पितृ पक्ष में चतुर्दशी श्राद्ध पर श्रद्धा से साधना और साधना से सफलता की महिमा के साथ ओन लाइन श्रीमदभगवद्गीता के पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान का चोदहवा दिन संपन्न
उदयपुर. 9 ऑक्टोम्बर 2026, परम पूज्य स्वामी श्री गोविन्द गिरी महाराज की प्रेरणा से संचालित गीता परिवार उदयपुर द्वारा पितृ पक्ष में चतुर्दशी श्राद्ध पर आज 9/10/2026 शुक्रवार 14 वे दिन भी गीता व्रती संतोष दीदी के सानिध्य में आरंभिक प्रार्थना डॉक्टर पूर्णिमा व्यास द्वारा की गई और गीता जी के सांख्ययोग, ज्ञानविज्ञानयोग, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग, पुरुषोत्तमयोग एवं मोक्षसंन्यासयोग का वाचन क्रमशः लक्ष्मण कुँवर,गिरधारी लाल बारहठ, सूर्य कांता कचोरिया, उषा अशावा एवं संयुक्त रूप से शालिनी कपूर एवं डॉक्टर पूर्णिमा व्यास द्वारा किया गया! इनके अलावा प्रतिदिन की भाँति अन्य साधक भी गीता पाठ एवं तर्पण मे शामिल थे।
पितृ तर्पण अनुष्ठान यज्ञ में यमराज और विज्ञपुरुष गौतम ऋषि का ऐतिहासिक प्रसंग बताते हुए गीताव्रती संतोष दीदी ने बताया कि एक समय महर्षि गौतम यमराज से पूछते हैं कि मनुष्य कौन सा कर्म करके माता-पिता के ऋण से उऋण हो सकता है तब यमराज अपने उत्तर में कहते हैं पहला मनुष्य तप का आचरण करें, दूसरा बाहर भीतर से पवित्र रहे, तीसरा सदा सत्य भाषण रूप धर्म का पालन करता रहे, चौथा माता-पिता की सेवा पूजा में तत्पर रहे और पांचवा सात्विक दान के प्रवृत्ति को अपनाने वाला, मनुष्य स्वर्ग लोक में जाता है।
जिसका संपूर्ण जीवन साधनामय, साकार व सफलता की दिशा में अभिप्रेत हो जाता है तब अतःकरण में ये भावना की दृढ़ता तप,संयम व सत्य के रूप में भाषित होती है। ब्रह्मा, पुलस्त्य, वशिष्ठ, पुलह, अंगिरा, क्रतु और महर्षि कश्यप यह सात महर्षि महान योगेश्वर और पितर माने गए हैं। अपने पितरों की सेवा और आशीर्वाद से मनुष्य को पुष्टि, आयु ,वीर्य और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है।
उन्होंने सभी नगरवासियों को आह्वान कर बताया कि कल, दिनाँक 10 ऑक्टोम्बर 2026 को पितृ विसजर्नी अमावस्या के महालय श्राद्ध पर "गीता परिवार उदयपुर" की ओर से 40 वा संपूर्ण गीता पारायण दोपहर 3:00 से 6:00 बजे तक अपना घर गौशाला, परशुराम चौराहे के नजदीक आयोजित होगा, जिसमें सभी नगरवासी सहभागिता कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में, श्रीमद्भगवद्गीता की आरती अंजू सोनी नें गाई और गीताव्रती संतोष दीदी ने क्षमा प्रार्थना एवं पूर्णता मंत्र से अनुष्ठान को विराम दिया। उक्त जानकारी गीता साधक विष्णु शंकर पालीवाल ने दी। आनलाईन गीता जी पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान से जुड़ने का समय:- प्रतिदिन प्रातः 11:30 बजे से 12:30 बजे तक
ऑनलाइन जुड़ने हेतु लिंक : https://meet.google.com/drr-wzbw-xzu
13 वे दिन भी गीता व्रती संतोष दीदी के सानिध्य में आरंभिक प्रार्थना डॉक्टर पूर्णिमा व्यास द्वारा श्रीमदभगवद्गीता के पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान का तेरहवा दिन संपन्न
उदयपुर. 8 ऑक्टोम्बर 2026, परम पूज्य स्वामी श्री गोविन्द गिरी महाराज की प्रेरणा से संचालित गीता परिवार उदयपुर द्वारा पितृ पक्ष में त्रयोदशी श्राद्ध पर आज 8/10/2026 गुरुवार 13 वे दिन भी गीता व्रती संतोष दीदी के सानिध्य में आरंभिक प्रार्थना डॉक्टर पूर्णिमा व्यास द्वारा की गई और गीता जी के सांख्ययोग, ज्ञानविज्ञानयोग, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग, पुरुषोत्तमयोग एवं मोक्षसंन्यासयोग का वाचन क्रमशःकिशोर पाहुजा, ) रमा श्रीमाली, सीमा कुमावत, मंजू वैष्णव एवं विष्णु शंकर पालीवाल द्वारा किया गया! इनके अलावा प्रतिदिन की भाँति अन्य साधक भी गीता पाठ एवं तर्पण मे शामिल थे।
तत्पश्चात् स्वामी जी की परम शिष्या गीताव्रती संतोष दीदी ने बताया कि गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु और गरुड़ जी के संवाद के माध्यम से मृत्यु के बाद जीव की गति और उसके कर्मों के फल का वर्णन मिलता है। यमपुरी के चार द्वारों का वर्णन करते हुए यह संदेश दिया गया है कि जीव की आगे की गति उसके कर्मों और आचरण से जुड़ी होती है। इसलिए मनुष्य को ब्रह्मयज्ञ के रूप में स्वाध्याय तथा मनुष्ययज्ञ के रूप में अतिथि-सत्कार करते हुए सदैव पुण्य कर्मों में प्रवृत्त रहना चाहिए।
उन्होंने ये भी कहा कि देवताओं के साथ हमारा श्रद्धा का संबंध है परंतु पितरों के साथ हमारा डीएनए का संबंध है उन्हीं के वंश परंपरा में जन्म लेकर आए हुए हम लोग उनके प्रति कृतार्थ होकर ही पितृ ऋण से मुक्त हो सकते हैं।मानव जीवन में ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, भूतयज्ञ,पितृ यज्ञ और मनुष्य यज्ञ की अपार महिमा है । इन यज्ञों का अनुष्ठान किए बिना मानवजीवन सफल नहीं होता है। आतुरकाल यानि अंत समय में महाविष्णु के अवतारो के नाम का स्मरण, गीताजी का पाठ, श्रीविष्णुसहस्त्रनामस्तोत्र का कीर्तन ,एकादशी का व्रत, गंगाजल, तुलसी दल प्रत्येक प्राणी को मुक्ति देने वाले हैं।
उन्होंने आगे बताया कि गीता परिवार उदयपुर द्वारा गीतापाठ प्रतिदिन पूरे श्राद्ध पक्ष में भगवदगीता जी के दूसरे, सातवें, तेरहवे, पंद्रहवे एवं अठारवे अध्यायों का पाठ प्रतिदिन करके पितृतर्पण किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में, श्रीमद्भगवद्गीता की आरती गिरधारी लाल बारहठ नें गाई और गीताव्रती संतोष दीदी ने क्षमा प्रार्थना एवं पूर्णता मंत्र से अनुष्ठान को विराम दिया। उक्त जानकारी गीता साधक विष्णु शंकर पालीवाल ने दी।
श्रीमदभगवद्गीता के पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान का बारहवा दिन संपन्न
उदयपुर. 7 ऑक्टोम्बर 2026, परम पूज्य स्वामी श्री गोविन्द गिरी महाराज की प्रेरणा से संचालित गीता परिवार उदयपुर द्वारा पितृ पक्ष में द्वादशी श्राद्ध पर आज 7/10/2026 बुधवार 12 वे दिन भी गीता व्रती संतोष दीदी के सानिध्य में आरंभिक प्रार्थना स्वयं उनके द्वारा की गई और गीता जी के सांख्ययोग, ज्ञानविज्ञानयोग, क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग, पुरुषोत्तमयोग एवं मोक्षसंन्यासयोग का वाचन क्रमशः शालिनी कपूर ,देवेन्द्र श्रीमाली, लक्ष्मी नारायण दशोरा, दिनेश श्रीमाली पश्चात् लक्ष्मी नारायण दशोरा एवं सत्यनारायण शर्मा द्वारा किया गया! इनके अलावा प्रतिदिन की भाँति अन्य साधक भी गीता पाठ एवं तर्पण मे शामिल थे।
तत्पश्चात् स्वामी जी की परम शिष्या गीताव्रती संतोष दीदी ने जटायू ओर संपाति का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रामायण काल में स्वयं भगवान श्री राम ने जटायु का अंतिम संस्कार कर उन्हें साकेत लोक में भेजा और संपाति ने वानर सेना को सीता मां का पता बता कर अपने भाई जटायू को जलांजलि प्रदान कर स्नान तर्पण किया ऐसा वर्णन आता है। शास्त्र में बतलाया गया है कि किसी भी जीवयोनि में होने पर प्रत्येक का स्वभाव तीन बातों से प्रभावित होते हैं पहला प्रारब्ध दूसरा किस वंश में जन्म हुआ है एवं तीसरा परवरिश के लिए कैसा वातावरण का प्रभाव रहा।
गिद्ध पक्षीयोनि में होने पर भी संपाति ने अपने भाव का समर्पण भाई के निमित्त किया तो हम तो ईश्वर प्रदत्त सर्वश्रेष्ठ योनि रूप मे मनुष्य हे, इस पर विचार करने की जरूरत है कि हम श्राद्ध कर्म को श्रद्धा से करते हैं या नहीं। उन्होंने आगे बताया कि इसीलिये गीता परिवार उदयपुर द्वारा गीतापाठ की पूर्णाहुति ईश्वर शरणागति ही है। इसी उद्देश्य से प्रतिदिन पूरे श्राद्ध पक्ष में भगवद्गीता जी के दूसरे, सातवें, तेरहवे, पंद्रहवे एवं अठारवे अध्यायों का पाठ प्रतिदिन करके पितृतर्पण किया जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में, श्रीमद्भगवद्गीता की आरती टीना राजपूत नें गाई और गीताव्रती संतोष दीदी ने क्षमा प्रार्थना एवं पूर्णता मंत्र से अनुष्ठान को विराम दिया। उक्त जानकारी गीता साधक विष्णु शंकर पालीवाल ने दी।
ग्यारहवाँ दिन संपन्न : मृत्युलोक में पांचभौतिक पृथ्वी प्रधान शरीर होता है व पितृलोक में वायु प्रधान सूक्ष्म शरीर की प्राप्ति होती
उदयपुर. 6 ऑक्टोम्बर 2026, परम पूज्य स्वामी श्री गोविन्द गिरी महाराज की प्रेरणा से संचालित गीता परिवार उदयपुर द्वारा पितृ पक्ष इन्द्रा एकादशी श्राद्ध पर आज 6/10/2026 मंगलवार को 11 वे दिन भी गीता व्रती संतोष दीदी के सानिध्य में आरंभिक प्रार्थना अरविंद जोशी द्वारा की गई एवं गीता जी के सांख्ययोग,ज्ञानविज्ञानयोग, क्षेत्रज्ञ विभागयोग, पुरुषोत्तम योग एवं मोक्ष संन्यासयोग का वाचन क्रमशः डॉक्टर पूर्णिमा व्यास, गिरधारी लाल बारहठ, लक्ष्मण कुंवर, लक्ष्मीनारायण दशोरा, सूर्यकांता कचोरिया द्वारा किया गया! इनके अलावा प्रतिदिन की भाँति अन्य साधक भी गीता पाठ एवं तर्पण मे शामिल थे।
तत्पश्चात् स्वामी जी की परम शिष्या गीताव्रती संतोष दीदी नें अपने उद्बोधन मे कहा कि मृत्युलोक में पांचभौतिक पृथ्वी प्रधान शरीर होता है व पितृलोक में वायु प्रधान सूक्ष्म शरीर की प्राप्ति होती है।
इसी अवसर पर संयोजक सम्पत लाल माहेश्वरी ने कहा कि पितरों की कृपा उनके प्रति श्रद्धा ओर उनके कल्याण के लिए किए आचरण में छिपी है। इस सन्दर्भ में उन्होंने स्वयं द्वारा अनुभव की गई सच्ची घटनाओ को भी बताया और पितरों के तर्पण की दृष्टी से हरिद्वार मे गंगा घाट पर हर की पौढी सर्वोत्तम हे।उन्होंने ये भी कहा कि समस्त गीता साधकों द्वारा पितृविसर्जनी अमावस्या को दिन में अपना घर गौशाला में सम्पूर्ण भगवदगीता का पारायण किया जाएगा और इसी दिन यही प्रात: "हिन्द सेवा मानव कल्याण ट्रस्ट उदयपुर!" द्वारा निःशुल्क तर्पण का आयोजन किया जा रहा है अतः कोई साधक अपने पितरों को तर्पण देना चाहे तो वो भी सम्मिलित हो सकता है एवं आश्वस्त किया कि इस सम्बंध में और भी जानकारी प्राप्त होगी तो ग्रुप में साझा कर दी जायेगी!
कार्यक्रम के अंत में, श्रीमद्भगवद्गीता की आरती कुसुम व्यास नें गाई और गीताव्रती संतोष दीदी ने क्षमा प्रार्थना एवं पूर्णता मंत्र से अनुष्ठान को विराम दिया। उक्त जानकारी गीता साधक विष्णु शंकर पालीवाल ने दी।
"पितृ पक्ष में दशमी श्राद्ध पर नचिकेता की आत्मतत्त्व जिज्ञासा और श्रेयस-प्रेयस के विवेक के ज्ञान की जिज्ञासा के साथ गीता पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान का दशमा दिन संपन्न
तत्पश्चात् स्वामी जी की परम शिष्या गीताव्रती संतोष दीदी नें अपने उद्बोधन मे कहा कि कठोपनिषद में नचिकेता और यमराज के मध्य हुए आत्मतत्त्व के संवाद को समझना आवश्यक है क्योंकि मानव जीवन में श्रेयस और प्रेयस के बीच विवेकपूर्ण निर्णय अत्यंत आवश्यक है। तर्क, कुतर्क और वितर्क से आत्मतत्त्व के यथार्थ स्वरूप को सहजता से नहीं जाना जा सकता।
जीवात्मा अल्पज्ञ होने के कारण छाया के समान है, जबकि परमात्मा पूर्ण प्रकाश और सर्वज्ञ स्वरूप हैं। मनुष्य की वही बुद्धि कल्याणकारी है, जो विवेकपूर्वक कर्तव्य-अकर्तव्य का भेद समझकर सत्य के मार्ग पर चलती है। नचिकेता की जिज्ञासा हमें आत्मज्ञान, पुनर्जन्म और जीवन के वास्तविक उद्देश्य पर चिंतन करने की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम के अंत में, गीताव्रती संतोष दीदी ने क्षमा प्रार्थना की ओर इन्हीं के सानिध्य मे श्रीमद्भगवद्गीता की आरती डॉक्टर पूर्णिमा व्यास नें गाई और संपत लाल माहेश्वरी ने पूर्णता मंत्र से अनुष्ठान को विराम दिया। उक्त जानकारी विष्णु शंकर पालीवाल ने दी।
"पितृ पक्ष में नवमी श्राद्ध पर नचिकेता की सत्यनिष्ठा और यमराज से आत्मतत्त्व के ज्ञान की जिज्ञासा के साथ गीता पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान का नवमा दिन सम्पन्न!"
उदयपुर 4 ऑक्टोम्बर 2026, परम पूज्य स्वामी श्री गोविन्द गिरी महाराज की प्रेरणा से संचालित गीता परिवार उदयपुर द्वारा पितृ पक्ष में नवमी के श्राद्ध पर आज 4/10/2026 रविवार को नवे दिन भी गीता व्रती संतोष दीदी के सानिध्य में आरंभिक प्रार्थना सम्पत लाल माहेश्वरी के द्वारा गई एवं प्रतिदिन की भाँति ओन लाइन गीता जी के पाँच अध्यायों का क्रमश: अध्याय 2 — सांख्ययोग -सत्यनारायण शर्मा ,अध्याय 7 — ज्ञानविज्ञानयोग - शालिनी कपूर , अध्याय 13 — क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग - डॉक्टर पूर्णिमा व्यास , अध्याय 15 — पुरुषोत्तमयोग का अरविंद जोशी एवं अध्याय 18 — मोक्षसंन्यासयोग का वाचन देवेंद्र श्रीमाली द्वारा किया गया। इनके अलावा अन्य साधक भी गीता पाठ एवं तर्पण मे शामिल थे।
तत्पश्चात् स्वामी जी की परम शिष्या गीताव्रती संतोष दीदी नें नचिकेता की सत्यनिष्ठा और यमराज से आत्मतत्त्व के ज्ञान की जिज्ञासा के संदर्भ में बताया कि नचिकेता बाल्यावस्था में ही अत्यंत सत्यनिष्ठ और जिज्ञासु थे। उनके पिता वाजश्रवस ने यज्ञ में अपना सर्वस्व दान करने का संकल्प लिया। नचिकेता ने बार-बार पूछा—“पिताजी, मुझे किसे देंगे?” क्रोधित होकर पिता ने कहा—“तुझे मृत्यु को देता हूँ।”
पिता के वचन को सत्य मानकर नचिकेता यमलोक पहुँचे और तीन रातें यमराज की प्रतीक्षा में रहे। प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें तीन वरदान दिए। प्रथम—पिता का क्रोध शांत हो और वे प्रेमपूर्वक उन्हें स्वीकार करें। द्वितीय—स्वर्गप्रद नचिकेता अग्नि का ज्ञान। तृतीय—मृत्यु के बाद आत्मा की वास्तविक गति और अमरत्व का रहस्य। यमराज ने अनेक सांसारिक प्रलोभन दिए, पर नचिकेता अपने प्रश्न पर अडिग रहे। उक्त प्रसंग मुख्यतः कठोपनिषद् का है और वे यमराज के लोक/गृह तक पहुँचे और यमराज से प्रत्यक्ष संवाद हुआ।
कार्यक्रम के अंत में संतोष दीदी ने पूर्णाहुति, क्षमा प्रार्थना के साथ पूर्णता मंत्र से अपने शब्दों को विराम देते हुवे सभी साधकों का आभार व्यक्त किया और संयोजक सम्पत लाल माहेश्वरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उक्त जानकारी विष्णु शंकर पालीवाल ने दी।
ओन लाइन गीता जी पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान से जुड़ने का समय:- प्रतिदिन प्रातः 11:30 बजे से 12:30 बजे तक
संपर्क सूत्र : 8949902361
ऑनलाइन जुड़ने हेतु लिंक : https://meet.google.com/drr-wzbw-xzu
समाचार प्रेषक : विष्णु शंकर पालीवाल
गीता साधक, गीता परिवार उदयपुर : मोबाईल नम्बर- 7976289944 (W)
"पितृ पक्ष में षष्ठी श्राद्ध पर मातृगया जी की महिमा के साथ गीता पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान का छठवा दिन
उदयपुर. 1 ऑक्टोम्बर 2026, राम मंदिर अयोध्या के महासचिव परम पूज्य स्वामी श्री गोविन्द गिरी महाराज की प्रेरणा से संचालित गीता परिवार उदयपुर द्वारा पितृ पक्ष में षष्ठी के श्राद्ध पर आज 1/10/2026 गुरुवार को छठवे दिन भी ओन लाइन गीता जी के पाँच अध्यायों का वाचन गीता व्रती संतोष दीदी के सानिध्य में क्रमश: अध्याय 2-सांख्ययोग का वाचन सूर्यकांता कचौरिया, अध्याय 7-ज्ञानविज्ञानयोग का सत्यनारायण शर्मा, अध्याय 13-क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग का गीता व्रती संतोषदीदी, अध्याय 15-पुरुषोत्तमयोग का शालिनी कपूर एवं अध्याय 18 -मोक्षसंन्यासयोग का वाचन विष्णु शंकर पालीवाल द्वारा किया गया। इनके अलावा 24 साधक गीता पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान मे शामिल थे।
पूर्ववत उक्त 5 अध्यायों के वाचन के बाद स्वामी जी की परम शिष्या गीताव्रती संतोष दीदी नें मातृगया के आध्यात्मिक महिमा पर विस्तृत रूप से अपने व्याख्यान मे कहा कि गुजरात के सिद्धपुर स्थित पवित्र बिंदु सरोवर को मातृश्राद्ध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जैसे पितृश्राद्ध के लिए गया का विशेष महत्व है, वैसे ही मातृपक्ष के पूर्वजों के श्राद्ध एवं तर्पण के लिए सिद्धपुर की मातृगया का विशेष स्थान है। इसी क्षेत्र को भगवान कपिल की तपोभूमि और माता देवहूति से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि भगवान परशुराम ने भी बिंदु सरोवर में अपनी माता के निमित्त मातृश्राद्ध किया था। इसलिए श्राद्ध पक्ष में यहाँ पिंडदान, तर्पण एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना जाता है। श्री मद भगवद्गीता जी की आरती दिनेश श्री माली ने की।
कार्यक्रम के अंत में संतोष दीदी ने पूर्णाहुति एवं क्षमा प्रार्थना की और सभी साधकों का आभार व्यक्त किया एवं संयोजक सम्पत लाल माहेश्वरी ने अधिक से अधिक गीता साधकों को इस ओन लाइन गीता जी पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान से जुड़ने का आह्वान किया।
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पितृ पक्ष में संयुक्त चतुर्थी-पंचमी श्राद्ध पर गया जी के महात्म्य के साथ गीता पाठ एवं तर्पण अनुष्ठान का पांचवां दिन संपन्न