📅 Tuesday, 29 September 2026 | 09:59 PM IST
लाइव सेंसेक्स: 72,529.07 ▼ -1,366.63 (-1.85%) • निफ्टी 50: 22,716.20 ▼ -424.30 (-1.83%) • 🪙 सोना 24K (10g): ₹148,580 • 🥈 चांदी (1kg): ₹229,300 • 🌤️ उज्जैन: 25°C (हल्के बादल)
दिल्ली

वाणी वीणा बने, शूल नहीं : आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज

📅 15 August 2026, 03:43 PM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 4 मिनट में पढ़ें
शेयर करें:
WhatsApp Facebook Twitter Telegram Instagram
वाणी वीणा बने, शूल नहीं : आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज
वाणी वीणा बने, शूल नहीं : आचार्य विशुद्धसागर जी महाराज

सत्य के नाम पर लड़ो मत, सत्य जानकर लड़ाई शांत करो : विसम्वाद से बचो, सम्वाद करो...

राजेश जैन दद्दू 

दिल्ली. 

दिल्ली स्थित ऋषभोदय, ऋषभ बिहार  में विराजित दिगम्बर जैन श्रमण-संस्कृति महामहिम  अध्यात्मयोगी, पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी गुरुदेव  ने धर्म-सभा को सम्बोधित करते हुए जीवन जीने के श्रेष्ठ सूत्र प्रदान किए। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि गुरुदेव देव ने आज की मंगल देशना में कहा कि यशस्वि जीवन ही सुखद गुरुदेव ने कहा सुख, शांति, आनन्द पूर्वक जीवन जीना है, तो अपयश से बचो। जीवन में यश होना ही श्रेष्ठ है। यशस्वि-जीवन ही सुखद होता है।"

सम्वाद ही समाधान 

उन्होंने कहा जीवन में अशांति से बचना है तो भूलकर भी किसी से विसम्वाद मत करो।परस्पर सम्वाद से ही समस्या का समाधान संभव है। "विवादों का अंत करना है, तो झगड़ा होने पर भी परस्पर बोलना बंद मत करो। मन न मिले तब भी बात करते रहो।"  भ्रम और शंका से ही विसम्वाद प्रारम्भ होता है। इससे बचने के लिए सही सोच, सही दृष्टि और समीचीन चिन्तन आवश्यक है। सम्वाद महान शक्ति है।

सत्य जानो, सम्प्रदाय मत बनाओ, आचार्य श्री ने कहा सत्य धर्म है, सत्य ही सार है, सत्य शान्ति का द्वार है। प्रयत्नपूर्वक सत्य को जानो, पहचानो, सीखो, बोलो और सत्यपूर्ण जीवन जियो। उन्होंने आगाह किया "सत्य को स्वीकार करो, परन्तु सम्प्रदाय मत बनाओ। सत्य के नाम पर लड़ो मत, सत्य जानकर लड़ाई शांत करो।" सत्यवादी को कष्ट हो सकता है, परन्तु जहाँ सत्य होगा वहीं विजय होगी। सत्य में ही शांति और आनंद है।

वाणी वीणा बने, शूल नहीं

गुरुदेव ने वाणी की महत्ता बताते हुए कहा आपकी वाणी मधुर, हितकारी, संशयहारी और मिश्री के समान मीठी* होना चाहिए। सोच-समझकर, विनम्रता से बोलो। आपका एक वाक्य शत्रु को मित्र बना सकता है और आपका एक कटु-वाक्य मित्र को शत्रु बना सकता है। कटु वाक्य शस्त्र से भी अधिक घातक होते हैं। वाणी से ही व्यक्ति के कुल और आंतरिक भावों की पहचान होती है।

श्वासों से भावों का बोध

आचार्य श्री ने कहा व्यक्ति की श्वासों से आंतरिक भावों का बोध होता है। जिसकी श्वासें तीव्र हैं वह कषाय में लवलीन है। क्रोधी, कामी, कषायी की श्वासें तीव्र होती हैं, जबकि योगी की श्वासें मंद होती हैं।  

श्वासों को संभालो, श्वास जीवन का आधार है। जो श्वासों को संभाल लेगा उसकी आकांक्षाएं शांत हो जाएंगी।"* राग-द्वेष से शून्य हो जाओ। कल्याण चाहिए तो संक्लेशता से शून्य हो जाओ।

शून्य शक्ति को जानो 

अंत में गुरुदेव ने कहा एक अंक पर शून्य लगा दो तो वह दस गुणा हो जाता है।"* शून्य से ही इंसान का जन्म होता है। शून्य स्वभाव से ही आत्मा परमात्मा बनती है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के अमृत वचनों का लाभ लिया।

📲

पालीवाल वाणी WhatsApp चैनल से जुड़ें

ताज़ा ब्रेकिंग न्यूज़ और समाज के सभी समाचार सबसे पहले अपने फोन पर पाएं।

चैनल से जुड़ें →

संबंधित खबरें

सभी देखें →
WhatsApp हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें