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दो दिन में निकला ‘विकल्प’ का महिला दिवस विशेषांक : एक सीख, एक अनुभव

भोपाल Published by: Nevedhaya Purohit Updated Fri, 13 Mar 2026 02:05 AM
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Nevedhaya Purohit

भोपाल. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (Makhanlal Chaturvedi University) भोपाल के पत्रकारिता विभाग के प्रायोगिक समाचार पत्र ‘विकल्प’ के अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक का औपचारिक विमोचन माननीय कुलगुरु Vijay Manohar Tiwari सर ने विभाग में आकर P Sasikala Ravichandran  मैम के साथ किया। विभागाध्यक्ष Rakhi Tiwari मैम ने विशेषांक की प्रस्तावना और उसकी पृष्ठभूमि रखी।

इस विशेषांक की खास बात यह रही कि महज़ दो दिनों में यह 8 पन्नों का पूरा अख़बार तैयार किया गया है। विषय चयन से लेकर लेखन संपादन और लेआउट तक। पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए यह एक वास्तविक न्यूज़रूम अनुभव जैसा था, जहाँ समय कम और जिम्मेदारी बड़ी थी।

इस अंक में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल करने वाली सात प्रेरणादायी महिलाओं की कहानियाँ उनकी अपनी जुबानी प्रस्तुत की गई हैं। इन कहानियों को मैंने, भूमि सिंह, तोषी गुप्ता, अनन्या तिवारी और सृष्टि सक्सेना ने संकलित किया है। भारत की प्रथम महिलाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी का संकलन छवि बाथम ने किया। लेआउट का पूरा जिम्मा संदीप सिंह ठाकुर एवं सौम्या वारदे ने संभाला, जबकि संपादन का कार्य हमारे एडजंक्ट प्रोफेसर Shivkumar Vivek सर एवं अतिथि प्राध्यापक विनय सर ने किया।

दरअसल, इस विशेषांक के लिए कुछ सामग्री हमने पहले से बैकअप के तौर पर ले रखी थी। हाल ही में सीहोर में आयोजित Shivna Prakashan द्वारा शिवना साहित्य समागम के दौरान कई प्रतिष्ठित महिला रचनाकारों से बातचीत का अवसर मिला था। वहीं पर रेडियो सखी Mamta Singh जी से मेरा और Manisha Kulshreshtha जी, Anulata Raj Nair जी से मेरी सहपाठी भूमि सिंह का विस्तृत संवाद हुआ था, जिसकी रिपोर्ट हमने पहले ही तैयार कर ली थी।

समय की कमी के बीच एक दिलचस्प स्थिति भी आई। क्योंकि पूरे अंक में रिपोर्टिंग लगभग पूरी तरह छात्राओं ने की थी और मैं एकमात्र पुरुष रिपोर्टर था, इसलिए सुझाव आया था कि मैं अपनी स्टोरी किसी छात्रा के नाम से प्रकाशित करने के लिए अनुमति दे दूं। लेकिन पत्रकारिता में बाइलाइन का महत्व मेरे लिए बहुत बड़ा है, इसलिए मैंने विनम्रता से मना किया और प्रस्ताव रखा कि यदि ज़रूरत हो तो मैं एक और स्टोरी कर सकता हूँ। क्योंकि कुछ दिन पहले ही मैंने पद्मश्री जनक पलटा दीदी (JanakandJimmy McGilligan) से इंटरव्यू के लिए बात कर रखी थी। मुझे आदेश मिला कि मैं पद्मश्री जनक दीदी वाला इंटरव्यू किसी छात्रा के साथ लाइनअप करवा दूं। अंततः उस विषय पर रिपोर्टिंग मेरी जूनियर सृष्टि सक्सेना (Srashti Saxena) ने की।

प्रकाशन से ठीक पहले एक छोटी सी तथ्यात्मक त्रुटि भी सामने आई थी। जब पीडीएफ हम छात्रों तक पहुंची तब रेडियो सखी ममता सिंह जी के जन्मस्थान को लेकर मेरे मित्र प्रशांत सिंह (Prashant Singh) ने इस पर ध्यान दिलाया। मैंने तुरंत विभागाध्यक्ष को सूचित किया और बताया कि मेरे द्वारा भेजी गई मूल प्रति में जन्मस्थान असम ही लिखा गया था, न कि इलाहाबाद। इसी बीच फोटो से जुड़ी भी एक और त्रुटि की जानकारी मिली।

पत्रकारिता में सबसे महत्वपूर्ण चीज तथ्य की शुद्धता होती है। विभाग ने तुरंत उस पीडीएफ को हटाकर गलती को ठीक किया और सही संस्करण तैयार किया। यह पूरी प्रक्रिया हमारे लिए एक बड़ी सीख भी रही कि न्यूज़रूम में सतर्कता और तथ्य-जांच कितनी जरूरी है। आज जब इस विशेषांक का आधिकारिक विमोचन हुआ तो हमारी पूरी टीम के लिए यह गर्व और खुशी का क्षण था।

इस अवसर पर मैं विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहूँगा, लेआउट तैयार करने वाले एनएमटी विभाग के संदीप और मेरी सहपाठी सौम्या का साथ ही मार्गदर्शन के लिए विनय श्री नेमा सर, शिवकुमार विवेक सर, विभागाध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी मैम, कुलसचिव डॉ. पी. शशिकला मैम और कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी सर का, मुझे आशा है कि आगे भी हम इसी तरह समय-समय पर ‘विकल्प’ के विशेषांक निकालते रहेंगे और पत्रकारिता के इस अभ्यास को और बेहतर बनाते रहेंगे।

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