उत्तर प्रदेश.
कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से निष्कासित समाजवादी पार्टी (सपा) की विधायक पूजा पाल इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं में छाई हुई हैं. हाल ही में एक विजन डॉक्यूमेंट पर चर्चा के दौरान योगी आदित्यनाथ सरकार की कानून-व्यवस्था की तारीफ करने पर सपा नेतृत्व ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया. इस पर पूजा पाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा जिन्होंने मुझे न्याय दिलाया, उनकी तारीफ करना क्या गलत है...!”
कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी विधायक पूजा पाल को आखिरकार पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. पिछले साल राज्यसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के पक्ष में वोटिंग की थी. उस समय से अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी.
पूजा पाल ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा 2012 में जब मैं सपा से जुड़ी थी, तब यह अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी थी. लेकिन आज मुझे लगता है कि अखिलेश यादव भी माफियाओं का साथ दे रहे हैं. अब यह पार्टी फिर से नेताजी मुलायम सिंह यादव की बन गई है. उन्होंने आगे कहा जिसने मेरे पति के हत्यारों का सफाया किया, उसकी तारीफ करने पर मुझे पार्टी से निकाला जा रहा है.
अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बसपा, सपा के बाद पूजा किसी नई पार्टी का दामन थाम सकती हैं. राज्यसभा चुनाव में सपा के सात विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी. अप्रैल 25 में विधायक मनोज पांडेय, अभय सिंह और राकेश सिंह को पार्टी से बाहर किया गया लेकिन पूजा पाल पर पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की थी.
उस समय पार्टी ने कहा था कि पूजा को सुधार का मौका दिया गया, लेकिन पर्दे की पीछे की बात यह थी कि पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (पीडीए) के फार्मूला पर राजनीति कर रहे, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ऐसा कुछ नहीं करना चाहते थे कि पाल बिरादरी में कोई गलत संदेश चला जाए और भाजपा उसको भुना ले.
पूजा पाल 2022 के विधानसभा चुनाव में चायल सीट से सपा के टिकट पर विधायक बनी थीं. उमेश पाल हत्याकांड के बाद पूजा का रुख बदलने लगा. वह भाजपा के करीब होने लगीं. उनके आचरण और बयानों को लेकर पार्टी में असंतोष बढ़ रहा था.
हालांकि, उन्होंने लखनऊ में खुलकर कहा कि अतीक के आपराधिक साम्राज्य का खात्मा कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें न्याय दिलाया. इस मामले में सपा का दोहरा चरित्र सामने आया है.
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पूजा पाल का भाजपा में जाना तय है. उन्हें मंत्री पद भी दिया जा सकता है। सपा में रहते हुए वह मंत्री नहीं बन सकती थीं। अब रास्ता साफ हो गया.