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न्याय का मतलब यह नहीं कि वादी जो चाहे वह फैसला हो’, बॉम्बे हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

मुम्बई Published by: paliwalwani Updated Mon, 29 Jun 2026 01:21 AM
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मुंबई.  न्याय का मतलब यह नहीं कि आप जो चाहते हैं वही बात कही जाए और आपके दावे को सही ठहराया जाए। यह टिप्पणी बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ में जस्टिस विभा कनकनवाडी और जस्टिस अजीत काडेथानकर की पीठ ने की है।

पीठ ने विधि छात्रा की याचिका को सुनने के बाद उसे खारिज कर दिया है। छात्रा ने महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के निर्णय को चुनौती देते हुए उसके निर्णय पर लापरवाही भरा और गैर जिम्मेदाराना बयान दिया था।

विश्वविद्यालय ने कक्षा में कम उपस्थिति के आधार पर 23 वर्षीय छात्रा को फाइनल परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया था। विश्वविद्यालय के नियम के अनुसार परीक्षा में शामिल होने के लिए कक्षा में 75 प्रतिशत उपस्थित जरूरी है। छात्रा इसी निर्णय के विरोध में हाईकोर्ट में आई थी।

पीठ ने कहा, सुनवाई के लिए सामने आने वाली प्रत्येक याचिका को सुनने के बाद न्यायालय उस पर न्याय करना चाहता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वादी जो चाहे वही फैसला हो जाए।

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