श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या)
Shravana Amavasya / Hariyali Amavasya • कृष्ण अमावस्याशिव-पार्वती आराधना, प्रकृति वंदना, वृक्षारोपण एवं सुख-समृद्धि हेतु पितृ तर्पण।
सभी त्योहारों की तिथियां, प्रदोष काल, स्थिर लग्न एवं निशिता काल मुहूर्त खगोलीय गणित पर आधारित हैं।
शिव-पार्वती आराधना, प्रकृति वंदना, वृक्षारोपण एवं सुख-समृद्धि हेतु पितृ तर्पण।
विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश का प्राकट्य दिवस। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न काल में गणपति बप्पा की स्थापना।
निर्जला व्रत रखकर माता गौरी और महादेव के पावन बालू / मिट्टी के स्वरूप का चार प्रहर पूजन व रात्रि जागरण।
शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी पर मध्याह्न काल में विघ्नहर्ता गणपति बप्पा का पूजन व मोदक भोग।
क्षीरसागर में भगवान विष्णु द्वारा करवट बदलने का पावन दिन व वामन जयंती।
संध्याकाल में देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन प्रदोष व्रत। गुरु प्रदोष व्रत (सौभाग्य व गुरु कृपा) के प्रभाव से कष्टों का निवारण होता है।
चौदह गांठों वाले रक्षा सूत्र (अनंत सूत्र) का धारण, अनंत पद की प्राप्ति और दस दिवसीय गणेशोत्सव का विसर्जन।
पितृपक्ष का शुभारंभ, ऋषि पूजन व उमा-महेश्वर व्रत का पावन दिन।
मंगलवार को पड़ने वाली अत्यंत शुभ व फलदायी अंगारकी संकष्टी चतुर्थी। विघ्नहर्ता गणेश जी की विशेष कृपा।
पितरों को अधोगति से मुक्ति व वैकुंठ लोक की प्राप्ति कराने वाली पितृपक्ष एकादशी।
संध्याकाल में देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन प्रदोष व्रत। गुरु प्रदोष व्रत (सौभाग्य व गुरु कृपा) के प्रभाव से कष्टों का निवारण होता है।
शनि अमावस्या पर शनि देव पूजन, छाया दान व पितृ तर्पण से साढ़ेसाती व ढैय्या की शांति।
आश्विन मास की पावन नवरात्रि। मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना, अखंड ज्योति, गरबा-डांडिया और कन्या पूजन।
शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी पर मध्याह्न काल में विघ्नहर्ता गणपति बप्पा का पूजन व मोदक भोग।
अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की शाश्वत विजय का महापर्व। रावण दहन, शस्त्र पूजन एवं शमी वृक्ष दर्शन।
पापों पर अंकुश लगाने वाली और अक्षय स्वर्ग सुख प्रदान करने वाली पापांकुशा एकादशी।
संध्याकाल में देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन प्रदोष व्रत। शुक्र प्रदोष व्रत (सुख, समृद्धि व ऐश्वर्य) के प्रभाव से कष्टों का निवारण होता है।
चंद्रमा की सोलह कलाओं से अमृत वर्षा की रात्रि, खीर प्रसाद व महालक्ष्मी कोजागरी पूजन।
अखंड सौभाग्य, सुहाग की दीर्घायु और अटूट दांपत्य प्रेम का निर्जला व्रत। सायं चौथ माता पूजन एवं चंद्र दर्शन।
समस्त संकटों व विघ्नों को दूर करने वाला भगवान श्री गणेश का संकष्टी चतुर्थी व्रत। सायं पूजन व चंद्र दर्शन।
संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, रक्षा और वंश वृद्धि के लिए माताओं द्वारा निर्जला उपवास व सायं तारा दर्शन।
दीपावली पूर्व मां लक्ष्मी (रमा) व भगवान केशव की कृपा और धन-समृद्धि प्रदायिनी एकादशी।
आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य दिवस और धन के देवता कुबेर का पूजन। बर्तन, सोना-चांदी की खरीदारी।
संध्याकाल में देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन प्रदोष व्रत। शुक्र प्रदोष व्रत (सुख, समृद्धि व ऐश्वर्य) के प्रभाव से कष्टों का निवारण होता है।
प्रकाश और समृद्धि का महापर्व। कार्तिक अमावस्या के प्रदोष काल व स्थिर वृषभ लग्न में महालक्ष्मी-गणेश पूजन एवं दीपदान।
अरुणोदय काल में अभ्यंग स्नान (उबटन), यमराज के निमित्त दीपदान और सौंदर्य प्राप्ति का पावन पर्व।
प्रकृति, पर्वत और गोवंश के प्रति कृतज्ञता का पर्व। भगवान श्री कृष्ण द्वारा इंद्र का मानमर्दन व गोवर्धन पर्वत धारण।
अत्यंत दुर्लभ व शुभ सोमवती अमावस्या योग। पीपल प्रदक्षिणा, महास्नान व अखंड सौभाग्य।
भाई-बहन के अमर स्नेह का पावन पर्व। कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन यमुना स्नान, बहन के घर भोजन और तिलक।
शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी पर मध्याह्न काल में विघ्नहर्ता गणपति बप्पा का पूजन व मोदक भोग।
चार दिवसीय महापर्व (नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य)। संतान की दीर्घायु और आरोग्य हेतु अस्ताचलगामी व उदीयमान सूर्य को अर्घ्य।
चार मास के योगनिद्रा के उपरांत भगवान श्री हरि का जागरण व मांगलिक कार्य आरंभ।
भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का पावन वैवाहिक अनुष्ठान। कन्यादान के समान महापुण्य की प्राप्ति।
संध्याकाल में देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन प्रदोष व्रत। रवि प्रदोष व्रत (दीर्घायु, यश व आरोग्य) के प्रभाव से कष्टों का निवारण होता है।
काशी में देवताओं की दीपावली, भगवान शिव द्वारा त्रिपुरारी वध व गुरु नानक देव जयंती।
समस्त संकटों व विघ्नों को दूर करने वाला भगवान श्री गणेश का संकष्टी चतुर्थी व्रत। सायं पूजन व चंद्र दर्शन।
मुर दैत्य के वध हेतु भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी के प्राकट्य का पावन दिवस।
संध्याकाल में देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन प्रदोष व्रत। रवि प्रदोष व्रत (दीर्घायु, यश व आरोग्य) के प्रभाव से कष्टों का निवारण होता है।
भौमवती अमावस्या पर पितृ तर्पण व दान से ऋण मुक्ति व भूमि-भवन सुख की प्राप्ति।
शुक्ल पक्ष की विनायक चतुर्थी पर मध्याह्न काल में विघ्नहर्ता गणपति बप्पा का पूजन व मोदक भोग।
भगवान श्री कृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र में श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश का दिन व मोक्ष प्राप्ति व्रत।
संध्याकाल में देवाधिदेव महादेव की आराधना का पावन प्रदोष व्रत। सोम प्रदोष व्रत (मनोकामना पूर्ति) के प्रभाव से कष्टों का निवारण होता है।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश के संयुक्त अवतार भगवान दत्तात्रेय का प्राकट्योत्सव।
समस्त संकटों व विघ्नों को दूर करने वाला भगवान श्री गणेश का संकष्टी चतुर्थी व्रत। सायं पूजन व चंद्र दर्शन।
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अस्वीकरण: हिन्दू त्योहारों एवं व्रतों की तिथियां पारंपरिक वैदिक पंचांग गणना एवं सूर्य-चंद्रमा की खगोलीय स्थिति पर आधारित हैं। स्थानीय सूर्योदय एवं उदया तिथि के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में 1 दिन का अंतर संभव हो सकता है।