जीवन की नैया को पार उतारने व जीवन संग्राम पर विजय दिलाने का ग्रंथ है श्रीमदभगवद्गीता : संतोष दीदी
उदयपुर. 10 ऑक्टोम्बर
गीता परिवार उदयपुर द्वारा पितृ विसर्जनी अमावस्या पर आज शनिवार को प्रतिदिन की भाँति गीता साधकों द्वारा ओन लाइन 5 अध्यायों का वाचन किया गया एवं इसके बाद श्रीराम और केवट के प्रसंग का उल्लेख करते हुए संतोष दीदी ने बताया.कि भगवान के संबंध में किया गया हमारा संकल्प यदि प्रबल होता है तो वह संकल्प पूर्ण करने का दायित्व भगवान का हो जाता है।
भगवद्गीता की उत्पत्ति का प्रसंग बताते हुए संतोष दीदी ने पालीवाल वाणी को बताया कुरुक्षेत्र की रणभूमि में युद्ध आरंभ होने से पूर्व अर्जुन ने दुर्गम संकट से पार कराने वाली मां दुर्गा देवी की स्तुति कर विजय का वरदान प्राप्त किया था। नवरात्रि शक्ति की आराधना का पर्व है। हम भी अपने जीवन समरांगण में गीताजी के सिद्धांतों को अपना कर विजयी होकर अपनी शक्ति व सामर्थ्य बढ़ा कर सकते हैं।
परशुराम चौराहे के नजदीक अपना घर गोशाला मे गीता साधकों द्वारा ऑफ लाइन सम्पूर्ण गीता जी के 18 ही अध्यायों का वाचन कर "गो ग्रास एवं लापसी सेवा" के साथ तर्पण अनुष्ठान कार्यक्रम को विराम दिया गया। उक्त जानकारी गीता साधक विष्णु शंकर पालीवाल ने दी!
गीता साधक, गीता परिवार उदयपुर, मोबाईल नम्बर- 7976289944 (W)
ई मेल आई डी-- vishnuspaliwal@gmail.com
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