रामायण अपहरण का केस है और महाभारत जमीन का केस : छात्र के इस जवाब ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका

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रामायण अपहरण का केस है और महाभारत जमीन का केस है, एक छात्र के इस जवाब ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका, वायरल कॉपी ने आज की जनरेशन की सोच पर खड़ा किया बड़ा सवाल

नाथद्वारा. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक छात्र की कॉपी का पन्ना तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने आज की जनरेशन की सोच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. इस वायरल कॉपी में एक सवाल पूछा गया था कि प्र०- रामायण और महाभारत से आपने क्या सीखा ? और छात्र ने इसका जवाब दो लाइन में लिख दिया.

छात्र ने लिखा कि ऊ०- रामायण अपहरण का केस है और महाभारत जमीन का केस है.

देखने में यह केवल एक मजाक लग रहा है, लेकिन इसके पीछे आज की जनरेशन की एक कड़वी सच्चाई छिपी हुई है. आज की जनरेशन रामायण और महाभारत को धर्म ग्रंथ के रूप में नहीं बल्कि क्राइम और प्रॉपर्टी के केस के रूप में देख रही है. यह सोच हमारे आसपास के माहौल से आई है. आज बच्चा समाज में यही देख रहा है कि हर जगह जमीन के लिए भाई भाई लड़ रहा है और यही महाभारत है और हर जगह अपहरण जैसी घटनाएं हो रही हैं.

इसलिए इस छात्र का जवाब गलत नहीं बल्कि आज के सिस्टम का सटीक पोस्टमार्टम है. उसने धर्म के ज्ञान को आज की भाषा में लिख दिया. रामायण में माता सीता का अपहरण हुआ था और आज भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं. महाभारत में जमीन के लिए पूरा वंश खत्म हो गया और आज भी एक इंच जमीन के लिए भाई भाई का दुश्मन बन रहा है.

शिक्षा विदों का कहना है कि इस वायरल कॉपी को केवल हंसी मजाक में नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह समझना चाहिए कि हम अपने बच्चों को रामायण और महाभारत का असली संस्कार दे पा रहे हैं या नहीं. हमें बच्चों को यह बताना होगा कि रामायण त्याग और मर्यादा का केस है और महाभारत न्याय और धर्म का केस है.

हाँ, यह एक बहुत प्रसिद्ध और लोकप्रिय सामाजिक कहावत या व्यंग्य है कि रामायण अपहरण का केस है और महाभारत जमीन (संपत्ति) का विवाद है.

इस वाक्य का सार इस प्रकार है : 

  • रामायण (अपहरण का केस) : इस महाकाव्य की मुख्य घटना लंका के राजा रावण द्वारा माता सीता का छलपूर्वक किया गया अपहरण है, जिसके कारण श्रीराम ने लंका पर आक्रमण किया और रावण का वध किया. इसलिए इसे एक प्रकार से अपहरण और उसके बाद न्याय/उद्धार की गाथा कहा जाता है. 
  • महाभारत (जमीन का विवाद) : इस महाकाव्य की पूरी कहानी हस्तिनापुर की भूमि और साम्राज्य के अधिकार (सुई की नोक बराबर भी जमीन बिना युद्ध के न देने की जिद) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कौरवों और पांडवों के बीच हुए विनाशकारी युद्ध का मुख्य कारण बनी.

● Disclaimer : इस लेख में दी गई ज्योतिष जानकारियां और सूचनाएं लोक मान्यताओं पर आधारित हैं. इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. पालीवाल वाणी इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले इससे संबंधित पंडित ज्योतिषी से संपर्क करें तथा चिकित्सा अथवा अन्य नीजि संबंधित जानकारी के लिए अपने नीजि डॉक्टरों से परार्मश जरूर लीजिए. पालीवाल वाणी तथा पालीवाल वाणी मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है.

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