरिक मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट पर इसे लेकर कुछ आंकड़े शेयर किए गए हैं। इससे पता चलता है कि पिछले साल केवल 68.3 लाख कपल्स ने अपना विवाह रजिस्ट्रेशन (68.3 lakh couples registered their marriage) कराया। पिछले साल की तुलना में यह संख्या करीब 8 लाख तक कम है।
राजधानी बीजिंग (Capital Beijing) समेत देश के अन्य शहरों में पिछले साल जीरो कोविड पॉलिसी लागू थी। इसके चलते करोड़ों लोग हफ्तों तक अपने घरों में बंद रहे। माना जा रहा है कि विवाहितों की संख्या में आई गिरावट का यह बड़ा कारण हो सकता है। यह खबर ऐसे वक्त सामने आई है जब चीन पहले से ही घटती जन्म दर और गिरती जनसंख्या का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का माननाहै कि 2022 में चीन की आबादी में छह दशक बाद पहली बार गिरावट देखी गई। यह गिरावट की लंबी अवधि की शुरुआत हो सकती है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था और दुनिया पर असर पड़ सकता है।
चीन में जन्म दर पिछले साल गिरकर प्रति 1,000 लोगों पर 6.77 बर्थ पर आ गई, जो 2021 में 7.52 से भी कम है। इसका मतलब यह है कि चीन अमीर होने से पहले बूढ़ा हो सकता है। दरअसल, देश में कार्यबल सिकुड़ रहा है और स्थानीय सरकारों को बुजुर्ग आबादी पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है। पिछले महीने ही विवाह को प्रोत्साहित करने और जन्म दर को बढ़ावा देने को लेकर पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया। इसका मकसद चीन के 20 से अधिक शहरों में विवाह और बच्चे पैदा करने की संस्कृति को बढ़ावा देना है। देश के कुछ हिस्सों में नवविवाहितों को विवाह अवकाश के दौरान भी सैलरी दी जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, भारत की आबादी बढ़कर 142.86 करोड़ हो गई है। चीन को पीछे छोड़ भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व जनसंख्या ‘डैशबोर्ड’ (मंच) के अनुसार, चीन की आबादी 142.57 करोड़ है। भारत की 25 प्रतिशत जनसंख्या 0-14 (वर्ष) आयु वर्ग की, 18 प्रतिशत 10 से 19 आयु वर्ग, 26 प्रतिशत 10 से 24 आयु वर्ग, 68 प्रतिशत 15 से 64 आयु वर्ग की और 7 प्रतिशत आबादी 65 वर्ष से अधिक आयु की है। विभिन्न एजेंसियों के अनुसार, भारत की आबादी करीब 3 दशकों तक बढ़ते रहने की उम्मीद है। यह 165 करोड़ पर पहुंचने के बाद ही घटना शुरू होगी।