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घमंड चूर-चूर वैईग्यों : राजेन्द्र सनाढ्य राजन

आपकी कलम Published by: paliwalwani Updated Fri, 16 Jan 2026 11:33 PM
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घमंड चूर-चूर वैईग्यों

एक लगाई सूबे-सूबे, 

गोदड़ी ने जोर ऊँ पटकी, 

अबाणु जमाई न मेली, 

पाछी परी लटकी। 

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गोदड़ी बोली धीरे मेल, 

घमंड कणी पे करे हैं, 

थूँ जिने अतरो चावें,

वो जादा म्हारा पे मरे हैं। 

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थूँ कतरोई सणंगार करी ले, 

वंडों भोजन ऊँ पेट भरी ले, 

ठंड लागताई न म्हारे पा आवें, 

थूँ कतराई मंतर फेरी ले। 

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कतरा परेम ऊँ म्हनें वो, 

आकी रात लपाई राखें, 

सूबे तक नी छोड़े म्हनें, 

थूँईस सूबे पाणी फाँके।

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म्हारों रंग रूप हाऊँ नी हैं, 

भली क ई काम नी कीदो, 

म्हारा मा अतरा गुण तो हैं, 

वंडे हिवड़ा ने जीती लीदो।

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पूछी लिजे थारा धणी ने, 

अबाणु किने जादा चावें, 

एक दन भी म्हूँ नी मली, 

तो वो वेन्डों वैई जावें। 

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थारा मा न म्हारा मा वेन्डी, 

ओईस तो हैं अंतर, 

म्हारा मा हवारथ नी हैं, 

थूँ हवारथ रो भर्यों कनस्तर। 

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राजन आ हुणताई न लगाई रा, 

हाथ-पग ठंडा वैईग्यां,

घमंड चूर-चूर वैईग्यों, 

मुंडा रा बोल मुंडा मी रैईग्यां। 

मुंडा रा बोल मुंडा मी रैईग्यां।। 

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राजेन्द्र सनाढ्य राजन

वाइस प्रिंसिपल-रा उ मा वि नमाना

नि-कोठारिया, जि-राजसमंद, राजस्थान

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