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संविधान की पुस्तक में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, रामायण, महाभारत के चित्र दर्शाते हैं भारत की राष्ट्रीयता

📅 10 October 2026, 12:03 AM • ✍️ paliwalwani • ⏱️ 9 मिनट में पढ़ें
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संविधान की पुस्तक में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, रामायण, महाभारत के चित्र दर्शाते हैं भारत की राष्ट्रीयता
संविधान की पुस्तक में मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, रामायण, महाभारत के चित्र दर्शाते हैं भारत की राष्ट्रीयता

इंडोनेशिया में रामलीला के कलाकार मुसलमान ही होते हैं, क्योंकि वे अपने पूर्वजों को नहीं भूले

विचार आधारित पार्टी भी अब 36 प्रतिशत वोटों से संतुष्ट हो गई है, जबकि सेकुलर विचार वाली भगवा से डराती है

लोकमंथन यात्रा में जसवंत खत्री की दो टूक

शराब जेसी बुराई से बचा हुआ है जयपुर का अभयपुरा गांव। डीग के पालका में आज भी हताई पर होते हैं फैसले

  • देश की लोकसंस्कृति, लोक परपंरा, साहित्य, शिक्षा और संविधन के मूल्यों को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकाली जा रही लोक मंथन यात्रा 8 अक्टूबर को अजमेर पहुंची। यात्रा के अजमेर पहुंचने पर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सभागार में संविधन में उल्लेखित हम भारत के लोग शब्द पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
  • संगोष्ठी में मुख्यवक्ता के तौर पर बोलेते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह इंजीनियर जसवंत ने कहा संविधान की पुस्तक में मोहनजोदड़ा, हड़प्पा, रामायाण, महाभारत आदि के साथ साथ हिमालय पर्वत और महापुरुषों के चित्र अंकित है। ये चित्र ही भारत की राष्ट्रीयता को दिखाते हैं। संविधान बनाते समय डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि आज हम भले ही अलग अलग विचारों के लोग संविधान को बना रहे हो, लेकिन एक समय आएगा, जब हम सब एक होंगे।

    उन्होंने कहा कि वैदिक काल से ही सनातन का भाव निकला है। आजादी के बाद पाठ्य पुस्तकों में संविधान की भावना के अनुरूप पाठ होने चाहिए थे, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। सेकुलर विचारधारा ने हमारे संविधान की भावना को ही खत्म कर दिया। संविधान में जो चित्र दर्शाए गए वह सभी सनतान संस्कृति से जुड़े हुए हैं, उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया  मुस्लिम देश है, लेकिन वहां आज भी रामलीला का मंचन होता है। रामलीला के सभी कलाकार मुसलमान होते हैं, लेकिन किसी भी मुस्लिम कलाकार को रामायण के पात्र बनने पर ऐतराज नहीं है। उनका मानना है कि उनके पूर्वज सनातन संस्कृति को ही मानने वाले थे, वे अपने पूर्वजों को कभी नहीं भूल सकते।

    36 प्रतिशत से संतुष्टि :

    खत्री ने किसी राजनीतिक दल का नाम लिए बगैर कहा कि आज विचार आधारित पार्टी 26 प्रतिशत वोटों से संतुष्ट हो गई है। जबकि सेकुलर विचार वाली पार्टी भगवा से डरा रही है। आज जब सौ प्रतिशत मतदान की जरुरत है, तब 36 प्रतिशत का जुगाड़ किया जा रहा है। हालातइतने खराब है कि जाति आधारित मतदान होने लगा है। परिणाम भी जाति आधारित सामने आ रहे है। सरेआम कहा जा रहा है कि अब देश का भविष्य संसद में नहीं सड़क पर तय होगा। जबकि ऐसे ह लोगों ने 1976 में आपातकाल के दौरान संविधान की आत्मा को मार दिया था।

    यात्रा के संस्मरण :

    संगोष्ठी में लोकमंथन यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने यात्रा के संस्मण सुनाते हुए कहा कि जयपुर के अभयपुरा गांव में बिना किसी लोभ लालाच के सौ प्रतिशत मतदान होता है। यह गांव आज भी शराब जैसीे बुराइयों से बचा हुआ है। इसी प्रकार डीग के पालका गांव के लोग अपने विवादों को गांव की जताई पर ही निपटाते हैं। गांव का कोई भी व्यक्ति पुलिस और अदालत में नहीं जाता।

    यात्रा के दौरान ऐसे अनेक ग्रामीण मिले जिन्हें संविधान के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन स्वयं की न्याय व्यवस्था के कारण पेड़ काटने पर रोक लगा रखी थी। यात्रा में अनेक संयुक्त परिवार भी देखने को मिले जो हम भारत के लोग के भाव को प्रकट करते थे। संगोष्ठी का यह आयोजन अधिवक्ता परिषद विज्ञान भारती एवं राजस्थान ह्यूममन रिसोसेज डवलपमेंट फाउंडेशन आरएचआरडी के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता जगदीश सिंह राणा ने की।

    संगोष्ठी के मंच पर पूर्व आईपीएस कन्हैयालाल बैरवा, आरएचआरडी के अध्यक्ष हरदयाल, वसंत विजयवर्गीय, भवानी सिंह रोहिला आदि बैठे। वहीं संगोष्ठी में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के कुलगुरु सुरेश कुमार अग्रवाल, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़, अजयमेरु विभाग के संघचालक मुकेश अग्रवाल, वरिष्ठ एडवोकेट एसके सक्सेना आदि भी उपस्थित रहे। संगोष्ठी में महानगर संघ चालक खाजू लाल चौहान ने आभार प्रकट किया तथा अधिवक्ता परिषद की प्रांत कार्यकारिणी के सदस्य जेपी शर्मा ने सफल संचालन किया।

    पुष्कर से शुरू हुई यात्रा :

    8 अक्टूबर 2026 को तृतीय चरण में लोक मंथन यात्रा पुष्कर तीर्थ से शुरू हुई। पहले पुष्कर में पूजा अर्चना की गई और फिर यह यात्रा वाहन रैली के रूप में आदर्श विद्या निकेतन के निकट रीजनल कॉलेज तिराहे पर पहुंची, यहां पर यात्रा का जोरदार स्वागत किया गया। यहां से यात्रा राजकीय कन्या महाविद्यालय पहुंची, जहां पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

    अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ, संस्कार भारती, संस्कृत भारती एवं अन्य संगठनों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभिन्न लोक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय लोक परम्परा के साथ लोक वाद्य, लोक गीत, लोक नृत्य आदि की प्रस्तुति हुई । क्रीड़ा भारती द्वारा लोक खेल सतोलिया, लट्टू, लंगड़ी टांग, रस्सा-कशी, खो-खो, कबड्डी का प्रदर्शन हुआ।

    कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम का प्रारंभ पूर्ण वन्देमातरम राष्ट्र गीत के गायन के साथ हुआ । बाद में  महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा पधारो म्हारे देश लोक गीत की मनमोहक प्रस्तुति हुई, तत्पश्चात मंच पर कलाकारों का स्वागत भी किया गया। लोक कलाकार अशोक शर्मा ने भवई नृत्य की प्रस्तुति दी। संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं द्वारा नृत्य नाटिका के माध्यम से संस्कृत भाषा को कैसे सीखें यह बताया।  अजमेर के बाद यात्रा अपने अगले पड़ाव  लल्लाई  ग्राम सरवाड़ रवाना हुई, इसके बाद जालिया 2 ब्यावर पहुंची। यह यात्रा पुष्कर में 8 अक्टूबर से प्रारंभ हुई जो 21 अक्टूबर 2026 को झालावाड़ में सम्पन्न होगी। यात्रा से संबंधित और अधिक जानकारी मोबाइल नबंर 9414785558 पर मनोज बहरवाल है।

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