शक्कर महंगी हुई : 15 दिन में चीनी ₹17, गुड़ ₹40 महंगा : महंगाई की मार, अच्छे दिन की शुरुआत
नई दिल्ली. कल तक जिस चीनी को लोग किलो-दो किलो आराम से खरीदकर घर लाया करते थे, उसके भाव ने अचानक किचन का हिसाब बिगाड़ दिया है। पिछले 15 दिनों में चीनी करीब 17 रुपये किलोग्राम और गुड़ करीब 40 रुपये किलोग्राम तक महंगा हो गया है। नतीजा यह कि घर की चाय से लेकर चॉकलेट, दूध, खीर, जूस और मिठाई तक हर चीज में महंगाई का असर दिख रहा है।
चीनी और गुड़ के बढ़ते दाम से बाजारों में खलबली मची हुई है। आम नागरिक से लेकर कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। आशंका है कि इससे कालाबाजारी बढ़ सकती है। कुछ कारोबारियों ने सरकार से अपील की है कि चीनी और गुड़ के कीमतों पर तत्काल लगाने की जरूरत है, नहीं तो दिवाली तक हालात बेकाबू हो सकते हैं।
देशमें पिछले कुछ हफ्तों में शक्कर (चीनी) के दाम तेजी से बढ़े हैं। खुदरा बाजार में कीमत ₹43-46 प्रति किलो से बढ़कर ₹60 से ₹63 प्रति किलो के पार पहुंच गई है। त्योहारी का सीजन आते ही महंगाई से रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। आटा, चीनी, चावल, सरसों व रिफाइन का दाम पहले से बढ़ रहा है। अब चीनी व गुड़ के भाव में तेजी से उछाल आने लगा है। तेल के दाम चार से 25 रुपये तक बढ़ गए हैं। शहर के किराना बाजार में चीनी के दाम एक सप्ताह में 50 रुपये से बढ़कर 70 रुपये किलो हो गए हैं। रोजमर्रा के इन उत्पादों की कीमतें बढ़ने से आम जनता की चिंता बढ़ गई है।
दाम बढ़ने के मुख्य कारणएथेनॉल डायवर्जन : पेट्रोल में मिलाने (E20 लक्ष्य) के लिए गन्ने और रस को एथेनॉल उत्पादन में ज्यादा भेजा गया है।उत्पादन में कमी: इस सीजन में गन्ने का उत्पादन घरेलू मांग के मुकाबले कम रहने का अनुमान है।त्योहारी मांग: आगामी फेस्टिव सीजन (दिवाली, दशहरा) से ठीक पहले मांग में अचानक तेजी आई है।
सरकार के कदमकीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने चीनी के आयात पर शुल्क (import duty) कम करने और स्टॉक सीमा तय करने जैसे उपायों पर विचार शुरू कर दिया है।
पुराने और नए रेट में बड़ा अंतर
चीनी के साथ गुड़ के भाव में तेज उछाल ने भी घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। रिटेल कारोबारी प्रवीण गोयल के अनुसार, 15 दिन पहले गुड़ 60 रुपये प्रति किलोग्राम था, लेकिन आज यह 100 रुपये किलोग्राम तक की कीमत पर मिल रहा है। वहीं, 15 दिन पहले चीनी 48 रुपये किलोग्राम थी।
लेकिन अब इसकी कीमत 62 से 65 रुपये किलोग्राम हो गई है। इसके अलावा एक महीने पहले 900 रुपये किलोग्राम में मिलने वाला बादाम अब 1,100 रुपये किलोग्राम तक में मिल रहा है। जिससे मिठाई, चाय की दुकानों, हलवाई, बेकरी, मिठाई कारोबार और फूड आइटम बनाने वाले छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ेगी।
क्यों बढ़ रही चीनी की कीमत ?
चीनी के एक थोक कारोबारी ने बताया कि इस साल देश में 3.20 लाख टन चीनी तैयार होनी थी, लेकिन 2.80 लाख टन ही चीनी तैयार हुई है। साथ ही दूसरे देशों में भी चीनी को एक्सपोर्ट किया गया, लेकिन बढ़ती महंगाई तो देखते हुए चीनी का एक्सपोर्ट फिलहाल बंद कर दिया गया है।
बावजूद चीनी के रेट में कमी नहीं देखने को मिल रही है। कारोबारी का दावा है कि चीनी की कीमत थोक बाजार में पिछले दो महीने में करीब 15 रुपये बढ़ गई है। सरकार ने 1 अगस्त से स्टॉक लिमिट भी लगा दिया है। थोक कारोबारी अब 30 दिन में 4 हजार क्विंटल चीनी बेच सकेगा। तर्क है कि महंगाई के पीछे एथेनॉल भी कारण है।
सप्लाई को लेकर है चिंता
दुनियाभर में चीनी की सप्लाई को लेकर काफी चिंता का माहौल है, इसी बीच इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती की जा रही है। अल नीनो की वजह से फसल को लेकर काफी चिंता बढ़ी हुई है और इसने न्यूयॉर्क में चीनी की भविष्य को लेकर चिंता खड़ी कर दी है। ऐसे में भारत को भी इस मौसम संबंधित चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मानसून की बारिश, जिस पर गन्ने की फसल निर्भर करती है वो सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है।
सीजन आते ही चीनी की कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। इस बार तो कीमतें इस तरह आसमान छू रही हैं, जैसा कि कभी भी नहीं देखा गया है। ऐसे में सरकार भी लगातार इस जुगत में लगी हुई है कि कैसे त्यौहारों को फीका होने से बचाया जाए। इसके लिए अब सरकार ने एक तरीका भी खोज लिया है. जिसके तहत अब शुगर की इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव किया जाएगा।
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