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अमेरिका-ईरान के बीच 2029 तक संघर्ष का खतरा: IAEA की रिपोर्ट से ईरान के परमाणु ठिकानों पर बढ़ी चिंता

📅 12 September 2026, 11:42 AM ✍️ Paliwalwani ⏱️ 3 मिनट में पढ़ें
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अमेरिका-ईरान के बीच 2029 तक संघर्ष का खतरा: IAEA की रिपोर्ट से ईरान के परमाणु ठिकानों पर बढ़ी चिंता
अमेरिका-ईरान के बीच 2029 तक संघर्ष का खतरा: IAEA की रिपोर्ट से ईरान के परमाणु ठिकानों पर बढ़ी चिंता

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की ताजा रिपोर्ट ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर गंभीर 'संकेत' मिलने का खुलासा किया है, जिससे वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं। इस रिपोर्ट के बाद अमेरिका और ईरान के बीच पहले से जारी तनाव और गहरा गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस संघर्ष के 2029 तक जारी रहने की आशंका जताई है, जबकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी अमेरिका की नीतियों की तीखी आलोचना हुई है।

IAEA की रिपोर्ट और वैश्विक प्रतिक्रिया

IAEA की गोपनीय रिपोर्ट में ईरान के उन परमाणु ठिकानों पर कुछ गतिविधियों के संकेत मिले हैं, जिनकी निगरानी पहले से ही की जा रही थी। इन संकेतों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान के परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता पर सवाल उठाने का मौका दिया है। उधर, अमेरिका लगातार ईरान की आर्थिक आय पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रहा है, ताकि उसके परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को रोका जा सके। हालांकि, चीन जैसे देश ईरान के साथ अपने व्यापारिक संबंध बनाए रखकर अमेरिकी प्रतिबंधों को चुनौती दे रहे हैं। ब्रिक्स व्यापार मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरानी नेता मसूद पेज़ेश्कियान से मुलाकात भी हुई, जहां उन्होंने अमेरिका की नीतियों पर खुलकर बात की।

बढ़ता तनाव और भारत की भूमिका

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ईरान लगातार अपनी संप्रभुता का हवाला देते हुए अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बता रहा है, जबकि पश्चिमी देश इसे परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश के रूप में देखते हैं। इस जटिल स्थिति में भारत जैसे देशों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, जो दोनों पक्षों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। ब्रिक्स जैसे मंचों पर इन मुद्दों पर चर्चा वैश्विक कूटनीति का एक अहम हिस्सा है। आने वाले समय में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं ही इस गतिरोध का भविष्य तय करेंगी।

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