इंदौर नगर निगम (indore nagar nigam) के जनकार्य एवं उद्यान विभाग (Public Works and Parks Department) के प्रभारी राजेंद्र राठौर (Rajendra Rathore) ने नगर निगम के निर्माण कार्यों की खोली पोल, निरंजनपुर से एलआईजी चौराहे तक बीआरटीएस (BRTS) कॉरिडोर पर बने आरसीसी मीडियन और स्ट्रीट लाइटिंग के काम में गंभीर अनियमितताओं के आरोप
संजय चौधरी
इंदौर. शहर में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करने वाले जिम्मेदारों के लिए एमआईसी (MIC) मेंबर राजेंद्र राठौर का पत्र आईना साबित हो सकता है। निरंजनपुर चौराहे से एलआईजी चौराहे तक एबी रोड स्थित पुराने बीआरटीएस कॉरिडोर पर आरसीसी मीडियन, स्ट्रीट लाइटिंग और अन्य सड़क सुविधाओं के निर्माण में गंभीर अनियमितताओं तथा लापरवाही की शिकायत सामने आई है। एमआईसी मेंबर जानकारी विभाग ने नगर निगम आयुक्त को लिखे पत्र में निर्माण एजेंसी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कहीं टेढ़ा डिवाइडर, कहीं उखड़ती गुणवत्ता!
पत्र के अनुसार, निर्माण कार्य में कई स्थानों पर कंक्रीट की हनीकॉम्बिंग, दीवारों पर दरारें, रिफोर्समेंट की कमियों और डिवाइडर निर्माण में अनियमितताएं देखने को मिलीं। आरोप है कि आरसीसी मीडियन के निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया। कहीं डिवाइडर की सतह ठीक नहीं, तो कहीं अक्षरों और अन्य हिस्सों की बनावट तक सवालों के घेरे में है। सवाल यह है कि जब निर्माण के दौरान ही खामियां दिखाई देने लगें, तो गुणवत्ता जांच की व्यवस्था आखिर किस काम की है?
बिना सरिये का कंक्रीट, फिर मजबूती की गारंटी कौन देगा?
एमआईसी मेंबर ने पत्र में आशंका जताई है कि कुछ स्थानों पर कंक्रीट में सरिये का समुचित उपयोग नहीं हुआ। पत्र के मुताबिक, निर्माण की कमियों से संबंधित लैब टेस्टिंग रिपोर्ट, फोटो और वीडियो भी उपलब्ध कराए गए हैं। यह भी उल्लेख किया गया है कि मिट्टी के दबाव, पानी की नमी और पौधों की जड़ों के फैलाव से निर्माण जल्द क्षतिग्रस्त हो सकता है। यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह केवल सरकारी धन की बर्बादी का मामला नहीं, बल्कि सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी होगा।
बैठकें हुईं, नोटिस जारी हुए, लेकिन सुधार कहां हुआ?
पत्र में कहा गया है कि अपर आयुक्त (जनकार्य), कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री और ठेकेदार फर्म के संचालक की बैठकें आयोजित की गईं। विभाग की ओर से समय-समय पर सूचना पत्र और नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाने का भी उल्लेख है। इसके बावजूद एमआईसी मेंबर का आरोप है कि ठेकेदार की ओर से लगातार लापरवाही बरती गई और निर्माण कार्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
टेस्टिंग रिपोर्ट असंतोषजनक, भुगतान पर भी सवाल
पत्र के अनुसार, निर्माण कार्य की संयुक्त उपस्थिति में सैंपल कलेक्शन और लैब टेस्टिंग कराई गई, जिसकी रिपोर्ट असंतोषजनक पाई गई। एमआईसी मेंबर ने सवाल उठाया है कि जब निर्माण की गुणवत्ता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं, तो ठेकेदार को भुगतान करना उचित कैसे माना जा सकता है?
अब कार्रवाई की मांग, निगम प्रशासन की जवाबदेही तय हो
राजेंद्र राठौर ने नगर निगम आयुक्त से निर्माण एजेंसी मे. प्रभा एपिकम प्रा. लि. के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने, गुणवत्ताहीन निर्माण को दुरुस्त कराने तथा आवश्यकतानुसार डिवाइडर को तोड़कर दोबारा बनवाने की मांग की है। साथ ही, निर्देशों का पालन नहीं होने की स्थिति में भुगतान रोकने और जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम इस शिकायत को केवल फाइलों में दर्ज करके रखता है या मौके पर जांच कर जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय करता है। आखिर जनता के टैक्स से बनने वाली सड़क कोई प्रयोगशाला नहीं, जहां ठेकेदार मनमर्जी से प्रयोग करे और उसकी कीमत आम नागरिक चुकाए।