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सनातन धर्म मे पितृ पक्ष का विशेष महत्व : पितृ तर्पण श्राद्ध पक्ष 26 सितम्बर से

📅 25 September 2026, 12:13 AM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 5 मिनट में पढ़ें
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सनातन धर्म मे पितृ पक्ष का विशेष महत्व : पितृ तर्पण श्राद्ध पक्ष 26 सितम्बर से
सनातन धर्म मे पितृ पक्ष का विशेष महत्व : पितृ तर्पण श्राद्ध पक्ष 26 सितम्बर से

टोंक. सनातन धर्म मे पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। शास्त्रों अनुसार पितृ पक्ष वो पावन समय है, जब हम अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धा के साथ याद करते हैं, उनका तर्पण करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि पितरों के प्रसन्न होने से ही परिवार में सुख-समृद्धि और वंश वृद्धि होती है। श्राद्ध का दुसरा नाम कनागत भी है!

मनु ज्योतिष एव वास्तु शोध सस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने पालीवाल वाणी को बताया कि श्राद्ध चिंतामणि ग्रंथ अनुसार किसी मृत आत्मा का तीन वर्षो तक श्राद्ध कर्म नही किया जाए तो वो जीवात्मा प्रेत योनि में चली जाती है, इनकी मुक्ति के लिए शास्त्रों में त्रिपिंडी श्राद्ध करने का विधान है, दैहिक दैविक एवं भौतिक तीनों तापो से मुक्ति पाने के लिये श्राद्ध से बढ़कर कोई उपाय नही है! 

बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि, इस वर्ष  में पितृ पक्ष का प्रारंभ 26 सितम्बर 2026, शनिवार को पूर्णिमा श्राद्ध से हो रहा है और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा।

  • - 26 सितम्बर (शनिवार) - पूर्णिमा श्राद्ध: जिन पितरों का देहांत पूर्णिमा तिथि को हुआ हो।
  • - 27 सितम्बर - प्रतिपदा श्राद्ध
  • - 28 सितम्बर - द्वितीया श्राद्ध
  • - 29 सितम्बर - तृतीया एवं महा भरणी  श्राद्ध:-  यह तिथि अत्यंत फलदायी मानी जाती है। भरणी नक्षत्र में किया गया श्राद्ध गया श्राद्ध के समान फल देता है।
  • - 30 सितम्बर - चतुर्थी एवं पंचमी श्राद्ध: इस दिन दो तिथियों का संगम है। दोपहर 2:55 बजे तक चतुर्थी, उसके बाद पंचमी। जिनकी तिथि याद न हो वे पंचमी को श्राद्ध कर।सकते हैं।
  • - 1 अक्टूबर -  पंचमी दोपहर 12-35 बजे तक  उपरांत षष्ठी श्राद्ध
  • - 2 अक्टूबर - सप्तमी श्राद्ध 
  • - 3 अक्टूबर - अष्टमी श्राद्ध
  • - 4 अक्टूबर - नवमी श्राद्ध: इसे मातृ नवमी भी कहते हैं। इस दिन विवाहित महिलाओं के श्राद्ध का विशेष महत्व है।
  • - 5 अक्टूबर - दशमी श्राद्ध
  • - 6 अक्टूबर - एकादशी श्राद्ध
  • - 7 अक्टूबर - द्वादशी एवं मघा श्राद्ध: मघा नक्षत्र पितरों का सबसे प्रिय नक्षत्र है। इस दिन श्राद्ध करने से पितर शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
  • - 8 अक्टूबर - त्रयोदशी श्राद्ध
  • - 9 अक्टूबर - चतुर्दशी श्राद्ध: यह तिथि केवल शस्त्र, विष, दुर्घटना से मृत लोगों के लिए होती है।
  • - 10 अक्टूबर - सर्वपितृ अमावस्या: यह पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। यदि किसी कारणवश आप अपनी तिथि पर श्राद्ध न कर पाए हों, तो इस दिन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है।
  • श्राद्ध के समय क्या करें:

    1. दोपहर के समय (कुतुप मुहूर्त में) पितरों के नाम से जल में तिल मिलाकर तर्पण करें।

    2. ब्राह्मण भोजन और गौ ग्रास अवश्य निकालें।

    3. इस दौरान पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।

    पितृ मंत्र:

    श्राद्ध के समय इस मंत्र का जाप करें -

    ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।

    ॐ पितृ देवताभ्यो नमः॥

     श्रद्धा से किया गया एक लोटा जल एवं तिल भी पितरों तक अवश्य पहुंचते है।

    बाबूलाल शास्त्री टोंक मो. 9413129502

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