हलवा-खीर-पूड़ी खाने और रिश्तेदारों पर फोन पर बात करने, किताबें पढऩे, लिखने जैसी पर्याप्त सुविधाओं के बाद भी अजमेर में हाई सिक्योरिटी जेल के कैदी अपनी मांगों को मनवाने के लिए हड़ताल करते हैं।
ताजा मामला पंजाबी सिंगर सिद्ध मुसेवाला की हत्या के मुख्य आरोपी सचिन थापन का है। यह लॉरेंस गैंग का सदस्य है।
S.P.MITTAL BLOGGER
अजमेर. देश में सिर्फ दो हाई सिक्योरिटी जेल है। इनमें से एक अजमेर में है। अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में देशभर के कुख्यात और खतरनाक अपराधियों को रखा जाता हे। 7 अक्टूबर 2026 को सचिन थापन नाम के कैदी को जेल से जेएलएन अस्पताल लाया गया। यह कैदी पिछले तीन दिन से भूख हड़ताल पर था।
तबीयत बिगडऩे के कारण इससे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया। सचिन थापन की मांग है कि 22 सितंबर से पहले उसकी बैरक में जो दो कैदी रामवीर और सुमित रहते थे, उन्हें वापस मेरे साथ बैरक में रखा जाए। इन दोंनो कैदियों के बगैर बैरक में उसका मन नहीं लगता है। वही जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ का कहना है कि रामवीर और सुमित ने 22 सितंबर को बैरक में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया था।
इसलिए इन दोनों को दूसरी बैरक में शिफ्ट किया गया है। मालूम हो कि चंबल के डकैत जगन गुर्जर की कुछ माह पहले साथी कैदी ने ही बैरक में हत्या कर दी थी। हत्या से पहले कैदी विष्णु जाट ने सीसीटीवी कैरे को खराब कर दिया था। जगन गुर्जर के प्रकरण को देखते हुए ही एहतियात के तौर पर रामवीर और सुमित को सचिन थापन के बैरक से अलग किया गया।
वैसे भी किसी बैरक में कौन से कैदी रहेंगे इसका निर्णय जेल प्रशासन ही करेगा। यदि कुख्यात अपराधी हाई सिक्योरिटी जेल में कैदियों के साथ रहने का निर्णय करेंगे तो फिर हाई सिक्योरिटी जेल का कोईमतलब नहीं रहेगा। किसी भी जेल में कुख्यात अपराधियों को रखा आसान नहीं होता है।
मानवाधिकार के नाम पर अनेक सुविधाएं :
कहने को तो अजमेर में हाई सिक्योरिटी जेल है, लेकिन इस जेल में भी मानवाधिकारों के नाम पर कुख्यात कैदियों को पर्याप्त सुविधाएं मिलती है। सुबह के नाश्ते के साथ दोनों समय 6-6 रोटी वाली भोजन की थाली प्रत्येक कैदी को मिलती है। दोनों समय दो सब्जियां भी दी जाती है। कई कैदी एक साथ 6 रोटियां नहीं खा पाते, लेकिन जेल प्रशासन को नियमों के तहत 6 रोटियां देनी ही पड़ती है। जो रोटी बच जाती है, उसकी बेकद्री होती है।
सप्ताह में एक दिन हलवा और एक दिन खीर-पूड़ी की दावत कैदियों को दी जाती है। जेल की रसोई में आधुनिक मशीनें लगी हुई है, इन्हीं मशीनों पर हाटा गूंथने और रोटी बनाने का काम होता है। यानी शुद्धता का पूरा ख्याल रखा जाता हे। अजमेर को हाई सिक्योरिटी जेल में इस समय 400 से ज्यादा कैदी है। जेल परिसर में पांच-पांच बैरक के कई ब्लॉक बने हुए हैं।
कैदियों को बैरक से अपने ब्लॉक में रेजानाबाहर आने की छूट भी मिलती है। 5 बैरक वाले कैदी आपस में संवाद भी कर सकते हैं। यानी कैदियों को 24 घंटे अपने बैरक में नहीं रहना पड़ता। खीर-पूडी और हलवे की सुविधा के साथ कैदियों को बैरक में पुस्तकें और अखबार पढऩे की भी सुविधा है। इसके लिए जेल परिसर में एक लाइब्रेरी भी बना रखी है।
यदि कोई कैदी कुछ लिखना चाहता है तो उसे कागज और पेन भी उपलब्ध करवाया जाता है। इतना ही नहीं कैदियों की मांग पर राम नाम लिखने वाली कॉपी भी दी जाती है। कैयिों के सद्व्यवहार के लिए जेल प्रशासन जो कुछ भी कर सकता है, वह करता है। यहां तक कि फोन पर रिश्तेदारों से बात भी करवाई जाती है। जेल नियमों के तहत रिश्तेदारों से मुलाकात भी करवाई जाती है।
चूंकि ऐसे कैदियों को जेल से बाहर जान का खतरा होता है, इसलिए जेल परिसर में ही वातानुकूलित वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम बना रखा है, इसी से कैदियों की विभिन्न अदालतों में सुनवाई की जाती है। इसके साथ ही जेल परसिर में जे कैंटीन बनी हुई है उससे प्रत्येक कैदी प्रतिमाह 3500 रुपए की सामग्री खरीद सकता है। इसमें अचार से लेकर स्वादिष्ट खाने की सभी चीजें शामिल होती है। 35 सौ रुपए की राशि कैदी के रिश्तेदार जमा कराते हैं। जेल में मोबाइल के इस्तेमाल को सख्ती से रोकने के लिए हाईपवार जैमर लगाया गया है।