विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन
मध्यप्रदेश की राजनीति में विकास, दृष्टि और जनहित की बात जब भी होती है, तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम प्रमुखता से सामने आता है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जिस तरह से औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी, वह आज भी एक मानक के रूप में देखा जाता है। विशेष रूप से छिंदवाड़ा जैसे क्षेत्र, जो कभी विकास की मुख्यधारा से दूर माना जाता था, उसे उन्होंने अपने विजन और कार्यशैली से एक नई पहचान दिलाने का प्रयास किया।
कमलनाथ का राजनीतिक जीवन केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने हमेशा विकास को केंद्र में रखकर निर्णय लिए। जब वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तब उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि उनका मुख्य उद्देश्य राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है। इसी सोच के तहत उन्होंने उद्योगों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। छिंदवाड़ा, जो उनका गृह क्षेत्र है, वहां उन्होंने कई ऐसे कदम उठाए जो न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए लाभकारी साबित हो सकते थे।
छिंदवाड़ा में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कमलनाथ ने कई महत्वपूर्ण पहल कीं। इनमें से एक प्रमुख निर्णय था परासिया क्षेत्र के डोमरी ग्राम में 118 एकड़ जमीन को उद्योग विस्तार के लिए आवंटित करना। यह कदम केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक व्यापक दृष्टिकोण था- स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना, क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और निवेशकों को आकर्षित करना। इस प्रकार की योजनाएं किसी भी राज्य के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होती हैं।
कमलनाथ द्वारा उद्योग विस्तार के लिए स्वीकृत की गई 118 एकड़ जमीन को वर्तमान सरकार द्वारा वापस ले लिया गया। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रक्रिया का संकेत है जिसमें पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं को निरंतरता नहीं मिल पा रही है। इससे न केवल निवेशकों का भरोसा प्रभावित होता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावनाएं भी कमजोर पड़ती हैं।
राजनीति में विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन विकास के मुद्दों पर निरंतरता बनाए रखना किसी भी जिम्मेदार सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। कमलनाथ ने जिस सोच के साथ उद्योगों के विस्तार की दिशा में कदम उठाए थे, वह केवल एक क्षेत्र विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे राज्य के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण था। ऐसे में उन योजनाओं को रोकना या समाप्त करना कहीं न कहीं विकास की गति को प्रभावित करता है।
छिंदवाड़ा के संदर्भ में देखें तो यह क्षेत्र कमलनाथ के नेतृत्व में एक मॉडल के रूप में विकसित हो रहा था। यहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली। उन्होंने यह साबित किया कि यदि नेतृत्व में स्पष्ट दृष्टि और इच्छाशक्ति हो, तो किसी भी क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है। डोमरी ग्राम में उद्योग विस्तार के लिए जमीन आवंटित करना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जो भविष्य में हजारों युवाओं के लिए रोजगार का माध्यम बन सकता था।
आज जब उस निर्णय को वापस लिया गया है, तो यह केवल एक परियोजना का रुकना नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी उम्मीदों का भी प्रभावित होना है। स्थानीय जनता, जो रोजगार और विकास की उम्मीद कर रही थी, वह कहीं न कहीं निराश होती है। इसके साथ ही निवेशकों के बीच भी यह संदेश जाता है कि नीतियों में स्थिरता की कमी है, जो किसी भी राज्य के लिए सकारात्मक संकेत नहीं है।
कमलनाथ की राजनीति का मूल आधार हमेशा विकास और जनकल्याण रहा है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का उपयोग प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए किया। उनकी नीतियों में दूरदर्शिता, भविष्य की जरूरत झलकती है और यही कारण है कि उनके द्वारा लिए गए निर्णय आज भी प्रासंगिक हैं।
इसके विपरीत, यदि विकास योजनाओं को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाएगा और उन्हें केवल इसलिए रोका जाएगा क्योंकि वे किसी अन्य दल की सरकार द्वारा शुरू की गई थीं, तो इससे अंततः नुकसान जनता को ही होगा। छोटी मानसिकता वाली राजनीति न केवल स्थानीय विकास को बाधित करती है, बल्कि राज्य की समग्र प्रगति को भी प्रभावित करती है।
मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य के लिए यह आवश्यक है कि विकास की योजनाओं में निरंतरता बनी रहे। चाहे सरकार किसी भी दल की हो, यदि कोई योजना जनहित में है और उससे प्रदेश को लाभ मिल सकता है, तो उसे आगे बढ़ाना चाहिए।
कमलनाथ की कार्यशैली की विशेषता यह रही कि उन्होंने केवल घोषणाओं तक अपने कार्य को सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने का भी प्रयास किया। उन्होंने उद्योगपतियों से संवाद स्थापित किया, निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में काम किया।
यही कारण था कि उनके कार्यकाल के दौरान मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाएं बढ़ने लगी थीं और उद्योगों के प्रति एक सकारात्मक माहौल बन रहा था। हालांकि, यह दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि उनकी सरकार केवल 18 महीनों तक ही चल पाई। इसके बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी और वर्तमान में मोहन यादव मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं।