दलाल बाग पर चल रहे भव्य चातुर्मास महोत्सव में देश के 12 राज्यों के 97 शहरों से आई मातृशक्ति का महाकुम्भ शुरू – आज सुबह भव्य जुलूस
प्रचार प्रमुख-राजेश जैन दद्दू
इंदौर. संसार कभी भी पूरी तरह पाप, छल और अधर्म से रहित नहीं होगा इसलिए धर्म के लिए अनुकूल परिस्थितियों की प्रतीक्षा करना स्वय को टालना है। दुनिया हमारी इच्छा के अनुसार नहीं चलेगी लेकिन दुनिया में हमारा आचरण कैसा होगा, इसका निर्णय हमारे हाथ में है। समाज की दृष्टि को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है, लेकिन हमारा चरित्र, व्यवहार, वाणी, संस्कार और जीवनशैली इस बात को बहुत हद तक प्रभावित करते हैं कि लोग हमें किस दृष्टि से देखें।
बच्चों को उनकी स्वाभाविक ऊर्जा से वंचित करने के बजाय उन्हें संस्कार और सही दिशा देना प्रत्येक माता-पिता का दायित्व है। दुनिया को सुधारने की कोशिश करने के बजाय पहले यह तय करना होगा कि हमें कैसी दुनिया चाहिए और फिर स्वयं वैसा बनने का पुरुषार्थ करना होगा। ये दिव्य विचार हैं संत शिरोमणि प.पू. विद्यासागर म.सा. के परम प्रभावक शिष्य और राष्ट्रसंत मुनि पुंगव प.पू. श्री सुधासागर महाराज के, जो उन्होंने सकल दिगम्बर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान में वीआईपी रोड स्थित किला मैदान, दलाल बाग परिसर में निर्मित विद्या-सुधा मंडप में चल रहे चातुर्मास महोत्सव में आज से प्रारम्भ हुए दो दिवसीय जैन महिला महाकुम्भ के पहले दिन देश के 12 राज्यों के 97 शहरों से आई 5 हजार से अधिक मातृशक्ति को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
महाकुम्भ में देशभर के 125 महिला मंडल भाग ले रहे हैं। राष्ट्रीय महिला अधिवेशन के इस आयोजन का शुभारम्भ ध्वजारोहण एवं ध्वज गीत के साथ हुआ। प्रारम्भ में मुख्य संयोजक चक्रवर्ती श्रीमती सपना मनीष गोधा एवं चक्रवर्ती श्रीमती शिवानी नवीन गोधा, राष्ट्रीय अध्यक्ष शीला जैन डोडिया (जयपुर), श्रीमती सुशील पाटनी, श्रीमती शांता पाटनी, श्रीमती तारिका पाटनी, सामाजिक संसद महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष साधना दगडे, रूचि गोधा एवं संगीता बाकलीवाल सहित आयोजन से जुडी बहनों ने सभी अतिथियों की अगवानी की। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस महाकुम्भ की आभा को कई गुना बढ़ा दिया।
मिसेस इंडिया श्वेता मेहता भी सम्मानित
मिसेस इंडिया श्वेता मेहता भी सम्मानित – महाकुम्भ में भारतीय वायुसेना की पूर्व स्क्वाड्रन लीडर नूपुर जैन एवं मिसेस इंडिया श्रीमती श्वेता मेहता मोदी भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी रहीं जिन्हें आयोजन समिति की ओर से चक्रवर्ती अध्यक्ष नवीन गोधा, सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, मनीष गोधा, महोत्सव अध्यक्ष अशोक डोसी, महामंत्री हर्ष जैन, प्रिंसपाल टोंग्या, संजय पाटोदी, संजय सामरिया, गिरीश जैन गिन्नी, अक्षय कासलीवाल, रमेश जैन, धर्मेन्द्र जैन, प्रदीप ब्रह्मचारी, विनोद भैया, विजय दुर्र, सौरभ बडजात्या, राहुल सेठी एवं भूपेंद्र भोपाली आदि ने प्रशस्ति पत्र भेंट किया। अन्य प्रतिभाओं और समाज की विभिन्न मातृशक्ति का भी सम्मान किया गया।
- दलाल बाग : मिसेस इंडिया श्रीमती श्वेता मेहता मोदी संबोधित करते हुए
चिंतन करें कि हमारी कीमत हमारे वस्त्र तय करेंगे या हमारा चरित्र
चिंतन करें कि हमारी कीमत हमारे वस्त्र तय करेंगे या हमारा चरित्र - अधिवेशन में प्रसिद्द साहित्यकार एवं पुरातत्व शोधकर्ता, प्रख्यात वक्ता डॉ. ममता जैन (जयपुर) ने राष्ट्रसंत के चरणों में नमन करते हुए कहा कि यह आयोजन पीढ़ियों को संस्कारित करने वाला एक एतिहासिक अधिवेशन है। यहाँ केवल भीड़ एकत्र नहीं होती बल्कि परिवार बदलते हैं, जीवन संवरते हैं और आने वाली पीढियां संस्कारों से समृद्ध होती है।
“आज के युग में नारी की चुनौती” विषय पर उन्होंने कहा कि शील कोई ड्रेस कोड नहीं, माइंड सेट है। आज की महिला के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं। एक ओर आधुनिक दिखने का दबाव है तो दूसरी ओर अपनी पहचान और संस्कृति को बचाने की चुनौती। जब अच्छा होने से अच्छा दिखना अधिक महत्वपूर्ण हो जाए और फैशन ही हमारी पूरी पहचान को परिभाषित करने लगे तब हमें ठहरकर सोचना होगा कि हमारी कीमत हमारे वस्त्र निर्धारित करेंगे या हमारा चरित्र। शील किसी तरह का ड्रेस कोड नहीं, एक मानसिकता है।
साड़ी और मोबाइल की होड़ न करें -
मर्यादा स्वतन्त्रता छिनने का माध्यम नहीं बल्कि संयम और आत्मसम्मान का संतुलन है। हमारे बीच में प्रतिस्पर्धा साड़ी और मोबाइल की नहीं, संस्कारों की होना चाहिए। साड़ी और मोबाइल की होड़ न करें - एक दूसरे के साथ साड़ी और मोबाइल या वायरल पोस्ट की संख्या से होड़ करेंगे तो यह स्थिति समाज की चारित्रिक दुर्बलता और संस्कारों की कमी की ओर संकेत करती है। हमें सोचना होगा कि मेरे कारण कितने बच्चों में संस्कार आए, कितने परिवार मंदिर और गुरुदेव से जुड़े और मेरे आचरण से कितनों ने संयम और व्रत अपनाया। हम आधुनिक बनें लेकिन अपनी जड़ों से भी जुड़े रहें। स्वतंत्र रहें लेकिन संयम के साथ। फैशन करें लेकिन मर्यादा के साथ।
शील केवल वस्त्रों में नहीं, वाणी, व्यवहार और दृष्टि में भी दिखाई देना चाहिए
शील केवल वस्त्रों में नहीं, वाणी, व्यवहार और दृष्टि में भी दिखाई देना चाहिए। उनके उद्बोधन के दौरान सभामंडप नमो गुरुवार, नमो गुरुवर के जयघोष से गूंज उठा। दूसरा सत्र दोपहर में प्रारम्भ हुआ जिसमें चक्रवर्ती रानी श्रीमती सपना गोधा (इंदौर) ने मुख्य वक्ता के रूप में नारी गौरव सम्मान विषय पर अपने प्रभावी विचार रखे। तीसरे सत्र में महिलाओं के लिए अनेक दिलचस्प और शिक्षाप्रद खेलकूद एवं मनोरंजक स्पर्धाओं का आयोजन हुआ। इन सभी कार्यक्रमों में त्रिशला संभाग इंदौर, सूरत संभाग, अजमेर संभाग एवं देश के अन्य राज्यों से आई मातृशक्ति की भागीदारी बनी रही। रात्रि में भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने हजारों समाज बंधुओं का मन मोह लिया।
स्वागत और पुष्प वर्षा जैसे दृश्य भी नजर आएंगे
आज सुबह 6 बजे महिलाओं का भव्य जुलूस – जुलूस संयोजक राहुल सेठी, सामाजिक संसद महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष साधना दगडे, सह संयोजक गौरव पाटोदी, राहुल झांजरी, अंकुल पाटोदी एवं सुयश जैन ने बताया कि अधिवेशन के दूसरे दिन सोमवार 5 अक्टूबर को देशभर से आई करीब 5100 महिलाएं राष्ट्रसंत प.पू. सुधासागर म.सा. के सानिध्य में एयरपोर्ट थाने के आगे मिडफ्लाइट होटल से दलाल बाग तक पूरे लवाजमे के साथ जुलूस के रूप में निकलेंगी। जैन समाज के इतिहास में यह पहली बार अद्भुत और अनुपम दृश्य शहरवासियों को देखने को मिलेगा। मार्ग में अनेक स्थानों पर स्वागत और पुष्प वर्षा जैसे दृश्य भी नजर आएंगे।
जुलूस थाने के सामने से प्रारम्भ होकर कालानी नगर चौराहा, साधना नगर, रामचंद्र नगर, छत्रपति नगर होते हुए दलाल बाग पहुंचेगा। जुलूस में अश्वारोही 24 मातृशक्ति, 16 बग्घी, 2 बैंड दल, 1 आर्केस्ट्रा पार्टी और तीर्थ क्षेत्र महावीरजी से आए प्रख्यात भजन गायक सोनू भाई एवं उनकी मंडली भजनों की अमृत वर्षा करते हुए चलेंगी। 15 ई-रिक्शा पर महिला मंडल की बहनें भजन गाते हुए चलेंगी। दलाल बाग में सुबह 8 बजे से मुनिश्री के पावन सानिध्य में बैनर प्रजेंटेशन एवं मंगल देशना के आयोजन होंगे। दूसरा सत्र दोपहर 1.15 बजे से शाम 4.30 बजे तक पुरस्कार वितरण का होगा जिसमें विभिन्न स्पर्धाओं में शामिल विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।